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July 29 2026 01:31 pm

Utpanna Ekadashi 2025 : पापों से मुक्ति और संतान सुख देने वाली एकादशी

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India News Live,Digital Desk : वैदिक पंचांग के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी व्रत हर साल मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा-पाठ करने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
साथ ही, संतान सुख की कामना करने वालों के लिए यह व्रत अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है।

उत्पन्ना एकादशी 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त

  • एकादशी व्रत तिथि: 15 नवंबर 2025 (शनिवार)
  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 15 नवंबर, रात 12:49 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 16 नवंबर, रात 02:37 बजे

उत्पन्ना एकादशी का महत्व

हिंदू धर्म के अनुसार, यह वही दिन है जब भगवान विष्णु ने मुर दैत्य का वध किया था और संसार की रक्षा की थी। इसी कारण इसे “उत्पन्ना एकादशी” कहा गया।
जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखता है, उसे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाले सभी कठिनाइयों और दोषों का निवारण होता है।

संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ

जो दंपत्ति संतान प्राप्ति की कामना करते हैं, उन्हें उत्पन्ना एकादशी के दिन संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए।
ऐसा माना गया है कि इस स्तोत्र के नियमित पाठ से संतान की प्राप्ति होती है और संतान का जीवन स्वस्थ, बुद्धिमान और उज्ज्वल बनता है।

संतान गोपाल स्तोत्र का लाभ

  • संतान प्राप्ति की प्रबल संभावना बनती है।
  • पहले से जन्मे बच्चों का स्वास्थ्य और जीवन बेहतर होता है।
  • घर में सुख-शांति बनी रहती है।
  • वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है।
  • दंपत्ति को आध्यात्मिक और मानसिक शांति मिलती है।

उत्पन्ना एकादशी पूजा विधि (Utpanna Ekadashi Puja Vidhi)

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र पहनें।
  2. घर के मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  3. पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप-दीप और फल से पूजा करें।
  4. विष्णु जी को श्रीफल, पंचामृत और तुलसी पत्र अर्पित करें।
  5. पूरे मन से ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें।
  6. संतान प्राप्ति के लिए संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ करें।
  7. रात्रि में जागरण करें और भगवान का स्मरण करें।
  8. अगले दिन दान-पुण्य और गरीबों को भोजन कराने के बाद व्रत तोड़ें।