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July 10 2026 11:39 pm

इजरायल से मिले इनपुट के बाद हिली अमेरिकी सरकार, ट्रंप की हत्या की साजिश का सबसे बड़ा खुलासा

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अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक रक्षा गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी भारी सैन्य संघर्ष के बीच इजरायल की शीर्ष खुफिया एजेंसी ने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन को एक ऐसा इनपुट सौंपा है, जिसने वाशिंगटन से लेकर यूरोपीय देशों तक हड़कंप मचा दिया है। इजरायल द्वारा साझा किए गए इस बेहद गोपनीय और विशिष्ट दस्तावेज़ में दावा किया गया है कि ईरान की खुफिया विंग तेहरान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या के लिए एक नया और हाई-प्रोफाइल 'असासिनेशन प्लान' (Assassination Plot) तैयार कर रही है। यह सनसनीखेज खुफिया जानकारी ऐसे नाजुक मोड़ पर सामने आई है, जब दोनों महाशक्तियों के बीच पिछले महीने हुआ अस्थाई युद्धविराम पूरी तरह टूटने की कगार पर है।

इजरायल ने डिकोड किया तेहरान का सीक्रेट कोड: अमेरिकी जांच एजेंसियों को मिले अकाट्य सबूत

अमेरिकी मीडिया नेटवर्क सीएनएन (CNN) की स्पेशल रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों (CIA और NSA) को पिछले कुछ हफ्तों से ईरान के भीतर अमेरिकी नेतृत्व को निशाना बनाने की गुप्त रणनीतियों की सुगबुगाहट तो मिल रही थी, लेकिन इस बार इजरायली खुफिया इनपुट ने सीधे उस कोर टीम और मोडस ऑपेरंडी (काम करने के तरीके) का पूरा खाका पेश कर दिया है जो इस मिशन पर काम कर रही है। इस पुख्ता अलर्ट के मिलते ही व्हाइट हाउस, सीक्रेट सर्विस और पेंटागन ने एक आपातकालीन बैठक बुलाकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुरक्षा घेरे को मल्टी-लेयर अभेद्य किले में तब्दील कर दिया है।

क्या व्हाइट हाउस को फ्रंटलाइन वॉर में धकेलना चाहता है तेल अवीव? खुफिया टाइमिंग पर उठे सवाल

इस बेहद संवेदनशील खुलासे के बीच वाशिंगटन के कुछ शीर्ष रणनीतिकारों और रक्षा विश्लेषकों के बीच एक अलग तरह की कशमकश भी देखी जा रही है। अमेरिकी खुफिया विभाग के कुछ अधिकारियों का मानना है कि इस खुफिया रिपोर्ट की टाइमिंग काफी रणनीतिक है। दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय इस बात पर अंतिम विचार कर रहे हैं कि मध्य पूर्व से अमेरिकी सेना को वापस बुलाकर सीजफायर को स्थाई किया जाए या फिर ईरान पर सीधे प्रतिबंध बढ़ाए जाएं। चूंकि इजरायल शुरुआत से ही ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों को पूरी तरह नष्ट करने के लिए अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप चाहता है, इसलिए अमेरिकी अधिकारियों का एक धड़ा इसे ट्रंप के नीतिगत फैसलों को प्रभावित करने की एक कूटनीतिक चाल के रूप में भी देख रहा है।

कासिम सुलेमानी से लेकर आयतुल्लाह खामेनेई तक: प्रतिशोध की आग में सुलग रहा है ईरान

ईरान और डोनाल्ड ट्रंप के बीच का यह टकराव एक दशक पुराना है। ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल के दौरान आईआरजीसी (IRGC) के चीफ जनरल कासिम सुलेमानी को बगदाद में एक सीक्रेट ड्रोन स्ट्राइक के जरिए ढेर करवा दिया था। इसके बाद, हाल ही में 28 फरवरी को हुए अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की भी मौत हो गई। खामेनेई की अंतिम यात्रा (जनाजे) के दौरान तेहरान की सड़कों पर उमड़े लाखों जनसैलाब ने न सिर्फ अमेरिकी झंडे जलाए, बल्कि खुलेआम 'डेथ टू ट्रंप' के नारे लगाते हुए विशाल बैनर लहराए थे, जिन पर इस बदले को पूरा करने की कसम खाई गई थी।

अंकारा नाटो समिट में खुद ट्रंप ने बयां किया दर्द: 'मैं उनकी हर खतरनाक लिस्ट में नंबर वन पर हूं'

इस बीच, अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने इस खतरे की पुष्टि की है। संवाददाताओं से बेहद गंभीर लहजे में बात करते हुए ट्रंप ने कहा, "ईरान की शासन व्यवस्था मुझे अंतरराष्ट्रीय मंच से पूरी तरह मिटाना चाहती है। मैंने आज सुबह की ब्रीफिंग में देखा कि मैं उनकी हर एक सीक्रेट हिट-लिस्ट में सबसे ऊपर काबिज हूं। अब तक, मैं ईश्वर की कृपा और बेहतरीन सुरक्षा के कारण भाग्यशाली रहा हूं, लेकिन हमें हर पल अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है क्योंकि खतरा वास्तविक है।"

पुराने गिले-शिकवे भूलकर एक हुए ट्रंप और नेतन्याहू: नए कूटनीतिक गठजोड़ से खाड़ी देशों में खलबली

इस अभूतपूर्व सुरक्षा संकट के बीच डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच लंबे समय से जमी कूटनीतिक बर्फ भी पिघल गई है। इससे पहले खाड़ी युद्ध को समाप्त करने की ट्रंप की आर्थिक नीतियों के चलते दोनों नेताओं में काफी मतभेद पैदा हो गए थे, क्योंकि नेतन्याहू हर हाल में युद्ध जारी रखने के पक्ष में थे। लेकिन गुरुवार को इजरायली पीएमओ (PMO) द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, दोनों शीर्ष नेताओं ने फोन पर लंबी और बेहद गोपनीय रणनीतिक बातचीत की है। इस रणनीतिक संवाद में वाशिंगटन, पेंटागन और तेल अवीव के बीच त्रिपक्षीय खुफिया और सैन्य समन्वय (Military Coordination) को अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर ले जाने की सहमति बनी है।