BREAKING:
July 12 2026 04:02 pm

तमिलनाडु चुनाव में 'चाइल्ड कैंपेनिंग' पर मचा बवाल: मद्रास हाईकोर्ट का चुनाव आयोग को नोटिस, TVK, DMK और AIADMK पर लगे गंभीर आरोप

Post

India News Live,Digital Desk : तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में एक बड़ा कानूनी भूचाल आ गया है। मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी 'तमिझागा वेत्री कड़गम' (TVK) और विपक्षी दलों—DMK तथा AIADMK—के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर कड़ी कार्रवाई करते हुए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से जवाब तलब किया है।

क्या है मामला: बच्चों का इस्तेमाल और 'वोट फॉर कैश'

यह याचिका अधिवक्ता वासुकी द्वारा दायर की गई है, जिसमें तमिलनाडु की प्रमुख राजनीतिक शक्तियों पर चुनाव आचार संहिता के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया गया है:

TVK पर आरोप: मुख्यमंत्री विजय की पार्टी TVK पर चुनाव प्रचार के दौरान बच्चों का उपयोग करने का आरोप है। याचिकाकर्ता का दावा है कि 21 अप्रैल की YMCA मैदान रैली समेत कई अवसरों पर बच्चों का इस्तेमाल भावनात्मक हथकंडे के रूप में किया गया, ताकि वे अपने अभिभावकों को किसी विशेष दल को वोट देने के लिए मजबूर कर सकें। मुख्यमंत्री द्वारा चुनाव बाद बच्चों को दिए गए धन्यवाद संबोधन को भी याचिका में सबूत के तौर पर पेश किया गया है।

विपक्षी दलों पर आरोप: DMK और AIADMK पर 'कैश फॉर वोट' (वोट के बदले नकद) की भ्रष्ट प्रथाओं का आरोप है। याचिका के अनुसार, माइलापुर, अलंगुलम और तिरुमंगलम जैसे कई निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं को आर्थिक रूप से प्रभावित करने की कोशिश की गई।

हाईकोर्ट का अहम कानूनी सवाल

मद्रास हाईकोर्ट की पीठ (जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन) ने इस मामले में चुनाव आयोग के वकील से एक महत्वपूर्ण सवाल पूछा है: क्या 'भ्रष्ट आचरण' के आधार पर केवल किसी उम्मीदवार को ही नहीं, बल्कि पूरी 'राजनीतिक पार्टी' को अयोग्य ठहराया जा सकता है?

अदालत का मानना है कि यह मामला जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत अत्यंत गंभीर है और इस पर एक पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है।

चुनाव आयोग के निर्देशों की अनदेखी

याचिकाकर्ता का तर्क है कि चुनाव आयोग ने 2009, 2013, 2014 और 2017 में स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि राजनीतिक रैलियों, प्रचार सामग्री ढोने या किसी भी चुनाव-संबंधी प्रक्रिया में बच्चों की भागीदारी पूर्णतः प्रतिबंधित है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया पर पर्याप्त साक्ष्य और वीडियो मौजूद होने के बावजूद, निर्वाचन अधिकारियों ने अब तक कोई सार्थक कार्रवाई नहीं की है।

आगे की राह: क्या रद्द हो सकते हैं नतीजे?

याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि:

TVK, DMK और AIADMK के कथित 'भ्रष्ट आचरण' की समयबद्ध जांच हो।

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर जवाबदेही तय हो।

अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग के उस जवाब पर टिकी हैं जो वह हाईकोर्ट में दाखिल करेगा। यह मामला तमिलनाडु की राजनीति में न केवल नैतिक बल्कि संवैधानिक संकट भी खड़ा कर सकता है, क्योंकि यदि याचिकाकर्ता का पक्ष सही साबित होता है, तो भविष्य में चुनाव लड़ने और पार्टी की मान्यता को लेकर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।