June 22 2026 07:07 pm

यूपी ने बिजली मांग में रचा नया इतिहास, महाराष्ट्र को पछाड़कर बनाया देश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय रिकॉर्ड

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उत्तर प्रदेश में चढ़ते पारे और भीषण उमस के बीच बिजली की खपत ने एक ऐसा नया इतिहास रच दिया है, जिसने पूरे देश को हैरान कर दिया है। रविवार देर रात उत्तर प्रदेश में बिजली की अधिकतम (पीक) मांग 32,348 मेगावॉट के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। यह आंकड़ा भारत के किसी भी राज्य में अब तक दर्ज की गई बिजली की सबसे अधिक मांग का एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड है।

इस ऐतिहासिक कीर्तिमान की जानकारी खुद सूबे के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर साझा की। उन्होंने इस अभूतपूर्व चुनौती से निपटने और रिकॉर्ड आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बिजली विभाग के सभी अभियंताओं, संविदा कर्मियों और सम्मानित जनता को बधाई दी है।

ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने दी बधाई, महाराष्ट्र का रिकॉर्ड हुआ ध्वस्त

ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने अपनी पोस्ट में बताया कि उत्तर प्रदेश ने इस बार देश के सबसे बड़े औद्योगिक राज्य महाराष्ट्र के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। इस साल 13 मई को महाराष्ट्र में बिजली की अधिकतम मांग 32,317 मेगावॉट दर्ज की गई थी, जो अब तक देश में सबसे ज्यादा थी। लेकिन 21 जून की रात यूपी ने 32,348 मेगावॉट की रिकॉर्ड मांग की सफल आपूर्ति कर विकास और खपत का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। बीते दो दिनों से मौसम के कड़े मिजाज के कारण मांग अचानक 31 हजार मेगावॉट की सीमा को पार कर गई।

पावर प्लांट ठप होने से बढ़ा संकट, एक्सचेंज से खरीदनी पड़ी बिजली

रिकॉर्ड तोड़ मांग के बीच बिजली विभाग को अंदरूनी मोर्चे पर भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस पीक आवर्स के दौरान राज्य की चार प्रमुख विद्युत उत्पादन इकाइयां (पावर प्लांट) तकनीकी खराबी के कारण अचानक ठप हो गईं। इसके चलते पावर कॉरपोरेशन को एनर्जी एक्सचेंज और अन्य वैकल्पिक स्रोतों से महंगी बिजली खरीदकर राज्य में आपूर्ति व्यवस्था को बनाए रखना पड़ा। शनिवार और रविवार की दरमियानी रात को भी न्यूनतम मांग का ग्राफ 24,369 मेगावॉट और अधिकतम मांग 31,509 मेगावॉट के आसपास दर्ज की गई थी।

लो-वोल्टेज और ओवरलोडिंग से जले ट्रांसफार्मर, जनता परेशान

बिजली की बेतहाशा मांग बढ़ने का सीधा असर स्थानीय वितरण प्रणाली पर देखने को मिल रहा है। अत्यधिक लोड के कारण पिछले दो दिनों में राज्य के विभिन्न जिलों में एरियल बंच कंडक्टर (ABC) केबल जलने, मेन लाइन में फॉल्ट आने और ट्रांसफार्मर फुंकने की घटनाओं में भारी इजाफा हुआ है। फॉल्ट के कारण कई-कई घंटों तक होने वाली अघोषित कटौती से उपभोक्ताओं का गुस्सा भी सातवें आसमान पर है। उत्पादन की कमी और तकनीकी फॉल्ट को तुरंत ठीक करना इस समय डिस्कॉम के लिए सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है।

मानसून में और बढ़ेगा लोड, एक्सपर्ट्स ने दी संविदा कर्मियों को बहाल करने की सलाह

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार, वर्तमान में उपभोक्ताओं के स्वीकृत (संयोजित) लोड और सब-स्टेशनों के ट्रांसफार्मर की वास्तविक क्षमता के बीच करीब 2 करोड़ किलोवॉट का भारी अंतर है, जिसे पाटना बेहद जरूरी है।

वहीं, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने चेतावनी देते हुए कहा कि असली चुनौती तो मानसून के आगमन के समय आएगी, जब उमस अपने चरम पर होगी और बिजली की मांग इस रिकॉर्ड से भी आगे निकल सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और तकनीकी फॉल्ट को मिनटों में ठीक करने के लिए विभाग से हटाए गए अनुभवी संविदा कर्मचारियों को तुरंत बहाल किया जाना चाहिए।