हिंदी थोपने के खिलाफ उद्धव ठाकरे का विरोध: स्कूलों में सरकारी आदेश जलाने का आह्वान
India News Live,Digital Desk : शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार के हालिया भाषा संबंधी फैसले का जोरदार विरोध किया है। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि 29 जून को राज्य भर के स्कूलों में लागू किए गए हिंदी भाषा के जीआर (सरकारी प्रस्ताव) की प्रतियां जलाएं। ठाकरे खुद दक्षिण मुंबई में इस विरोध प्रदर्शन में मौजूद रहेंगे, जहां यह आयोजन किया जाएगा। पार्टी के विभाग प्रमुख संतोष शिंदे ने इस जानकारी की पुष्टि की है।
दरअसल, 17 जून को राज्य सरकार ने एक जीआर जारी किया था जिसमें यह निर्देश दिया गया था कि मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पहली से पांचवीं कक्षा तक हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा। इस निर्णय का शिवसेना (यूबीटी) विरोध कर रही है और इसे छात्रों पर हिंदी थोपने का प्रयास बता रही है।
"मराठी अस्मिता के साथ कोई समझौता नहीं" – उद्धव ठाकरे
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी किसी भाषा के खिलाफ नहीं है, लेकिन किसी भी भाषा को जबरन थोपे जाने के सख्त खिलाफ है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह महाराष्ट्र में "भाषाई आपातकाल" लगाने की कोशिश कर रही है।
ठाकरे ने कहा, "हमें हिंदी से नफरत नहीं है। लेकिन जबरदस्ती उसे लागू करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। महाराष्ट्र में मराठी की गरिमा और प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए।"
मनसे और शिवसेना दोनों एकजुट
उद्धव ठाकरे के अलावा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने भी इस फैसले का विरोध किया है। दोनों नेताओं ने अलग-अलग प्रेस वार्ता कर सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन की घोषणा की है।
आजाद मैदान में बड़ा प्रदर्शन 7 जुलाई को
उद्धव ठाकरे ने बताया कि उनकी पार्टी 7 जुलाई को दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में होने वाले नागरिक समाज द्वारा आयोजित एक बड़े विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेगी। यह प्रदर्शन त्रिभाषा फार्मूले और हिंदी थोपे जाने के खिलाफ होगा।
शिंदे पर तीखा प्रहार
उद्धव ठाकरे ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर भी तंज कसते हुए उन्हें 'गद्दार' कहा और कहा कि उन्हें दिवंगत बाल ठाकरे के आदर्शों को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार ये साफ कर दे कि हिंदी अनिवार्य नहीं है, तो विवाद स्वत: ही समाप्त हो जाएगा।