ईरान में महासस्पेंस: पिता अयातुल्लाह खामेनेई के जनाजे पर नए सुप्रीम लीडर मोजतबा के सामने 2 रास्ते
ईरान की सत्ता और खाड़ी देशों की भू-राजनीति (Geopolitics) इस वक्त इतिहास के सबसे बड़े सस्पेंस और नाजुक मोड़ से गुजर रही है। बीते फरवरी महीने में अमेरिका और इजरायल के विनाशकारी हवाई हमलों में मारे गए ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई का अगले महीने (जुलाई 2026) एक भव्य राजकीय अंतिम संस्कार आयोजित होने जा रहा है। 4 जुलाई से शुरू हो रहे इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए ईरान ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत दुनिया के कई दिग्गज राष्ट्र प्रमुखों को औपचारिक आमंत्रण भेजा है। लेकिन, इस वैश्विक समारोह से पहले दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ईरान के मौजूदा सुप्रीम लीडर और अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) इस जनाजे में शामिल होंगे या नहीं?
4 महीनों से लापता: क्या हमले में गंवाना पड़ा पैर?
फरवरी 2026 में अपने पिता की मृत्यु के ठीक बाद 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई को आनन-फानन में ईरान का नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया था। तब से वे कागजों पर ईरानी हुकूमत और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का नेतृत्व कर रहे हैं। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले 4 महीनों में मोजतबा एक बार भी सार्वजनिक रूप से जनता या कैमरों के सामने नजर नहीं आए हैं।
अंतरराष्ट्रीय खुफिया रिपोर्ट्स और मीडिया दावों के अनुसार, 28 फरवरी को हुए जिस हमले में उनके पिता मारे गए थे, उसमें मोजतबा खामेनेई भी अत्यंत गंभीर रूप से घायल हो गए थे। कई रिपोर्ट्स में यहां तक दावा किया गया है कि मोजतबा का एक पैर इस कदर जख्मी हो गया था कि उसे सर्जरी के जरिए शरीर से अलग करना पड़ा। इसके अलावा उनके चेहरे के गंभीर रूप से झुलसने, प्लास्टिक सर्जरी होने और कुछ खुफिया हलकों में तो उनकी मौत तक की अफवाहें उड़ रही हैं।
एंकरों के भरोसे चल रही सत्ता, जनता का डगमगाया भरोसा
मोजतबा खामेनेई की तरफ से समय-समय पर सरकारी आदेश और बयान जरूर जारी किए जाते हैं, लेकिन कमान संभालने के बाद से उनके जितने भी संदेश आए हैं, वे सभी लिखित रूप में हैं जिन्हें केवल सरकारी टीवी चैनल के न्यूज एंकरों द्वारा पढ़कर सुनाया जाता है। हाल ही में 'नेशनल ज्यूडिशियरी वीक' के मौके पर भी उनका एक लिखित बयान पढ़ा गया, जिसमें उन्होंने अमेरिका और इजरायल द्वारा उनके पिता की हत्या की जिम्मेदारी लेने पर अदालत को सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए।
यद्यपि ईरान के आला अधिकारी लगातार यह दावा कर रहे हैं कि मोजतबा मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हैं और देश के सारे रणनीतिक फैसले वही ले रहे हैं, लेकिन यह दलील ईरान की जनता के गले नहीं उतर रही है। ईरान के 'करज' जैसे प्रमुख शहरों में तो नाराज नागरिकों ने सड़कों और दीवारों पर नए सुप्रीम लीडर के 'लापता' होने और उनके सच को छिपाने के विरोध में पर्चे तक चपका दिए हैं।
पिता के जनाजे में मोजतबा के सामने हैं 2 रास्ते
ईरान के राजनीतिक इतिहास को देखें, तो ऐसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कार केवल शोक प्रकट करने के लिए नहीं, बल्कि नए नेतृत्व द्वारा अपनी ताकत, संप्रभुता और देश की एकजुटता प्रदर्शित करने का सबसे बड़ा वैश्विक मंच होते हैं। स्वयं दिवंगत अली खामेनेई ने अपने पूर्ववर्ती अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के अंतिम संस्कार में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। ऐसे में अब मोजतबा खामेनेई के सामने दो ही रास्ते बचे हैं, और दोनों ही रास्तों के ईरान के भविष्य पर बहुत बड़े मायने होंगे:
पहला रास्ता (दुनिया के सामने आना): अगर 4 से 9 जुलाई के बीच होने वाले अंतिम संस्कार के दौरान मोजतबा व्हीलचेयर या किसी भी हाल में दुनिया के सामने आते हैं, तो उनके स्वास्थ्य और मृत्यु को लेकर चल रही तमाम अंतरराष्ट्रीय अफवाहों पर हमेशा के लिए पूर्णविराम लग जाएगा। यह कदम उनके कट्टर समर्थक धड़े और 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' के गिरते मनोबल को आसमान पर ले जाएगा और अमेरिका-इजरायल को यह कड़ा संदेश देगा कि ईरान की कमान सुरक्षित हाथों में है।
दूसरा रास्ता (परदे के पीछे छिपे रहना): यदि इस ऐतिहासिक और भावुक क्षण पर भी मोजतबा कैमरे के सामने आने से कतराते हैं, तो ईरान के भीतर और बाहर यह पुख्ता संदेश चला जाएगा कि नए सुप्रीम लीडर या तो शारीरिक रूप से पूरी तरह लाचार हो चुके हैं या फिर सुरक्षा के मोर्चे पर ईरानी शासन इस कदर खौफजदा है कि वह अपने सर्वोच्च नेता को खुली हवा में लाने का जोखिम नहीं उठा सकता। इससे देश के भीतर गृहयुद्ध और तख्तापलट जैसी अस्थिरता और गहरी हो सकती है।
6 दिनों तक चलेगा कार्यक्रम, पीएम मोदी को भी न्योता
ईरान सरकार ने इस बेहद संवेदनशील मोड़ पर भारत के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को तरजीह देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस जनाजे में शामिल होने का आधिकारिक इनविटेशन भेजा है। सूत्रों के मुताबिक, यह निमंत्रण ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की ओर से सीधे नई दिल्ली भेजा गया है, हालांकि भारतीय विदेश मंत्रालय ने अभी तक इस यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
तय कार्यक्रम के अनुसार, अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की पवित्र रस्में 4 जुलाई से शुरू होंगी और 6 दिनों के लंबे सफर के बाद 9 जुलाई 2026 को पूर्वोत्तर ईरान के पवित्र शहर और उनके गृहनगर 'मशहद' में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक (दफनाए जाने) करने के साथ संपन्न होंगी।