'एक घर में 4-4 कारें, इसलिए लग रहा जाम', गाजियाबाद के बदतर ट्रैफिक पर मेयर का अजीब तर्क; भड़के लोग बोले- पहले सड़कें तो सुधारो....

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India News Live,Digital Desk : दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के हाईटेक शहर गाजियाबाद में जाम की समस्या अब नासूर बनती जा रही है। सड़कों पर रेंगते वाहनों और घंटों बर्बाद होते वक्त से परेशान जनता को राहत देने के बजाय गाजियाबाद की मेयर ने एक ऐसा तर्क दिया है, जिसने नया विवाद खड़ा कर दिया है। शहर की चरमराई ट्रैफिक व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के जवाब में मेयर ने जाम का ठीकरा सीधे तौर पर आम जनता की जीवनशैली पर फोड़ दिया है। उनके इस 'अजीबोगरीब' बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक लोगों ने नगर निगम और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

मेयर का तर्क: बढ़ती कारों की संख्या है जाम की वजह

गाजियाबाद में आए दिन लगने वाले भीषण जाम पर प्रतिक्रिया देते हुए मेयर ने कहा कि शहर की सड़कों की एक क्षमता है, लेकिन अब स्थिति यह है कि एक-एक घर में चार-चार कारें खड़ी हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब एक ही परिवार के पास इतनी अधिक गाड़ियाँ होंगी और वे सभी सड़क पर निकलेंगी, तो जाम लगना स्वाभाविक है। मेयर के मुताबिक, केवल प्रशासन को दोष देना गलत है, क्योंकि लोगों की बढ़ती संपन्नता और वाहनों की संख्या ने बुनियादी ढांचे पर भारी दबाव डाल दिया है। उनके इस बयान को लोग जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने वाला बता रहे हैं।

जनता का पलटवार: पार्किंग और खराब सड़कों का क्या?

मेयर का यह बयान सामने आते ही शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और वाहन चालकों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। लोगों का कहना है कि क्या गाड़ियाँ खरीदना अपराध है? नागरिकों ने सवाल उठाया है कि नगर निगम ने पिछले कुछ सालों में पार्किंग की कितनी व्यवस्था की है और सड़कों के चौड़ीकरण के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं। आरडब्ल्यूए (RWA) पदाधिकारियों का तर्क है कि अवैध अतिक्रमण और खराब ट्रैफिक मैनेजमेंट जाम की असली जड़ है, न कि लोगों की कारें। लोगों ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए पूछा है कि क्या अब मेयर साहब यह तय करेंगी कि किस परिवार को कितनी गाड़ियाँ रखनी चाहिए?

गाजियाबाद के हॉटस्पॉट्स पर बदतर हुए हालात

गौरतलब है कि गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन, लोनी बॉर्डर, मोहन नगर और डासना जैसे इलाकों में पीक ऑवर्स के दौरान निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है। कई जगहों पर सड़कों के बीचों-बीच बिजली के खंभे और अवैध रेहड़ी-पटरी वालों के कब्जे की वजह से रास्ता संकरा हो जाता है। जानकारों का मानना है कि मेयर को जनता पर दोष मढ़ने के बजाय सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) को मजबूत करने और पार्किंग पॉलिसी को सख्ती से लागू करने पर ध्यान देना चाहिए। फिलहाल, मेयर के इस बयान ने गाजियाबाद की सियासत और जनसंवाद के केंद्र में ट्रैफिक की समस्या को एक बार फिर ला खड़ा किया है।