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May 05 2026 04:20 pm

'रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लगते हैं' जिस फिल्म ने बिग बी को बनाया 'शहंशाह', उसकी कहानी जया बच्चन ने लिखी थी

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India News Live, Digital Desk: हिंदी सिनेमा के इतिहास में अमिताभ बच्चन एक ऐसे सितारे हैं जिनकी चमक दशकों बाद भी फीकी नहीं पड़ी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमिताभ बच्चन को 'शहंशाह' बनाने के पीछे उनकी पत्नी और दिग्गज अभिनेत्री जया बच्चन का बहुत बड़ा हाथ था? जी हां, जिस फिल्म के डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर रटे हुए हैं, उस ब्लॉकबस्टर फिल्म की पटकथा खुद जया बच्चन की कलम से निकली थी। आइए जानते हैं इस फिल्म से जुड़ा वह दिलचस्प किस्सा जिसने बॉलीवुड के समीकरण बदल दिए थे।

जया बच्चन की कलम से निकली थी 'मसीहा' की कहानी

फिल्म 'शहंशाह' साल 1988 में पर्दे पर रिलीज हुई थी। इस फिल्म का निर्देशन टीनू आनंद ने किया था, लेकिन इसकी कहानी के पीछे का असली दिमाग जया बच्चन का था। कहा जाता है कि जया बच्चन ने अमिताभ के 'एंग्री यंग मैन' और 'गरीबों के मसीहा' वाले अक्स को ध्यान में रखकर इस कहानी को बुना था। उन्होंने एक ऐसे किरदार की कल्पना की थी जो दिन में एक डरपोक पुलिसवाला और रात में अपराधियों का काल बनने वाला 'शहंशाह' हो।

बॉक्स ऑफिस पर आया था भूचाल, बनी दूसरी सबसे बड़ी फिल्म

जब 'शहंशाह' रिलीज हुई, तो इसे देखने के लिए सिनेमाघरों के बाहर ऐसी भीड़ उमड़ी कि पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा। फिल्म का आइकोनिक डायलॉग, ‘रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लगते हैं, नाम है शहंशाह’, आज भी बच्चा-बच्चा जानता है। यह फिल्म साल 1988 की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी थी। इस फिल्म ने न केवल जबरदस्त मुनाफा कमाया, बल्कि अमिताभ बच्चन के ढलते हुए करियर को एक बार फिर से नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।

मुश्किलों भरा था रिलीज का सफर: बोफोर्स विवाद और विरोध

'शहंशाह' की सफलता जितनी बड़ी थी, इसकी रिलीज की राह उतनी ही कांटों भरी थी। उस दौरान अमिताभ बच्चन का नाम 'बोफोर्स घोटाले' के विवाद में उछला था। इसके चलते देशभर में फिल्म के खिलाफ काफी विरोध प्रदर्शन हुए थे। कई शहरों में फिल्म को बैन करने तक की मांग उठी थी। राजनीतिक तनाव के बावजूद, जब फिल्म पर्दे पर आई, तो दर्शकों के प्यार ने सारे विरोधों को किनारे कर दिया और फिल्म को ब्लॉकबस्टर बना दिया।

'जंजीर' के समय भी संकटमोचक बनी थीं जया बच्चन

यह पहली बार नहीं था जब जया बच्चन, अमिताभ के करियर के लिए 'लेडी लक' साबित हुई हों। इससे पहले फिल्म 'जंजीर' (1973) के समय भी उन्होंने बड़ा सहारा दिया था। उस वक्त अमिताभ बच्चन को 'फ्लॉप एक्टर' का टैग मिल चुका था और कोई भी बड़ी अभिनेत्री उनके साथ काम करने को तैयार नहीं थी। ऐसे मुश्किल समय में जया बच्चन ने फिल्म साइन की और 'जंजीर' ने अमिताभ को रातों-रात सुपरस्टार बना दिया। यह कहना गलत नहीं होगा कि अमिताभ बच्चन के 'शहंशाह' बनने के सफर में जया बच्चन एक मजबूत स्तंभ रही हैं।