'हमारी प्रतिस्पर्धा समय से है'; शिक्षक दिवस पर बोले सीएम योगी- शिक्षा में राजनीति बर्दाश्त नहीं
शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों के दायित्व और प्रदेश की छवि को लेकर बड़ा संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट और दो-टूक शब्दों में कहा कि राजनीति हर क्षेत्र में हो सकती है, लेकिन शिक्षा के पावन मंदिर को राजनीतिक स्वार्थ से पूरी तरह दूर रखा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि आज के दौर में हमारी वास्तविक प्रतिस्पर्धा किसी दूसरे से नहीं, बल्कि 'समय' से है। अगर हम समय के साथ कदम से कदम मिलाकर नहीं चलेंगे, तो दुनिया से पिछड़ जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने कड़े शब्दों में आगाह किया कि उत्तर प्रदेश जब तेजी से विकास के नए आयाम छू रहा है, तब कुछ निहित स्वार्थी तत्व और नकारात्मक ताकतें प्रदेश को बदनाम करने की साजिशों में जुटी हुई हैं। इन साजिशों का मुकाबला समाज को शिक्षित, संस्कारवान और जागरूक बनाकर ही किया जा सकता है।
81 उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान: 33 महिला शिक्षिकाओं ने लहराया परचम
प्रेक्षागृह में आयोजित गरिमामय समारोह में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के कुल 81 उत्कृष्ट शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और 25-25 हजार रुपये की मानद पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया:
बेसिक और माध्यमिक का प्रतिनिधित्व: सम्मानित होने वाले 81 शिक्षकों में बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षक शामिल रहे।
महिला शिक्षिकाओं की मजबूत भागीदारी: पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों में 33 महिला शिक्षिकाएं रहीं, जिनमें बेसिक शिक्षा की 31 और माध्यमिक शिक्षा की दो शिक्षिकाएं शामिल हैं।
राज्य और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार: मंच से 76 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार तथा पांच शिक्षकों को प्रतिष्ठित मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार प्रदान किया गया।
सम्मान केवल उपलब्धि नहीं, बड़ी जिम्मेदारी: मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मान केवल एक औपचारिक उपलब्धि की स्वीकृति नहीं है, बल्कि यह भविष्य में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई गति देने और अपने नवाचारों को दूसरे शिक्षकों के साथ साझा करने की एक बड़ी जिम्मेदारी भी है।
'संसाधन से बड़ी है शिक्षक की इच्छाशक्ति': केवल अंक नहीं, संस्कार भी सिखाएं
मुख्यमंत्री ने विद्यालयों के कायाकल्प और पठन-पाठन की गुणवत्ता पर चर्चा करते हुए कहा कि किसी भी स्कूल में भौतिक संसाधन जरूर महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण शिक्षक की इच्छाशक्ति और कार्य के प्रति उसका समर्पण होता है।
नवाचार से बदल रही तस्वीर: सीएम ने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रदेश में सीमित संसाधनों के बावजूद कई समर्पित शिक्षक अपने इनोवेटिव आइडियाज (नवाचार) के जरिए सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल रहे हैं। ऐसे सफल प्रयोगों को पूरे प्रदेश के अन्य विद्यालयों में भी लागू किया जाना चाहिए।
मार्क्सवादी रटंत विद्या से परे हो शिक्षा: योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक (Marks) हासिल कराना नहीं है। हर बच्चे की बौद्धिक क्षमता अलग होती है, इसलिए शिक्षक का काम केवल सिलेबस खत्म करना नहीं, बल्कि बच्चे की छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसमें संस्कार, अनुशासन, संवेदनशीलता और राष्ट्रीय जिम्मेदारी की भावना जगाना है।
तकनीक शिक्षा का विकल्प नहीं, माध्यम है: खुद को अपडेट करें शिक्षक
डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से खुद को समय की मांग के अनुरूप निरंतर अपडेट रखने की अपील की।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक कभी भी शिक्षक का स्थान नहीं ले सकती, यह केवल शिक्षा को बेहतर, सरल, रोचक और प्रभावी बनाने का एक माध्यम है। स्मार्ट क्लासेस, डिजिटल लाइब्रेरी और तकनीकी टूल्स का सही उपयोग कर शिक्षक जटिल विषयों को भी विद्यार्थियों के लिए सुगम बना सकते हैं।
यूपी को बदनाम करने वालों को सकारात्मक विकास से मिलेगा जवाब
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है और बीमारू राज्य के ठप्पे से बाहर निकल चुका है। लेकिन जो तत्व प्रदेश के इस कायाकल्प को पचा नहीं पा रहे हैं, वे तरह-तरह के भ्रामक नैरेटिव गढ़कर यूपी की छवि धूमिल करने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों को राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता और सच की राह दिखाएं। जब नई पीढ़ी अपने ज्ञान, योग्यता और संस्कारों से देश-दुनिया में नाम रोशन करेगी, तो उत्तर प्रदेश को बदनाम करने वाली हर नकारात्मक साजिश अपने आप ध्वस्त हो जाएगी।