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September 09 2026 06:28 pm

भाषण के बीच चीनी दूतावास ने थमाई चेतावनी भरी पर्ची, फिलीपींस के रक्षा मंत्री ने मंच से पढ़कर कर दी पोल खोल

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दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में बढ़ते सैन्य तनाव और क्षेत्रीय विवादों के बीच कूटनीतिक शिष्टाचार को तार-तार करने वाला एक अभूतपूर्व और सनसनीखेज वाकया सामने आया है। फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संगोष्ठी में जब फिलीपींस के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री गिल्बर्टो तियोदोरो (Gilberto Teodoro) अपना मुख्य भाषण दे रहे थे, तभी चीनी दूतावास के एक प्रतिनिधि ने उन्हें बीच में रोकते हुए एक लिखित पर्ची थमा दी। चीन की इस खुली हेकड़ी और मंच की मर्यादा को चुनौती देने वाले रवैये पर फिलीपींस के रक्षा मंत्री न केवल बुरी तरह भड़क गए, बल्कि उन्होंने राजनयिक औपचारिकताओं को दरकिनार करते हुए उस पर्ची को भरे मंच से माइक पर पढ़कर पूरी दुनिया के सामने बीजिंग की दादागिरी को बेनकाब कर दिया।

भाषण के बीच मंच पर पहुंची पर्ची: चीन ने जताई थी यह आपत्ति

मनीला में आयोजित 'एशिया-पैसिफिक मैरीटाइम सिक्योरिटी समिट' के दौरान फिलीपींस के रक्षा मंत्री गिल्बर्टो तियोदोरो दक्षिण चीन सागर में चीनी तटरक्षक (China Coast Guard) जहाजों द्वारा फिलीपीनी नौकाओं पर वाटर कैनन चलाने, खतरनाक युद्धाभ्यास करने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के खुले उल्लंघन पर अपनी बात रख रहे थे।

तभी श्रोताओं की अग्रिम पंक्ति में बैठे चीनी दूतावास के एक राजनयिक उठे और उन्होंने मंच पर मौजूद संचालन दल के जरिए रक्षा मंत्री तक एक मुड़ा हुआ कागज (नोट) पहुंचाया। आम तौर पर ऐसे आयोजनों में मंच पर पर्ची केवल समय सीमा समाप्त होने या किसी आपातकालीन सूचना के लिए भेजी जाती है। रक्षा मंत्री ने जब पर्ची खोली, तो उसमें चीनी पक्ष की ओर से कड़े शब्दों में चेतावनी दी गई थी कि "फिलीपींस के रक्षा मंत्री को चीन-विरोधी बयानबाजी और चीन की संप्रभुता को चुनौती देने वाले झूठे आरोपों को तुरंत बंद करना चाहिए।"

रक्षा मंत्री का ऑन-स्टेज पलटवार: माइक पर पढ़ दी पूरी चिट्ठी

चीन की इस धृष्टता से रक्षा मंत्री तियोदोरो अवाक रह गए। उन्होंने भाषण रोकने के बजाय पर्ची को सीधे हाथ में उठाया और माइक के सामने पढ़कर हॉल में बैठे दर्जनों देशों के राजदूतों, नौसेना प्रमुखों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों को सुना दिया।

पर्ची पढ़ने के बाद उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, "यह क्या दादागिरी है? यह हमारा संप्रभु देश है, हमारी राजधानी मनीला है और यह हमारा मंच है। चीनी दूतावास को यह मुगालता छोड़ देना चाहिए कि वे मुझे निर्देश दे सकते हैं कि मुझे अपने ही देश की धरती पर खड़े होकर क्या बोलना है और क्या नहीं। यह हरकत दर्शाती है कि बीजिंग न तो कूटनीतिक गरिमा की परवाह करता है और न ही दूसरों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संप्रभुता का सम्मान करता है।" रक्षा मंत्री के इस बेबाक जवाब के बाद पूरा ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

दक्षिण चीन सागर में चरम पर है टकराव: सबीना और स्कारबोरो शोल पर तनातनी

यह कूटनीतिक झड़प ऐसे समय में हुई है जब पश्चिमी फिलीपीन सागर में हालात लगभग युद्ध जैसे बने हुए हैं।

हाल के महीनों में सबीना शोल (Sabina Shoal) और स्कारबोरो शोल (Scarborough Shoal) के पास चीनी जहाजों ने फिलीपींस के गश्ती जहाजों को जानबूझकर टक्कर मारी है।

आपूर्ति ले जा रहे फिलीपीनी सैनिकों पर उच्च दबाव वाली वॉटर तोपों और मिलिट्री-ग्रेड लेजर का इस्तेमाल किया गया, जिसमें कई नाविक घायल हुए।

वर्ष 2016 के 'द हेग' स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) ने दक्षिण चीन सागर के 90% हिस्से पर दावा करने वाली चीन की तथाकथित 'नाइन-डैश लाइन' को अवैध और खारिज घोषित कर दिया था, लेकिन चीन अंतरराष्ट्रीय फैसले को मानने से लगातार इनकार करता आ रहा है।

'चीन के झांसे और फर्जी दावों से नहीं डरेगा फिलीपींस': तियोदोरो का स्पष्ट संदेश

मंच से चीनी पर्ची का पर्दाफाश करने के बाद रक्षा मंत्री गिल्बर्टो तियोदोरो ने अपने संबोधन को और आक्रामक बना दिया। उन्होंने कहा कि फिलीपींस कोई उपनिवेश नहीं है। राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर के नेतृत्व में देश का रुख पूरी तरह साफ है कि फिलीपींस अपनी क्षेत्रीय अखंडता और विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) का एक इंच भी किसी बाहरी ताकत के आगे नहीं झुकाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलीपींस अपने सुरक्षा गठबंधनों—अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत के साथ रणनीतिक सहयोग—को और पुख्ता करेगा ताकि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कानून के शासन और जहाजरानी की आजादी को सुरक्षित रखा जा सके।

कूटनीतिक गलियारों में हलचल, बैकफुट पर दिखा चीनी मिशन

भाषण के दौरान ही रक्षा मंत्री द्वारा सरेआम बेनकाब किए जाने के बाद कार्यक्रम स्थल पर मौजूद चीनी राजनयिक असहज नजर आए और सत्र समाप्त होते ही बिना मीडिया से बात किए वहां से चले गए। अंतरराष्ट्रीय सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी संप्रभु देश के कैबिनेट मंत्री को उसके ही घर में भाषण देने से रोकने का चीनी दूतावास का यह कदम 'वुल्फ वॉरियर डिप्लोमेसी' की चरम सीमा को दर्शाता है, जिसका फिलीपींस ने सार्वजनिक रूप से करारा जवाब देकर यह संदेश दे दिया है कि छोटे देश भी अब बीजिंग के दबाव तंत्र के आगे घुटने टेकने को तैयार नहीं हैं।