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September 09 2026 09:22 pm

'अंगूर नहीं मिलते तो खट्टे ही लगते हैं': नेहा कक्कड़ का दिग्गज गायिका पर तीखा पलटवार

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बॉलीवुड की लोकप्रिय पार्श्व गायिका और सोशल मीडिया सनसनी नेहा कक्कड़ अपने गानों के साथ-साथ मुखर अंदाज के लिए भी अक्सर चर्चा में रहती हैं। पिछले कुछ समय से पुराने सदाबहार गानों के रीमिक्स, ऑटो-ट्यून के अत्यधिक उपयोग और आधुनिक गायकी के स्तर को लेकर संगीत जगत के कई वरिष्ठ कलाकारों ने सवाल खड़े किए थे। इन लगातार हो रही आलोचनाओं और बयानों पर अब नेहा कक्कड़ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक कार्यक्रम और सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए नेहा ने बिना नाम लिए मशहूर कहावत का सहारा लिया और कहा कि "जिन लोगों को अंगूर नहीं मिलते, उन्हें वे खट्टे ही लगते हैं।" नेहा के इस बयान के सामने आते ही म्यूजिक इंडस्ट्री में कयासों का दौर शुरू हो गया है कि उनका यह सीधा इशारा किस दिग्गज गायिका की तरफ था।

किस बात से भड़का विवाद? फाल्गुनी पाठक और अनुराधा पौडवाल के बयानों की चर्चा

म्यूजिक इंडस्ट्री के जानकारों के अनुसार, नेहा कक्कड़ का यह अप्रत्यक्ष तंज 90 के दशक की मशहूर सिंगर्स के साथ उनके पुराने गतिरोध की पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ माना जा रहा है:

फाल्गुनी पाठक के साथ 'मैंने पायल है छनकाई' विवाद: जब नेहा कक्कड़ ने डांडिया क्वीन फाल्गुनी पाठक के आइकॉनिक गाने 'मैंने पायल है छनकाई' का रीमेक 'ओ सजना' गाया था, तब फाल्गुनी पाठक ने खुले तौर पर नाराजगी जताई थी। फाल्गुनी ने कहा था कि गाने का रीमेक सुनकर उन्हें उल्टी जैसी फीलिंग आई थी और उन्होंने गाने की मासूमियत को बर्बाद करने का आरोप लगाया था।

अनुराधा पौडवाल की बेबाक टिप्पणी: वरिष्ठ और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता गायिका अनुराधा पौडवाल ने भी एक साक्षात्कार में रीमिक्स कल्चर पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि आज के सिंगर्स केवल तकनीक और रीमिक्स के सहारे टिके हैं और उनमें मूल गायकी की गहराई नहीं है। उन्होंने इस तरह के प्रयोगों को सुनकर बेहद दुख होने की बात कही थी।

लगातार वरिष्ठ गायिकाओं और आलोचकों के निशाने पर रहने के बाद नेहा कक्कड़ ने अब पलटवार करते हुए यह जताना चाहा है कि जो लोग आज के दौर के बदलते संगीत और नई पीढ़ी की अपार सफलता को पचा नहीं पा रहे हैं, वे ही इस तरह की नकारात्मक टिप्पणियां कर रहे हैं।

'मेरी सफलता मेरी मेहनत की बदौलत': नेहा ने आलोचकों को दिया जवाब

नेहा कक्कड़ ने अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्होंने अपने करियर में जो मुकाम हासिल किया है, वह किसी की कृपा या सिफारिश पर नहीं बल्कि बरसों के कड़े संघर्ष और जनता के प्यार से मिला है। उन्होंने कहा:

"अगर कोई आज के ट्रेंड और युवा पीढ़ी की पसंद से मेल नहीं खा पा रहा है, तो इसका मतलब यह नहीं कि काम करने वाले गलत हैं।"

"जब लोग आपकी बराबरी या आपकी जैसी लोकप्रियता हासिल नहीं कर पाते, तो वे आपकी कला और सफलता में कमियां निकालना शुरू कर देते हैं। मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्या कह रहा है, क्योंकि करोड़ों फैंस मेरे गानों को सुनते हैं और मुझे मंचों पर बुलाते हैं।"

सोशल मीडिया पर बंटे संगीत प्रेमी

नेहा कक्कड़ के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। नेहा के प्रशंसकों ने उनके समर्थन में उतरते हुए कहा कि बदलते समय के साथ संगीत की शैली भी बदलती है और लगातार किसी कलाकार को निशाना बनाना गलत है।

वहीं, दूसरी ओर 90 के दशक के मेलोडियस म्यूजिक के मुरीदों का कहना है कि सीनियर्स ने भारतीय संगीत की मौलिकता की रक्षा के लिए अपनी राय रखी थी, ऐसे में फाल्गुनी पाठक या अनुराधा पौडवाल जैसी सम्मानित हस्तियों की आलोचना को 'अंगूर खट्टे हैं' कहकर खारिज करना शालीनता के दायरे में नहीं आता।