मिडिल ईस्ट में बिछी जंग की बिसात? पाकिस्तान ने सऊदी अरब में तैनात किए 8000 सैनिक, चीन के हथियार भी शामिल
India News Live,Digital Desk : दुनियाभर में मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीदें की जा रही हैं, लेकिन पर्दे के पीछे हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं। इस बीच पाकिस्तान ने एक चौंकाने वाला कदम उठाते हुए सऊदी अरब में अपनी सैन्य ताकत को भारी विस्तार दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने सऊदी अरब में लगभग 8,000 सैनिकों, लड़ाकू विमानों के एक पूरे स्क्वाड्रन और अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणाली की तैनाती कर दी है।
क्या है पाकिस्तान-सऊदी अरब का गोपनीय समझौता?
रॉयटर्स की रिपोर्ट और सुरक्षा सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, इस तैनाती का उद्देश्य सऊदी अरब की रक्षा क्षमता को मजबूती प्रदान करना है, ताकि किसी भी बड़े हमले की स्थिति में पाकिस्तान सीधे तौर पर मदद कर सके। हालांकि पाकिस्तान या सऊदी अरब के आधिकारिक मंत्रालयों ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है, लेकिन सूत्रों ने इसे 'महत्वपूर्ण युद्ध-सक्षम बल' (Significant war-ready force) करार दिया है। गौरतलब है कि 2025 में हुए एक गुप्त रक्षा समझौते के तहत यह तैनाती की गई है, जिसमें भविष्य में सऊदी अरब में 80,000 तक पाकिस्तानी सैनिकों को तैनात करने का प्रावधान भी शामिल हो सकता है।
चीन निर्मित हथियारों से लैस है पाकिस्तान की खेप
पाकिस्तान ने अपनी तैनाती में सैन्य साजो-सामान के मामले में भी चीन की मदद ली है। सूत्रों के अनुसार:
लड़ाकू विमान: करीब 16 विमानों का एक पूरा स्क्वाड्रन सऊदी अरब भेजा गया है, जिसमें मुख्य रूप से JF-17 थंडर लड़ाकू विमान शामिल हैं।
ड्रोन और मिसाइल: दो ड्रोन स्क्वाड्रन भी तैनात किए गए हैं।
वायु रक्षा: चीनी मूल की HQ-9 वायु रक्षा प्रणाली को तैनात किया गया है, जिसका संचालन पाकिस्तानी कर्मी करेंगे, जबकि इसका सारा खर्च सऊदी अरब उठाएगा।
परमाणु छत्रछाया और युद्ध की आशंका
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए इस समझौते को रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ पहले ही इशारों में कह चुके हैं कि यह समझौता सऊदी अरब को पाकिस्तान की 'परमाणु छत्रछाया' के तहत सुरक्षा देता है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तैनाती का मुख्य फोकस ईरान से संभावित संघर्ष की स्थिति में सऊदी अरब की रक्षा करना है। एक ओर पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में मध्यस्थता का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उसकी यह सैन्य तैनाती खाड़ी क्षेत्र में तनाव को एक नए स्तर पर ले जा सकती है।