खुद सीएम आवास जाकर सभापति ने लिया नीतीश कुमार का इस्तीफा; 20 साल के कार्यकाल का हुआ 'भावुक' अंत

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India News Live,Digital Desk : बिहार के राजनीतिक इतिहास में आज एक ऐसी घटना घटी जो पहले कभी नहीं देखी गई। 20 साल तक बिहार की सत्ता के शिखर पर रहे नीतीश कुमार ने विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन इसके लिए वे खुद सदन नहीं पहुंचे। हैरानी की बात यह है कि विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह खुद मुख्यमंत्री आवास गए और वहां से नीतीश कुमार का इस्तीफा लेकर वापस आए। बिहार की राजनीति में इसे मुख्यमंत्री के प्रति 'असाधारण सम्मान' के तौर पर देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री आवास पर हुई 'शिष्टाचार मुलाकात' और इस्तीफा

सोमवार सुबह से ही कयास लगाए जा रहे थे कि इस्तीफे की अंतिम तारीख होने के कारण नीतीश कुमार खुद विधान परिषद आएंगे। हालांकि, दोपहर होते-होते तस्वीर साफ हुई। सभापति अवधेश नारायण सिंह ने मीडिया को बताया कि वे सुबह शिष्टाचार के नाते मुख्यमंत्री आवास पर नीतीश कुमार से मिलने गए थे। वहीं पर मुख्यमंत्री ने उन्हें अपना त्यागपत्र सौंपा। सभापति ने कहा, "नीतीश जी जैसे विकासशील और सबको साथ लेकर चलने वाले नेता का राज्य की राजनीति से केंद्र में जाना बिहार के लिए एक अपूरणीय क्षति है।"

संजय गांधी ने दिखाया 29 शब्दों का 'इस्तीफा पत्र'

विधान परिषद परिसर में उस समय हलचल बढ़ गई जब जदयू नेता और नीतीश कुमार के करीबी संजय गांधी हाथ में एक पत्र लिए नजर आए। उन्होंने मीडिया के सामने वह इस्तीफा पत्र दिखाया, जिसमें बेहद नपे-तुले शब्दों में सदस्यता छोड़ने की बात लिखी थी। उनके साथ मंत्री विजय चौधरी और जदयू के अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। सभापति ने स्पष्ट किया कि इस्तीफे की औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और अब खाली हुई सीट पर जल्द ही नए निर्वाचन की घोषणा की जाएगी।

सम्मान या मजबूरी? सियासी गलियारों में चर्चा तेज

नीतीश कुमार के इस तरह इस्तीफा देने पर विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषकों की अलग-अलग राय है। कुछ इसे 20 साल के बेदाग कार्यकाल को दिया गया 'विशेष सम्मान' मान रहे हैं, तो कुछ इसे सत्ता के हस्तांतरण की प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्यसभा निर्वाचित होने के बाद 14 दिनों की समय सीमा आज समाप्त हो रही थी, इसलिए संवैधानिक प्रक्रिया के तहत यह कदम उठाया गया। चूंकि सभापति और मुख्यमंत्री के संबंध पुराने और मधुर रहे हैं, इसलिए इसे 'शिष्टाचार भेंट' कहना ही उचित होगा।

अब क्या होगा बिहार का भविष्य?

नीतीश कुमार अब आधिकारिक तौर पर राज्यसभा के सदस्य के रूप में केंद्र की राजनीति में अपनी नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। उनके एमएलसी पद छोड़ने के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वे मुख्यमंत्री की कुर्सी कब खाली करते हैं। सूत्रों का दावा है कि 30 अप्रैल तक बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है। फिलहाल, नीतीश कुमार ने बिहार के विकास को जो गति दी, उसकी चर्चा सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही खेमों में हो रही है।