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July 13 2026 07:48 pm

भारतीय सेना में आजादी के बाद का सबसे बड़ा बदलाव: 20 साल के इंतजार के बाद 'थिएटर कमांड' को मंजूरी की तैयारी, जानें कितनी घातक होगी ताकत

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नई दिल्ली: भारतीय रक्षा क्षेत्र से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना को एक सूत्र में पिरोने वाली 'थिएटर कमांड' (Theater Command) योजना को लेकर पिछले 20 सालों से चल रहा इंतजार अब खत्म होने वाला है। नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि इस महत्वाकांक्षी योजना को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं, और जल्द ही इसकी अंतिम रूपरेखा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंपी जाएगी।

कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) से मंजूरी मिलते ही यह भारतीय सैन्य इतिहास में आजादी के बाद का सबसे बड़ा और युगांतरकारी सुधार साबित होगा।

क्या है 'थिएटर कमांड' और यह क्यों है जरूरी?

वर्तमान व्यवस्था के तहत भारत की तीनों सेनाएं (आर्मी, नेवी और एयरफोर्स) अलग-अलग काम करती हैं। उनकी ट्रेनिंग, बजट और रणनीतियां अपनी-अपनी होती हैं। युद्ध की स्थिति में वे आपस में तालमेल (Co-ordination) बनाकर काम करती हैं, जिसमें कई बार बहुमूल्य समय नष्ट हो जाता है।

'थिएटर कमांड' का सीधा मतलब है—एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में तीनों सेनाओं के संसाधनों और सैनिकों को एक ही कमांडर के अधीन रखना।

भारत में बनेंगे 3 महा-कमांड

नई योजना के तहत पूरे देश की सुरक्षा को तीन बड़े थिएटर कमांड्स में बांटने की तैयारी है:

उत्तरी कमांड (Northern Command): यह कमांड पूरी तरह से चीन सीमा (LAC) की सुरक्षा और चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करेगी।

पश्चिमी कमांड (Western Command): इसका मुख्य फोकस पाकिस्तान सीमा (LOC/International Border) से सटी सुरक्षा व्यवस्था पर होगा।

समुद्री कमांड (Maritime Command): यह कमांड भारत के विशाल समुद्री क्षेत्र और हिंद महासागर की सुरक्षा का जिम्मा संभालेगी।

इन तीनों ही कमांड्स का नेतृत्व फोर-स्टार (Four-Star) रैंक के अधिकारी करेंगे। इससे जमीन, समुद्र और हवा में दुश्मन के खिलाफ एक साथ और पलक झपकते ही जवाबी कार्रवाई करना बेहद आसान हो जाएगा।

कारगिल युद्ध से शुरू हुआ सफर, चुनौतियों के बीच अंतिम पड़ाव

थिएटर कमांड बनाने का विचार सबसे पहले 1999 के कारगिल युद्ध के बाद उपजा था, जब तीनों सेनाओं के बीच और बेहतर तालमेल की कमी महसूस की गई थी। इसके बाद साल 2019 में सीडीएस (Chief of Defense Staff) का पद सृजित किया गया।

रक्षा जानकारों के मुताबिक, इस योजना को धरातल पर उतारना इतना आसान भी नहीं है, क्योंकि तीनों सेनाओं के अपने अलग नियम, बजट आवंटन और काम करने के तरीके हैं। कमान किसके हाथ में होगी और संसाधनों का बंटवारा कैसे होगा, इन पेचीदा सवालों पर अभी भी गहन मंथन चल रहा है।

अमेरिका और चीन की लीग में शामिल होगा भारत

अगर सरकार इस ऐतिहासिक फैसले पर अपनी मुहर लगा देती है, तो भारत भी अमेरिका और चीन जैसे दुनिया के उन चुनिंदा महाशक्तियों की लीग में शामिल हो जाएगा जिनके पास एकीकृत सैन्य कमान (Integrated Military Command) है। हालांकि, नई कमांड्स को पूरी तरह सक्रिय होने, बुनियादी ढांचा तैयार करने और सैनिकों की नई तैनाती में कुछ वर्षों का समय लग सकता है। फिलहाल, पूरी रक्षा नीति को आत्मनिर्भरता और आधुनिक तकनीक से जोड़ने की जनरल सुब्रमणि की इस योजना पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।