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July 13 2026 07:44 pm

'रेलवे आपकी संपत्ति है' को सीरियस ले गए एसी यात्री! चादर-कंबल से ज्यादा चोरी हुआ यह छोटा सा सामान, RTI में खुली पोल

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नई दिल्ली: "भारतीय रेल आपकी अपनी संपत्ति है"—स्टेशनों और ट्रेनों में लिखा यह स्लोगन तो आपने कई बार पढ़ा होगा, लेकिन देश के वीआईपी (AC Coaches) यात्री इस बात को कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले गए हैं। एक चौंकाने वाली आरटीआई (RTI) रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ट्रेनों के एसी कोच में सफर करने वाले अमीर यात्री बड़े पैमाने पर तकिया, कंबल, चादर और तौलिया चोरी करके अपने घर ले जा रहे हैं।

आंकड़े बताते हैं कि हर रात सफर करने वाले करीब 8 लाख एसी यात्रियों में से औसतन हर 1000 में से 1 यात्री रेलवे का सामान अपने बैग में समेट लेता है।

4 साल में 1.27 करोड़ बेडरोल चोरी, ₹104 करोड़ का चूना

'इंडियन एक्सप्रेस' द्वारा दाखिल की गई एक आरटीआई के जवाब से पता चला है कि कोरोना महामारी के बाद जब जनवरी 2022 में लिनन (बेडरोल) सेवा दोबारा शुरू हुई, तब से लेकर मई 2026 के बीच 1.27 करोड़ से ज्यादा बेडरोल आइटम चोरी हो चुके हैं। साल 2022 से 2025 के बीच इन चोरियों में 56% का भारी उछाल आया है, जिससे रेलवे और ठेकेदारों को लगभग ₹104.51 करोड़ का तगड़ा नुकसान हुआ है।

चोरों की पहली पसंद बना 'तौलिया', देखें पूरी लिस्ट

यात्रियों द्वारा सबसे ज्यादा उस सामान को निशाना बनाया गया जिसे बैग में छिपाना सबसे आसान होता है:

तौलिए (Towel): 46.54 लाख (चोरी की लिस्ट में सबसे ऊपर)

चादरें (Bedsheets): 41.13 लाख

तकिए के कवर: 23.59 लाख

कंबल (Blankets): 12.95 लाख

तकिए (Pillows): 2.76 लाख

चोरी में राजस्थान का 'बीकानेर' टॉप पर, दिल्ली ने सुधारी अपनी साख

देश के कुल 18 रेल जोन्स के 54 मंडलों में से 67% चोरियां सिर्फ 10 मंडलों में हो रही हैं। इसमें राजस्थान का बीकानेर मंडल सबसे आगे है, जहां चादरों की सबसे ज्यादा चोरी होती है। वहीं, देश की राजधानी दिल्ली ने बेहतरीन सुधार दिखाते हुए चोरियों में 79% की कमी की है। राहत की बात यह है कि दक्षिण भारत के दो मंडलों—तिरुपल्ली और पालक्काड—से एक भी चोरी की रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

प्रमुख चोर मंडल और उनके पसंदीदा आइटम:

बीकानेर: 25.76 लाख कुल आइटम चोरी (सबसे ज्यादा 12.42 लाख चादरें)

रांची: 9.31 लाख कुल आइटम (3.88 लाख तौलिए)

दिल्ली: 8.21 लाख कुल आइटम (4.78 लाख तौलिए)

मुंबई: 8.17 लाख कुल आइटम (3.57 लाख तौलिए)

जोधपुर: 8.09 लाख कुल आइटम (3.40 लाख कंबल)

यात्रियों के लालच का हर्जाना भरते हैं गरीब अटेंडेंट

रेलवे के नियमों के मुताबिक, बेडरोल बांटने का काम निजी ठेकेदारों का होता है और इसे कलेक्ट करने की जिम्मेदारी कोच अटेंडेंट की होती है। जब कोई यात्री सामान चुराता है, तो रेलवे बोर्ड के 2015 के सर्कुलर के अनुसार ठेकेदार के बिल से पैसे काट लिए जाते हैं (जैसे कंबल के ₹343, चादर के ₹198, तौलिए के ₹48)।

ठेकेदार इस घाटे की भरपाई के लिए उन गरीब कोच अटेंडेंट्स की सैलरी काट लेते हैं, जो दिन-रात ड्यूटी करते हैं। इस नुकसान से तंग आकर सोलापुर के एक सप्लायर ने तो अपना 3 साल का कॉन्ट्रैक्ट महज 14 महीने में ही छोड़ दिया।

रेलवे मंत्रालय ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि लिनन चोरी रोकने के कड़े प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन यात्रियों में नागरिक समझ (Civic Sense) का होना सबसे ज्यादा जरूरी है।