7.4 की तीव्रता वाले भूकंप के बाद समुद्र से उठीं खौफनाक लहरें, सुनामी ने मचाई तबाही, बुजुर्ग महिला की मौत
India News Live,Digital Desk : इंडोनेशिया में गुरुवार (2 अप्रैल 2026) की सुबह मौत का मंजर लेकर आई। मोलुक्का सागर में आए 7.4 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के तुरंत बाद समुद्र में उठी सुनामी की लहरों ने तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। भूकंप और सुनामी के दोहरे प्रहार ने दर्जनों घरों और सरकारी इमारतों को मलबे में तब्दील कर दिया है, जिससे पूरे द्वीपसमूह में अफरा-तफरी का माहौल है।
सुनामी की लहरों का तांडव: मिनाहासा जिले में भारी क्षति
इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी (BNPB) के मुताबिक, उत्तरी सुलावेसी के मिनाहासा जिले में सुनामी का सबसे घातक असर देखने को मिला है। यहां लहरों की चपेट में आने से एक 70 वर्षीय महिला ने दम तोड़ दिया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने चेतावनी दी है कि भूकंप का केंद्र जमीन से महज 35 किलोमीटर नीचे होने के कारण 1,000 किलोमीटर के दायरे में खतरनाक लहरें उठने की संभावना अभी भी बनी हुई है। टारेन्ट शहर और उसके आसपास के इलाकों में लोग अपनी जान बचाने के लिए ऊंची पहाड़ियों की ओर भाग रहे हैं।
मलबे में तब्दील हुई इमारतें: राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब सुबह 6:48 बजे धरती कांपी, तो लोग संभल भी नहीं पाए थे कि तभी समुद्र का पानी बस्तियों में घुसने लगा। एपीटीएन (APTN) की रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप के बाद कम से कम दो और शक्तिशाली झटके (Aftershocks) महसूस किए गए हैं। प्रशासन ने मिनाहासा और आसपास के तटीय क्षेत्रों में रेड अलर्ट जारी कर दिया है। राहत और बचाव दल मलबे में दबे लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं, हालांकि संचार व्यवस्था ठप होने के कारण नुकसान का सटीक आकलन करने में देरी हो रही है।
खतरनाक 'रिंग ऑफ फायर' और इंडोनेशिया का खौफनाक इतिहास
इंडोनेशिया दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र 'रिंग ऑफ फायर' पर स्थित है, जिसके कारण यहां की 28 करोड़ की आबादी हमेशा खतरे के साये में रहती है। आज की घटना ने साल 2018 के सुलावेसी भूकंप की यादें ताजा कर दी हैं, जिसमें 4,300 से अधिक लोगों की जान गई थी। इससे पहले 2004 में आई हिंद महासागर की सुनामी ने आचे प्रांत में जो तबाही मचाई थी, उसे दुनिया आज तक नहीं भूली है। प्रवक्ता ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, कोई भी नागरिक समुद्र तट के पास न जाए।