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September 05 2026 11:55 am

जब बेटी को गोद लेने पर मैनेजर ने छोड़ा साथ, सुष्मिता सेन ने दिया था मुंहतोड़ जवाब

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India News Live,Digital Desk : बॉलीवुड की 'आर्या' सुष्मिता सेन ने हमेशा अपनी शर्तों पर जिंदगी जी है। साल 1994 में मिस यूनिवर्स का ताज अपने नाम करने वाली सुष्मिता ने जब मात्र 24 साल की उम्र में पहली बेटी 'रेने' को गोद लेने का फैसला किया, तो यह उनके करियर और निजी जीवन के लिए एक बड़ा मोड़ था। हाल ही में एक इंटरव्यू में सुष्मिता ने उस दौर को याद करते हुए खुलासा किया कि इस फैसले ने उनके करियर को मुश्किल में डाल दिया था।

मैनेजर ने दी थी करियर खत्म होने की चेतावनी

सुष्मिता सेन ने साझा किया कि जब उन्होंने रेने को गोद लेने का निर्णय लिया, तो उस समय उनके मैनेजर ने उनका साथ छोड़ दिया था। सुष्मिता के शब्दों में, "मेरे मैनेजर ने मुझसे कहा कि तुम अपने करियर को लेकर गंभीर नहीं हो। मैं किसी ऐसी अभिनेत्री को रिप्रेजेंट नहीं कर सकता जो 24 साल की उम्र में मां बन गई हो। उसने मुझे चेतावनी दी कि अब तुम्हें फिल्मों में लीड रोल तो क्या, कैरेक्टर रोल तक नहीं मिलेंगे।"

मैनेजर की सोच को गलत साबित किया

सुष्मिता उस समय अपने फैसले पर अडिग थीं। उन्होंने कहा कि उन्हें दूसरों के बनाए नियमों पर चलने की जरूरत नहीं थी। अपने मैनेजर की नकारात्मक भविष्यवाणियों को गलत साबित करते हुए, मां बनने के बाद ही सुष्मिता ने 'मैं हूं ना' और 'मैंने प्यार क्यों किया' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। उन्होंने साबित कर दिया कि मातृत्व और करियर का संतुलन एक महिला की क्षमता को कम नहीं, बल्कि और बढ़ाता है।

"मैं अपने नियमों पर चलती हूं"

सुष्मिता एक 'सेल्फ-मेड' महिला हैं। उनका कहना है, "मेरा कोई गॉडफादर नहीं रहा है और न ही किसी ने मुझे कोई प्लेटफॉर्म दिया। मैंने सब कुछ अपने दम पर किया है। मेरे लिए सिर्फ मेरे नियम लागू होते हैं। मैं एक युवा मां बनना चाहती थी और अपनी बेटियों को बेहतरीन बचपन देना चाहती थी, जो मैंने किया।"

बेटियों के साथ सुष्मिता का रिश्ता

सुष्मिता ने 2000 में बड़ी बेटी रेने और 2010 में छोटी बेटी अलीशा को गोद लिया। आज रेने अपनी मां के नक्शेकदम पर चलते हुए एक्टिंग में अपना भविष्य तलाश रही हैं, जबकि सुष्मिता खुद भी 'आर्या' और 'ताली' जैसी वेब सीरीज के साथ अपने करियर की दूसरी पारी में लगातार सफलता की नई ऊंचाइयां छू रही हैं।

सुष्मिता सेन की यह कहानी उन महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो समाज के बनाए ढर्रे और करियर की चुनौतियों के डर से अपने सपनों या अपनी इच्छाओं को दबा देती हैं।