अवैध और असुरक्षित इमारतों पर सुप्रीम कोर्ट का सबसे बड़ा हंटर! दिल्ली-यूपी समेत कई राज्यों से मांगी रिपोर्ट
देश के बड़े महानगरों में धड़ल्ले से खड़ी हो रही अवैध और असुरक्षित गगनचुंबी इमारतों के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत ने अब तक का सबसे सख्त और ऐतिहासिक रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने देश भर में गैर-कानूनी ढंग से बने और हादसों को दावत दे रहे खतरनाक ढांचों से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली, गुरुग्राम, लखनऊ, पटना और तमिलनाडु के नगर निगम अधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने इन सभी संबंधित राज्यों के जिम्मेदार अधिकारियों से उन खतरनाक इमारतों को सील करने या गिराने (Demolition) के लिए अब तक की गई कार्रवाई की तत्काल स्टेटस रिपोर्ट तलब की है, जिनसे भविष्य में किसी बड़ी मानवीय आपदा या भूकंप के दौरान ढहने का गंभीर खतरा बना हुआ है।
दिल्ली के साकेत, मालवीय नगर और लखनऊ के अलीगंज हादसों पर लिया कड़ा संज्ञान
हाल ही में दिल्ली के साकेत इलाके में एक जर्जर इमारत के गिरने और मालवीय नगर व लखनऊ के अलीगंज में हुई भीषण आगजनी (Fire Accidents) की दर्दनाक त्रासदियों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने इस मामले में अथॉरिटीज को आड़े हाथों लिया।
शीर्ष अदालत ने नगर निगम के शीर्ष अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे कोर्ट द्वारा पूर्व में (20 मई को) जारी किए गए आदेशों के पालन में की गई जमीनी कार्रवाई का पूरा लेखा-जोखा अगली सुनवाई यानी 4 अगस्त 2026 तक हर हाल में अदालत के सामने रखें। इसके साथ ही कोर्ट ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए अगली सुनवाई की तारीख पर व्यक्तिगत रूप से (In Person) कोर्ट रूम में मौजूद रहने का सख्त हुक्म सुनाया है।
IIT दिल्ली के प्रोफेसरों की स्पेशल टीम करेगी ग्राउंड सर्वे, लापरवाही पर मिलेगी सजा
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के सबसे व्यस्त और रिहायशी इलाकों— साकेत, मालवीय नगर और लाजपत नगर में तय समय-सीमा के भीतर व्यापक जमीनी सर्वे (Ground Survey) करने के लिए एक हाई-लेवल विशेष टास्क फोर्स गठित करने का निर्देश दिया है। इस तकनीकी टीम में आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) के दो सीनियर प्रोफेसर और दो पेशेवर ड्राफ्ट्समैन शामिल होंगे, जिन्हें दिल्ली नगर निगम (MCD) के अधिकारियों का पूरा सहयोग मिलेगा। इसी तरह का एक सघन सर्वे सरोजिनी नगर मार्केट और उसके आस-पास के वीआईपी इलाकों में भी किया जाएगा, जो नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) के अधिकार क्षेत्र में आता है।
अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि इस सर्वे रिपोर्ट को तैयार करने में रत्ती भर भी ढिलाई या साठगांठ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, "हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि समिति द्वारा एक ईमानदार रिपोर्ट सौंपने में कोई भी कोताही नहीं होनी चाहिए। अगर हमें इस रिपोर्ट की निष्पक्षता पर जरा सा भी संदेह हुआ, तो हम सीधे इस कोर्ट से एक विशेष पर्यवेक्षक टीम भेज सकते हैं।"
कमिश्नर और CEO पर होगी सीधी अवमानना की कार्रवाई; अब सिर्फ बिल्डरों की गिरफ्तारी से काम नहीं चलेगा
अदालत ने अधिकारियों को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि अगर नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों (जैसे LDA, DDA, HUDA) के कमिश्नर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और अन्य जिम्मेदार अधिकारी अगली तारीख तक की गई तोड़-फोड़ और सीलिंग की कार्रवाई रिपोर्ट रिकॉर्ड पर नहीं रखते हैं, तो कोर्ट उनके खिलाफ सीधे 'स्वतः संज्ञान' (Suo Motu) लेते हुए अदालत की अवमानना (Contempt of Court) का मुकदमा शुरू कर देगा।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने कोर्ट द्वारा नियुक्त वकील (Amicus Curiae) की इस दलील से पूरी तरह सहमति जताई कि कोई भी बड़ा हादसा होने के बाद स्थानीय प्रशासन और सरकारी अथॉरिटीज अपनी साख बचाने के लिए केवल निजी बिल्डरों को गिरफ्तार करके पल्ला झाड़ लेती हैं, जबकि उन भ्रष्ट और लापरवाह सरकारी इंजीनियरों व सीनियर अधिकारियों को बचा लिया जाता है जिनकी नाक के नीचे यह अवैध निर्माण हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिया है कि अब दी जाने वाली रिपोर्ट में उन सभी सीनियर अधिकारियों के नाम भी दर्ज होने चाहिए जो इन अनधिकृत निर्माणों को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं, और उन पर सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।