Sonam Raghuvanshi Case: मेघालय पुलिस की एक 'टाइपिंग मिस्टेक' हत्या की आरोपी पत्नी पर पड़ी भारी
मध्य प्रदेश के इंदौर के प्रसिद्ध ट्रांसपोर्ट व्यवसायी राजा रघुवंशी की सनसनीखेज हत्या के मामले में एक नया और बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है। मेघालय में हनीमून के दौरान हुई इस खौफनाक हत्या की मुख्य आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी (Sonam Raghuvanshi) को जेल की सलाखों के पीछे वापस भेजने के लिए मेघालय सरकार की याचिका पर गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। देश की शीर्ष अदालत ने इस दौरान एक बड़ा संकेत देते हुए कहा कि वह इस बेहद पेचीदा कानूनी सवाल को विचार के लिए एक बड़ी बेंच (Constitutional/Larger Bench) के पास भेज सकती है कि क्या गिरफ्तारी वारंट या दस्तावेजों में महज एक 'टाइपिंग की गलती' (Typo Error) के आधार पर किसी संगीन जुर्म के आरोपी की गिरफ्तारी को अवैध घोषित कर उसे जमानत देना न्यायसंगत है?
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की खंडपीठ ने मेघालय हाई कोर्ट द्वारा सोनम रघुवंशी को तकनीकी आधार पर दी गई जमानत के फैसले की बारीकी से समीक्षा करने का कड़ा रुख अपनाया है।
धारा 103 की जगह लिख दिया 403; सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में रखी बड़ी दलील
सुप्रीम कोर्ट में मेघालय राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए देश के सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत के सामने यह गंभीर यक्ष प्रश्न उठाया कि क्या हत्या जैसे जघन्य और गंभीर अपराध में सिर्फ एक क्लेरिकल या टाइपो एरर के कारण पूरी कानूनी प्रक्रिया को ही खारिज किया जा सकता है? उन्होंने हाई कोर्ट के उस तर्क का पुरजोर विरोध किया जिसमें कहा गया था कि सोनम को गिरफ्तारी का वास्तविक आधार नहीं बताया गया था।
सॉलिसीटर जनरल ने स्पष्ट किया कि मेघालय पुलिस ने गिरफ्तारी के समय सभी तय प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया था और आरोपी को लिखित में आधार भी सौंपा था। केवल मानवीय भूल के कारण दस्तावेज में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की हत्या से संबंधित धारा 103(1) लिखे जाने के बजाय गलती से धारा 403(1) टाइप हो गई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस तकनीकी और संवैधानिक पहलू पर विस्तार से विचार करेगा कि क्या इस मामूली त्रुटि को आरोपी के अधिकारों का हनन माना जाए या नहीं।
हनीमून पर पति की हत्या कर खाई में फेंका शव; सुप्रीम कोर्ट ने मांगी दस्तावेजों की असली फोटोकॉपी
मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट रूम में वारदात की खौफनाक दास्तान बयां की। उन्होंने बताया कि यह कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि एक बेहद ठंडे दिमाग से सोच-समझकर रची गई पूर्व-नियोजित हत्या (Pre-planned Murder) थी। आरोपी पत्नी अपने पति राजा रघुवंशी के साथ मेघालय में हनीमून मनाने गई थी, जहां उसने एक दुर्गम पहाड़ी पर ले जाकर अपने ही पति को मौत के घाट उतार दिया और सबूत मिटाने के उद्देश्य से शव को गहरी खाई में फेंक दिया।
इस दलील के बाद, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मामले की तह तक जाने के लिए मेघालय पुलिस को सख्त निर्देश दिया है कि गिरफ्तारी के समय सोनम रघुवंशी को जो दस्तावेज असल में थमाए गए थे, उनकी बिल्कुल साफ और पठनीय फोटोकॉपी (Clear Photocopy) अदालत के समक्ष पेश की जाए, जिससे यह साफ हो सके कि आरोपी को केस के बैकग्राउंड की सामान्य जानकारी मिली थी या नहीं। इस आदेश के साथ ही अदालत ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार, 14 जून के लिए तय कर दी है।
तकनीकी दांव फेल हुआ तो तुरंत निरस्त होगी बेल; हाई कोर्ट के फैसले पर लटकी तलवार
इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के तेवरों से साफ लग रहा है कि आरोपी सोनम रघुवंशी की मुश्किलें आने वाले दिनों में काफी बढ़ने वाली हैं। बेंच की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस मनोज मिश्रा ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, "यदि हाई कोर्ट द्वारा जमानत देने का यह तकनीकी आधार (Technical Aspect) सुप्रीम कोर्ट की कसौटी पर टिक नहीं पाता है, तो आरोपी का जमानत आदेश तुरंत प्रभाव से रद्द (Cancel) कर दिया जाएगा।"
आपको बता दें कि इससे पहले 3 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की ही एक अन्य पीठ ने मेघालय हाई कोर्ट के जमानत आदेश पर तुरंत अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था, लेकिन अब नई बेंच द्वारा मामले को बड़ी पीठ के सुपुर्द करने के संकेतों और दस्तावेजों की गहन स्क्रूटनी के फैसले के बाद राजा रघुवंशी के परिवार को न्याय मिलने की उम्मीदें एक बार फिर मजबूत हो गई हैं।