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September 17 2026 05:00 pm

सुप्रीम कोर्ट ने बोनी कपूर, जाह्नवी और खुशी को भेजा नोटिस; श्रीदेवी की चेन्नई वाली 2.70 एकड़ जमीन पर यथास्थिति का आदेश

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दिवंगत सुपरस्टार अभिनेत्री श्रीदेवी की चेन्नई स्थित बेशकीमती संपत्ति को लेकर एक पुराना पारिवारिक व कानूनी विवाद अब देश की सबसे बड़ी अदालत की चौखट पर पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने बॉलीवुड फिल्म निर्माता बोनी कपूर, उनकी अभिनेत्री बेटियों जाह्नवी कपूर और खुशी कपूर को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने विवादित संपत्ति पर अगली सुनवाई तक 'यथास्थिति' (Status Quo) बनाए रखने का आदेश दिया है। इसका मतलब यह है कि मामले की अगली सुनवाई तक इस जमीन के मालिकाना हक, कब्जे, निर्माण या बिक्री में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। कोर्ट ने इस विवाद को कोर्ट से बाहर मध्यस्थता (Mediation) के जरिए सुलझाने का सुझाव भी दिया है।

क्या है चेन्नई की जमीन का पूरा विवाद?

यह पूरा विवाद तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के ईस्ट कोस्ट रोड (ECR) स्थित शोलिंगनल्लूर (Sholinganallur) इलाके की 2.70 एकड़ जमीन से जुड़ा हुआ है। यह जमीन एक बड़े 4.70 एकड़ के भूखंड का हिस्सा है।

इस जमीन को 19 अप्रैल 1988 को श्रीदेवी, उनकी मां राजेश्वरी और बहन श्रीलता ने चार अलग-अलग सेल डीड्स (बिक्री विलेख) के जरिए खरीदा था। वर्तमान में कानूनी उत्तराधिकारी होने के नाते इस संपत्ति पर बोनी कपूर और उनकी बेटियों जाह्नवी कपूर और खुशी कपूर का नाम दर्ज है। विवाद तब शुरू हुआ जब एम.सी. शिवकामी और उनके भाई एम.सी. नटराजन ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह जमीन मूल रूप से उनके दादा की थी और उनके पिता दिवंगत एम.सी. चंद्रशेखरन के माध्यम से उन्हें इस संपत्ति में एक-पांचवां (1/5th) हिस्सा मिलना चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने साल 1988 में श्रीदेवी और उनके परिवार के पक्ष में निष्पादित सेल डीड्स को फर्जी व अवैध घोषित करने की मांग की है।

ट्रायल कोर्ट और मद्रास हाईकोर्ट में क्या हुआ था?

इस विवाद की कानूनी लड़ाई चेंगलपट्टू की ट्रायल कोर्ट से शुरू हुई थी। ट्रायल कोर्ट ने शुरुआत में बोनी कपूर की याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि मामले की जांच प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने के बजाय पूरे ट्रायल के दौरान होनी चाहिए।

इसके बाद बोनी कपूर और उनकी दोनों बेटियों ने मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मद्रास हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कपूर परिवार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ताओं के दीवानी मुकदमे को पूरी तरह खारिज (रद्द) कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि:

यह मुकदमा करीब चार दशक (लगभग 37 साल) बाद दायर किया गया है, जबकि याचिकाकर्ता 1990 के दशक में ही वयस्क हो चुके थे।

याचिकाकर्ताओं का यह दावा कि उन्हें 1988 की सेल डीड्स की जानकारी 2023 में ही मिली, पूरी तरह अविश्वसनीय है।

कानूनी रूप से यह दावा 'परिसीमा अधिनियम' (Law of Limitation) के तहत समय-बाधित (Barred by limitation) है।

हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि याचिकाकर्ताओं ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया और संपत्ति हड़पने के इरादे से यह मुकदमा दायर किया।

सुप्रीम कोर्ट में मामला और दोनों पक्षों की दलीलें

मद्रास हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ शिवकामी और नटराजन ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की। जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पल्ली (Arun Palli) की पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने दलील दी कि मद्रास हाईकोर्ट ने मुकदमे के शुरुआती चरण में ही 'मिनी-ट्रायल' चला दिया और उन जटिल कानूनी सवालों की जांच कर ली जिसे गवाही और सबूतों के जरिए ट्रायल कोर्ट में तय किया जाना चाहिए था।

वहीं, कपूर परिवार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मूल लेनदेन 1988 का है और इसे चुनौती देने वाला मुकदमा दशकों बाद 2025 में दायर किया गया। उन्होंने तर्क दिया कि श्रीदेवी के निधन के बाद 2023 में जब प्रॉपर्टी रिकॉर्ड्स के म्यूटेशन की प्रक्रिया शुरू हुई, तब जानबूझकर पुरानी कानूनी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर यह दावा ठोका गया है।

सुप्रीम कोर्ट का वर्तमान रुख: मध्यस्थता का सुझाव और 18 दिसंबर की तारीख

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की प्राथमिक दलीलें सुनने के बाद बोनी कपूर, जाह्नवी कपूर और खुशी कपूर को नोटिस जारी करते हुए अपना औपचारिक जवाब दाखिल करने को कहा है। पीठ ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक जमीन पर यथास्थिति बरकरार रहेगी। इसके साथ ही कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपस में बैठकर किसी सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज की निगरानी में मध्यस्थता (Mediation) के जरिए विवाद सुलझाने का सकारात्मक सुझाव दिया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को करेगा, जहां मध्यस्थता की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।