किचन में एक ही स्लैब पर है चूल्हा और सिंक? जानिए कैसे दूर करें बड़ा वास्तु दोष
India News Live, Digital Desk :क्या आपके किचन में चूल्हा और सिंक एक ही स्लैब पर बने हुए हैं? वास्तु शास्त्र के अनुसार यह व्यवस्था ऊर्जा संतुलन को बिगाड़ सकती है। रसोई घर को घर की समृद्धि और स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जाता है, ऐसे में छोटी-सी वास्तु त्रुटि भी बड़े प्रभाव डाल सकती है।
क्यों माना जाता है दोष?
वास्तु के मुताबिक चूल्हा अग्नि तत्व का प्रतीक है, जबकि सिंक जल तत्व से जुड़ा होता है। अग्नि और जल का आमने-सामने या साथ होना ऊर्जा के टकराव का संकेत माना जाता है। इससे घर में तनाव, आर्थिक रुकावट या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
क्या कहता है वास्तु शास्त्र?
Vastu Shastra में बताया गया है कि रसोई में अग्नि तत्व को दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय कोण) में रखना शुभ होता है, जबकि जल तत्व उत्तर-पूर्व दिशा में बेहतर माना जाता है। यदि चूल्हा और सिंक एक ही स्लैब पर हों, तो यह दिशा सिद्धांत के विपरीत माना जाता है।
कैसे दूर करें यह वास्तु दोष?
अगर किचन का निर्माण पहले से ऐसा है और बदलाव संभव नहीं है, तो कुछ सरल उपाय किए जा सकते हैं:
चूल्हा और सिंक के बीच कम से कम 1-2 फीट की दूरी रखने की कोशिश करें।
दोनों के बीच लकड़ी या पत्थर का पार्टिशन लगवाएं।
सिंक के पास हरे रंग का छोटा पौधा रखें, जिससे जल तत्व संतुलित हो सके।
चूल्हे के पास लाल रंग की कोई वस्तु रखें, जो अग्नि तत्व को मजबूत करे।
ध्यान रखने योग्य बातें
रसोई की साफ-सफाई और उचित रोशनी भी सकारात्मक ऊर्जा के लिए जरूरी मानी जाती है। गैस स्टोव का मुख पूर्व दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है।
क्या सच में पड़ता है असर?
वास्तु शास्त्र आस्था और परंपराओं पर आधारित है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि व्यक्ति सकारात्मक सोच और संतुलित जीवनशैली अपनाए, तो नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं।