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October 08 2026 05:48 am

स्टीव जॉब्स की ऐतिहासिक चूक? बेच दिए थे Apple के 15 लाख शेयर, आज वैल्यू होती ₹5.39 लाख करोड़

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कॉर्पोरेट जगत और तकनीकी इतिहास में विजनरी कहे जाने वाले स्टीव जॉब्स के फैसलों को प्रबंधन का स्वर्णिम नियम माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सबसे मूल्यवान तकनीकी कंपनियों में शुमार एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स ने खुद एक ऐसा शेयर सौदा किया था, जिसे आज वित्तीय आंकड़ों के चश्मे से देखने पर इतिहास की सबसे बड़ी वित्तीय चूकों में गिना जाता है? साल 1997 में जब जॉब्स की एप्पल में नाटकीय वापसी हुई थी, तब उन्होंने कंपनी में मिले अपने 15 लाख शेयर महज 2.2 करोड़ डॉलर (करीब ₹180-190 करोड़ उस समय के हिसाब से) में औने-पौने दाम पर बेच दिए थे। यदि वे शेयर आज तक बरकरार रहते, तो कई बार हुए स्टॉक स्प्लिट्स और कंपाउंडिंग ग्रोथ के बाद उनकी मौजूदा बाजार कीमत 5.39 लाख करोड़ रुपये (लगभग 65 अरब डॉलर से अधिक) से भी ज्यादा होती।

1997 की वह बगावत: जब जॉब्स ने बेच डाले सारे शेयर

इस कहानी की शुरुआत 1985 से होती है, जब तत्कालीन सीईओ जॉन स्कली और बोर्ड के साथ गंभीर मतभेदों के चलते स्टीव जॉब्स को उनकी ही बनाई कंपनी से बेदखल कर दिया गया था। इसके बाद जॉब्स ने 'नेक्स्ट' (NeXT) नाम से एक नई कंप्यूटर कंपनी शुरू की और एनिमेशन स्टूडियो पिक्सार (Pixar) की नींव रखी। 1990 के दशक के मध्य तक एप्पल दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गई थी और उसके पास नए ऑपरेटिंग सिस्टम की भारी कमी थी।

कंपनी को बचाने के लिए 1996 के अंत में एप्पल ने स्टीव जॉब्स की कंपनी नेक्स्ट को 40 करोड़ डॉलर से अधिक के सौदे में खरीद लिया। इस अधिग्रहण के तहत जॉब्स को नकद राशि के साथ-साथ एप्पल के 15 लाख शेयर दिए गए और उन्हें तत्कालीन सीईओ गिल एमेलियो का अनौपचारिक सलाहकार नियुक्त किया गया। लेकिन कुछ ही महीनों बाद, जून 1997 में जॉब्स ने बिना किसी पूर्व सूचना के एक अज्ञात ब्रोकर के जरिए अपने सभी 15 लाख शेयर एक ही रात में बाजार में बेच डाले। इस बड़े शेयर डंप ने वॉल स्ट्रीट को हिलाकर रख दिया था और एप्पल के शेयर ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गए थे।

क्या सच में यह जॉब्स की चूक थी या सोची-समझी रणनीति?

बाहरी नजरिए से देखने पर यह अरबों डॉलर का वित्तीय नुकसान लगता है, लेकिन सिलिकॉन वैली के इतिहासकार इसे एक मास्टरस्ट्रोक मानते हैं। उस समय जॉब्स एप्पल के तत्कालीन प्रबंधन, विशेषकर सीईओ गिल एमेलियो की नीतियों से बेहद खफा थे। जॉब्स का मानना था कि एमेलियो कंपनी को डुबो रहे हैं और बिना कड़े नेतृत्व के एप्पल का बचना नामुमकिन है।

अपने 15 लाख शेयर बेचकर जॉब्स ने बोर्ड और निवेशकों को यह कड़ा संदेश दिया कि उन्हें मौजूदा नेतृत्व पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है। इस सामूहिक शेयर बिक्री के तुरंत बाद निवेशकों में हाहाकार मच गया और स्टॉक की कीमत धड़ाम हो गई। इसके कुछ ही हफ्तों के भीतर बोर्ड ने गिल एमेलियो को बर्खास्त कर दिया और स्टीव जॉब्स को अंतरिम सीईओ (iCEO) के रूप में पूरी कमान सौंप दी। यानी आर्थिक रूप से यह घाटा जरूर था, लेकिन राजनीतिक रूप से इसी फैसले ने जॉब्स को एप्पल का निर्विवाद सर्वेसर्वा बना दिया।

स्टॉक स्प्लिट्स का जादू: कैसे 15 लाख शेयर बन जाते खरबों के मालिक

यदि स्टीव जॉब्स ने उन 15 लाख शेयरों को अपने पास सुरक्षित रखा होता, तो एप्पल द्वारा समय-समय पर किए गए स्टॉक स्प्लिट्स ने उन शेयरों की संख्या कई गुना बढ़ा दी होती:

साल 2000 में 2-फॉर-1 स्प्लिट: 15 लाख शेयर बढ़कर 30 लाख शेयर बने।

साल 2005 में 2-फॉर-1 स्प्लिट: 30 लाख शेयर बढ़कर 60 लाख शेयर बने।

साल 2014 में ऐतिहासिक 7-फॉर-1 स्प्लिट: 60 लाख शेयर बढ़कर 4.20 करोड़ शेयर बने।

साल 2020 में 4-फॉर-1 स्प्लिट: 4.20 करोड़ शेयर बढ़कर सीधे 16.80 करोड़ शेयर बन जाते।

आज जब एप्पल का एक शेयर बाजार में ऊंचे वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है, तो इन 16.80 करोड़ शेयरों की कुल बाजार वैल्यू 65 अरब डॉलर यानी 5.39 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक बैठती। इसके अलावा, पिछले दशकों में एप्पल द्वारा दिए गए अरबों डॉलर के डिविडेंड (लाभांश) की कमाई अलग होती।

1 डॉलर की सैलरी और स्टॉक ऑप्शंस का नया सफर

कमान संभालने के बाद स्टीव जॉब्स ने कंपनी के पुनरुद्धार के लिए महज $1 का प्रतीकात्मक वार्षिक वेतन लेना स्वीकार किया। हालांकि, बाद में बोर्ड ने कंपनी को पुनर्जीवित करने के उनके असाधारण योगदान के बदले उन्हें नए स्टॉक ऑप्शंस और रेस्ट्रिक्टेड स्टॉक यूनिट्स (RSUs) से नवाजा। जॉब्स ने अपने नेतृत्व में आईमैक (iMac), आईपॉड (iPod), आईफोन (iPhone) और आईपैड (iPad) जैसे क्रांतिकारी उत्पाद लॉन्च किए, जिन्होंने न सिर्फ एप्पल को दुनिया की सबसे धनी कंपनी बनाया, बल्कि तकनीकी दुनिया का भूगोल बदल दिया।

पिक्सार और डिज्नी के जरिए बने सबसे बड़े शेयरधारक

दिलचस्प बात यह भी है कि जॉब्स की संपत्ति का बड़ा हिस्सा केवल एप्पल से ही नहीं आया। उनके द्वारा स्थापित पिक्सार एनिमेशन को जब द वॉल्ट डिज्नी कंपनी ने 7.4 अरब डॉलर में खरीदा, तो जॉब्स डिज्नी के सबसे बड़े व्यक्तिगत शेयरधारक (लगभग 7% हिस्सेदारी) बन गए। हालांकि, इतिहास हमेशा इस बात को याद रखेगा कि 1997 में बेचे गए वे 15 लाख शेयर आज दुनिया के किसी भी निवेशक के लिए सबसे बड़े 'व्हाट इफ' (काश ऐसा होता) के उदाहरणों में से एक हैं।