SpiceJet suffers setback from Supreme Court: चेयरमैन अजय सिंह पर 1 लाख का जुर्माना, 144.5 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश बरकरार

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India News Live,Digital Desk : संकटों से घिरी एयरलाइन कंपनी स्पाइसजेट (SpiceJet) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एयरलाइन के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अजय सिंह की उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के ₹144.5 करोड़ जमा करने के आदेश को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने न केवल राहत देने से इनकार किया, बल्कि कानूनी प्रक्रिया का समय बर्बाद करने के लिए अजय सिंह पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं है। अदालत ने नाराजगी जताते हुए अजय सिंह पर जुर्माना लगाया, जो इस बात का संकेत है कि न्यायपालिका अब वित्तीय विवादों को खींचने की कोशिशों पर सख्त रुख अपना रही है।

क्या है पूरा विवाद? (मारन बनाम सिंह)

यह कानूनी लड़ाई एक दशक से भी अधिक समय से चल रही है, जिसकी जड़ें साल 2015 के वित्तीय संकट में छिपी हैं:

शुरुआत: 2015 में स्पाइसजेट बंद होने की कगार पर थी। तब तत्कालीन प्रमोटर कलानिधि मारन और काल एयरवेज (KAL Airways) ने अपनी 58.46% हिस्सेदारी अजय सिंह को मात्र ₹2 के सांकेतिक मूल्य पर ट्रांसफर कर दी थी।

विवाद का कारण: समझौते के तहत वारंट और प्रेफरेंस शेयर जारी करने को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ। मारन का आरोप था कि उन्हें किए गए वादे के अनुसार रिफंड और शेयर नहीं मिले।

मध्यस्थता का फैसला: 2018 में एक आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने मारन के पक्ष में फैसला सुनाया और स्पाइसजेट को ₹308 करोड़ ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया।

किस्तों में उलझी कानूनी प्रक्रिया

हाई कोर्ट ने पहले स्पाइसजेट को ₹579 करोड़ जमा करने को कहा था। बाद में इसे बदलकर कुछ नकद और कुछ बैंक गारंटी में तब्दील किया गया।

बकाया राशि: कोर्ट की पिछली कार्यवाही में यह माना गया था कि ब्याज के तौर पर ₹194.51 करोड़ अभी भी देय हैं।

वर्तमान आदेश: इस बकाया राशि में से ₹50 करोड़ जमा किए जा चुके थे, जिसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने बाकी बचे ₹144.5 करोड़ तत्काल जमा करने का निर्देश दिया था। इसी निर्देश के खिलाफ अजय सिंह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।

स्पाइसजेट के लिए आगे की राह कठिन

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब स्पाइसजेट के पास ₹144.5 करोड़ जमा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। यदि कंपनी इस आदेश का पालन करने में विफल रहती है, तो उसे कोर्ट की अवमानना और मध्यस्थता अवॉर्ड (Arbitral Award) के पूर्ण प्रवर्तन का सामना करना पड़ सकता है। यह वित्तीय झटका ऐसे समय में आया है जब एयरलाइन पहले से ही नकदी संकट और विभिन्न वेंडरों के कानूनी मुकदमों से जूझ रही है।