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August 11 2026 07:40 pm

South Korea News: दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को उम्रकैद, मार्शल लॉ और विद्रोह के मामले में अदालत ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

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India News Live,Digital Desk : दक्षिण कोरिया की राजनीति में आज एक बड़ा भूचाल आ गया है। देश की एक शीर्ष अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल (Yoon Suk Yeol) को दिसंबर 2024 में मार्शल लॉ लगाने और देश के खिलाफ विद्रोह करने के जुर्म में आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा सुनाई है। न्यायाधीश जी कुई-यून ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि यून ने न केवल लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखा, बल्कि सत्ता के लालच में देश को अराजकता की ओर धकेलने का प्रयास किया।

सत्ता के लिए सेना और पुलिस का गलत इस्तेमाल

अदालत ने अपने फैसले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति यून ने नेशनल असेंबली (संसद) पर कब्जा करने और विपक्षी राजनेताओं को गिरफ्तार करने के लिए अवैध रूप से सैन्य और पुलिस बलों का इस्तेमाल किया था। न्यायाधीश के अनुसार, यह पूरी कवायद बेलगाम सत्ता स्थापित करने का एक सोचा-समझा प्रयास था। हालांकि, उम्मीद जताई जा रही है कि यून इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील कर सकते हैं, लेकिन इस फैसले ने उनकी राजनीतिक पारी पर लगभग विराम लगा दिया है।

पूर्व रक्षा मंत्री को भी मिली 30 साल की जेल

इस ऐतिहासिक मुकदमे में सिर्फ राष्ट्रपति ही नहीं, बल्कि उनके इस 'विद्रोह' में साथ देने वाले कई उच्चाधिकारियों पर भी गाज गिरी है। अदालत ने पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग ह्यून को इस पूरी साजिश की योजना बनाने और सेना को उकसाने का मुख्य सूत्रधार माना है। किम योंग ह्यून को उनकी केंद्रीय भूमिका के लिए 30 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा कई अन्य सैन्य और पुलिस अधिकारी भी दोषी करार दिए गए हैं।

विरोधियों को बताया था 'राष्ट्र-विरोधी' ताकत

गौरतलब है कि यून सुक येओल ने अपने कार्यकाल के दौरान मार्शल लॉ लगाने के फैसले का यह कहकर बचाव किया था कि यह उदारवादी नेताओं को रोकने के लिए जरूरी था। उन्होंने विपक्षी नेताओं को 'राष्ट्र-विरोधी' ताकत करार दिया था और आरोप लगाया था कि वे सरकार के एजेंडे में बाधा डाल रहे हैं। हालांकि, उनकी यह दलील काम नहीं आई और 14 दिसंबर 2024 को उन पर महाभियोग चलाकर उन्हें पद से निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद अप्रैल 2025 में संवैधानिक न्यायालय ने उन्हें औपचारिक रूप से पद से हटा दिया था।

लोकतंत्र की जीत के रूप में देखा जा रहा फैसला

दक्षिण कोरिया के आम नागरिकों और कानूनी विशेषज्ञों ने इस फैसले को लोकतंत्र की जीत बताया है। किसी पदस्थ या पूर्व राष्ट्रपति को विद्रोह के मामले में उम्रकैद होना यह दर्शाता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। इस फैसले के बाद दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल सहित अन्य शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि किसी भी संभावित प्रदर्शन को रोका जा सके।