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September 07 2026 11:00 am

'कार्यकर्ता सोच रहे थे दीदी को सदमा लग गया': स्मृति ईरानी ने याद की अमेठी चुनाव की हार, मंदिर के उस वाक्य और दिल्ली रवानगी का किस्सा

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उत्तर प्रदेश की वीवीआईपी संसदीय सीट अमेठी से राहुल गांधी को शिकस्त देकर 'जायंट किलर' का तमगा हासिल करने वाली और बाद में चुनावी उलटफेर का सामना करने वाली पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने लोकसभा चुनाव की हार के भावनात्मक और निजी पलों को खुलकर साझा किया है। एक हालिया पॉडकास्ट इंटरव्यू में स्मृति ईरानी ने नतीजों वाले दिन के उस घटनाक्रम का खुलासा किया, जिसने उनके आसपास मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं को गहरे अचरज में डाल दिया था। स्मृति ईरानी ने बताया कि जब वोटों की गिनती में हार तय हो चुकी थी और वे अपने आवास के मंदिर में पूजा कर रही थीं, तो उनके मुंह से निकले शब्दों को सुनकर कार्यकर्ता सन्न रह गए थे। कार्यकर्ताओं को लगा कि चुनावी हार के गहरे झटके ने उनकी 'दीदी' को मानसिक रूप से विचलित कर दिया है और वे बहकी-बहकी बातें करने लगी हैं।

मंदिर के सामने हाथ जोड़कर कहा—'जो किया अच्छा किया'

स्मृति ईरानी ने चुनाव परिणाम वाले दिन शाम छह बजे के उस मंजर को बयां करते हुए कहा कि जब यह साफ हो गया कि नतीजे उनके पक्ष में नहीं आए हैं, तो वे अमेठी स्थित अपने घर के पूजा स्थल पर गईं।

उन्होंने कहा—"नतीजों वाले दिन मैं अमेठी में अपने घर के मंदिर में गई। वहां मां भगवती और शिव परिवार की प्रतिमाएं स्थापित हैं। मैंने प्रतिमा के सामने हाथ जोड़े, उनकी ओर देखा और शांत मन से कहा—'जो किया, अच्छा किया'। मेरे ठीक बगल में पार्टी के कार्यकर्ता खड़े थे। यह सुनकर वे पूरी तरह शॉक्ड (स्तब्ध) रह गए। वे आपस में सोचने लगे कि दीदी को इतना बड़ा सदमा पहुंच गया है कि वे होश खो बैठी हैं और न जाने क्यों ऐसी बहकी-बहकी बातें कर रही हैं। लेकिन मेरे लिए वह ईश्वर के फैसले को स्वीकार करने का एक सहज भाव था। इसके तुरंत बाद मैंने अपने परिवार को फोन किया और दिल्ली रवाना होने की तैयारी कर ली। मैंने अपनी जिंदगी के 10 बेशकीमती साल अमेठी की जनता और उसके विकास को दिए थे, इसलिए सब कुछ इतना आसान तो नहीं था।"

2019 की जीत और हार का फर्क: 'तब सब ढूंढ रहे थे, बाद में कोई नहीं'

स्मृति ईरानी ने चुनावी राजनीति के इस कड़वे सच को भी बेबाकी से रखा कि जीत और हार के बाद लोगों का नजरिया कितनी तेजी से बदलता है। उन्होंने 2019 की ऐतिहासिक जीत और बाद के नतीजों की तुलना करते हुए कहा कि एक राजनेता के तौर पर उन्होंने दोनों ही सूरतों में अपना स्वाभाविक व्यवहार नहीं बदला था।

उन्होंने याद किया, "जब मैं घर पहुंची तो किसी ने मुझसे पूछा कि क्या आपको बहुत बड़ा धक्का लगा है? मैंने कहा कि नहीं, जब मैं 2019 में चुनाव जीती थी तब भी मैंने ऐसा ही संयम रखा था। बस दोनों में फर्क इतना था कि 2019 में जब जीत मिली थी, तो हर कोई मुझे तलाश रहा था और मिलने के लिए होड़ मची थी। वहीं, जब 2024 में हार मिली, तो कोई ढूंढने नहीं आ रहा था। यही राजनीति और सार्वजनिक जीवन की जमीनी हकीकत है।" उन्होंने 2019 का किस्सा साझा करते हुए बताया कि मतगणना के दिन वे तब तक अपने कमरे से बाहर नहीं निकली थीं जब तक राहुल गांधी ने खुद अपनी हार स्वीकार करते हुए सार्वजनिक ऐलान नहीं कर दिया था।

'हार ने मुझे आजाद कर दिया': प्रोफेशनल लाइफ में वापसी

इंटरव्यू में स्मृति ईरानी ने चुनावी हार के बाद के दौर को जीवन का एक 'मुक्तिदायक' (Liberating) अनुभव बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि जब वे राजनीति में आई थीं, तब उन्हें खुद को साबित करना था, लेकिन एक दशक के संसदीय व प्रशासनिक अनुभव के बाद अब उनके पास सिर्फ संगठन और समाज को योगदान देने की भावना है।

उन्होंने इस बात का भी खुलासा किया कि चुनाव के बाद उन्होंने खाली बैठने के बजाय खुद आगे बढ़कर मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के अपने पुराने सहयोगियों से संपर्क साधा और काम की बात की। उन्होंने कहा कि काम करने या अपने पुराने अभिनय के पेशे में लौटने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए। टीवी पर अपनी ऐतिहासिक भूमिका की वापसी और पार्टी संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर मिली नई जिम्मेदारियों के साथ वे आज भी उतनी ही सक्रियता से काम कर रही हैं।

पीएम मोदी का जिक्र करते हुए हुईं भावुक

इसी परिचर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यसमर्पण और उनके खिलाफ राजनीतिक हमलों का जिक्र करते हुए स्मृति ईरानी बेहद भावुक नजर आईं। उन्होंने पीएम मोदी को अपने पिता तुल्य बताते हुए कहा कि जिस व्यक्ति ने अपनी मां के अंतिम संस्कार के तुरंत बाद देश के लिए काम करते हुए 'वंदे भारत' को हरी झंडी दिखाई, उन पर व्यक्तिगत हमले करना अक्षम्य है। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि यदि ऐसे कर्मठ नेतृत्व के गिरेबान तक किसी का हाथ पहुंचता है, तो वे इसे एक सिपाही के तौर पर अपनी व्यक्तिगत विफलता मानती हैं।

स्मृति ईरानी की यह बेबाक दास्तान सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है, जहां लोग चुनावी हार को गरिमा और परिपक्वता के साथ स्वीकार करने के उनके नजरिए की सराहना कर रहे हैं।