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September 04 2026 12:31 am

स्मार्ट मीटर की गलती ने बढ़ाया शिवकुमार का बिल, परेशानियों का लंबा सफर

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India News Live,Digital Desk : चौरी चौरा खंड के शिवपुर गांव के शिवकुमार की एक छोटी सी वेल्डिंग की दुकान है। उनके पास एलएमवी चार श्रेणी का चार किलोवाट क्षमता वाला बिजली कनेक्शन है।

बिजली आपूर्ति कम होने के कारण वह ज्यादातर जेनरेटर से ही काम करते हैं। इसलिए उनका हर महीने का बिजली बिल लगभग 1,500 रुपये आता था। इसे चुकाने में उन्हें कभी परेशानी नहीं हुई।

लेकिन 28 दिसंबर 2024 को उनकी इलेक्ट्रॉनिक मीटर की जगह स्मार्ट मीटर लगा दिया गया। तभी से उनकी मुश्किलें बढ़ गईं। मीटर लगाने वाले कर्मचारी ने दो बड़ी गलती की।

पहली, मीटर नंबर गलत दर्ज कर दिया। दूसरी, रीडिंग 1,850 की बजाय 18,444 लिख दी। इसके बाद से शिवकुमार का बिजली बिल लगातार बढ़ने लगा।

शिवकुमार बताते हैं कि मोतीराम अड्डा स्थित अधिशासी अभियंता के कार्यालय में उन्होंने करीब 90 बार चक्कर काटा, लेकिन कोई हल नहीं निकला। अधिकारियों ने कहा कि “पुराना मीटर ले आओ।”

27 दिन तक वह गोरखपुर रेलवे स्टेशन के सामने स्थित बिजली निगम के स्टोर में खुद ही मीटर ढूंढते रहे। अगले दिन मीटर मिलने पर जांच कराई गई और रीडिंग सही 1,850 मिली।

शिवकुमार की उम्मीद थी कि अब सब सही हो जाएगा, लेकिन इसके बाद भी महीनों तक अभियंता दौड़ते रहे। बिल गलत होने की वजह से भोजन कम कर रहे हैं और तनाव के कारण नींद भी नहीं आती। उनका कहना है कि बेचैनी इतनी है कि लग रहा है जैसे हृदय रोग शुरू हो गया हो।

यह समस्या सिर्फ शिवकुमार की नहीं है। गोरखनाथ की सरिता शर्मा के परिसर में स्मार्ट मीटर लगाने पर पुराने मीटर की रीडिंग 44,705 थी। लेकिन कर्मचारी ने इसे 4,44,709 दर्ज कर दिया।

इस गलती के कारण सरिता शर्मा का बिल लाखों रुपये का हो गया। स्मार्ट मीटर लगाने के बाद कर्मचारियों की लापरवाही और पुराने मीटर की गलत रीडिंग उपभोक्ताओं के लिए बड़ी परेशानी बन गई है।

उपभोक्ता अब रीडिंग सही कराने और बिल सही करवाने के लिए भटक रहे हैं। चौरी चौरा खंड के अधिशासी अभियंता सुनील कुमार ने कहा कि उपभोक्ता का बिल मंगलवार तक सही कर दिया जाएगा।

मीटर जांच में सिस्टम की खामी

स्मार्ट मीटर लगाने के बाद पुराने इलेक्ट्रॉनिक मीटर को बिजली निगम को भेजा जाता है। नियमानुसार इसे जांच कर स्मार्ट मीटर की सीलिंग रीडिंग से मिलाना चाहिए।

लेकिन अक्सर ऐसा तुरंत नहीं होता। बिना जांच किए सीलिंग रीडिंग को सही मानकर बिल बना दिया जाता है।

अगर उपभोक्ता शिकायत करता है कि बिल ज्यादा आया है, तभी पुराने मीटर की जांच शुरू होती है। उस समय तक मीटर स्टोर में रखा जाता है और उपभोक्ता को खुद ही अपने मीटर को ढूंढना पड़ता है।