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August 03 2026 05:25 pm

सरकारी खजाने में भारी उछाल! अप्रैल में GST ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, पहली बार ₹2.42 लाख करोड़ के पार पहुंचा आंकड़ा

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India News Live,Digital Desk : देश की अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक बहुत बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। वित्त मंत्रालय द्वारा शुक्रवार, 1 मई को जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में माल एवं सेवा कर (GST) संग्रह ने इतिहास रच दिया है। चालू वित्त वर्ष के पहले ही महीने में सरकार की कमाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जो भारतीय बाजार की मजबूती और बदलती वैश्विक स्थितियों के प्रभाव को दर्शाती है।

सालाना आधार पर 8.7 प्रतिशत की बड़ी बढ़त

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में देश का कुल जीएसटी संग्रह 2,42,702 करोड़ रुपये रहा है। यह पिछले साल इसी महीने (अप्रैल 2025) के 2,23,265 करोड़ रुपये के मुकाबले 8.7 प्रतिशत अधिक है। यदि पिछले महीने यानी मार्च 2026 से तुलना करें, तो यह एक ही महीने में 42,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की जबरदस्त उछाल है। मार्च में यह आंकड़ा 2,00,064 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था।

आयात से हुई बंपर कमाई, रिफंड में भी दिखी तेजी

जीएसटी के इन आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण करें तो पता चलता है कि शुद्ध जीएसटी राजस्व (रिफंड घटाने के बाद) ₹2,10,909 करोड़ रहा है। इस महीने घरेलू लेनदेन से होने वाले राजस्व में 4.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो ₹1.85 लाख करोड़ से अधिक रही। हालांकि, सबसे चौंकाने वाली वृद्धि आयात (Imports) से होने वाले जीएसटी में देखी गई है, जो 25.8 प्रतिशत की छलांग लगाकर ₹57,580 करोड़ तक पहुंच गया। वहीं, सरकार ने इस दौरान ₹31,793 करोड़ का रिफंड भी जारी किया है।

ईरान-इजराइल तनाव और कच्चे तेल का असर

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अप्रैल के इन रिकॉर्ड आंकड़ों के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव एक बड़ा कारण है। मार्च और अप्रैल के दौरान ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष ने कच्चे तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया। 30 अप्रैल तक ब्रेंट क्रूड की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गईं। चूंकि भारत बड़ी मात्रा में तेल का आयात करता है, इसलिए आयात शुल्क और उससे जुड़े करों ने जीएसटी संग्रह को इस ऐतिहासिक ऊंचाई तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

लगातार बढ़ रहा है राजस्व का ग्राफ

जीएसटी संग्रह का सफर देखें तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रगति की कहानी कहता है। अप्रैल 2022 में यह करीब 1.67 लाख करोड़ रुपये था, जो 2024 में 2.10 लाख करोड़ और 2025 में 2.23 लाख करोड़ को पार कर गया। अब 2026 में 2.42 लाख करोड़ रुपये का यह नया शिखर सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि जहां एक तरफ कुल संग्रह बढ़ रहा है, वहीं सालाना वृद्धि दर में मार्च (8.8%) के मुकाबले अप्रैल (8.7%) में मामूली कमी आई है, जिस पर नजर रखने की जरूरत है।