आम आदमी पर महंगाई की दोहरी मार 19 किलो के बाद अब 5 किलो वाला 'छोटा' सिलेंडर भी हुआ महंगा
India News Live,Digital Desk : मई महीने की शुरुआत के साथ ही महंगाई ने आम आदमी का पसीना छुड़ाना शुरू कर दिया है। 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी उछाल के बाद अब 5 किलो वाले 'मिनी सिलेंडर' (Mini Cylinder) के दाम भी बढ़ गए हैं। तेल कंपनियों ने शुक्रवार को छोटे सिलेंडर की दरों में बड़ी बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इस फैसले का सीधा असर उन प्रवासी मजदूरों और छोटे दुकानदारों पर पड़ेगा जिनकी रसोई इसी मिनी सिलेंडर के भरोसे चलती है।
मिनी सिलेंडर की कीमत में ₹261 की भारी वृद्धि
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, 5 किलो वाले 'फ्री ट्रेड एलपीजी' (FTL) यानी छोटे सिलेंडर की कीमत में करीब ₹261 का इजाफा किया गया है। इस बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में इस मिनी सिलेंडर की नई कीमत अब ₹339 के करीब पहुंच गई है। मुंबई समेत देश के अन्य महानगरों में भी इसी अनुपात में कीमतें बढ़ाई गई हैं। चूंकि मजदूरों और छात्रों के पास अक्सर स्थायी गैस कनेक्शन नहीं होता, इसलिए वे इन छोटे सिलेंडरों का इस्तेमाल करते हैं, जिन्हें अब खरीदना काफी महंगा साबित होगा।
व्यावसायिक सिलेंडर भी ₹993 महंगा, होटल-रेस्तरां पर संकट
छोटे सिलेंडर के साथ-साथ 19 किलो वाले व्यावसायिक गैस सिलेंडर ने भी उपभोक्ताओं को तगड़ा झटका दिया है। दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में ₹993 की ऐतिहासिक वृद्धि हुई है, जिसके बाद इसका दाम ₹3071.50 हो गया है। मुंबई में भी यह अब ₹3024 में मिलेगा। इस मूल्य वृद्धि से होटल, रेस्तरां, ढाबा और बेकरी संचालकों का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है, जिसका असर बाहर खाना खाने वाले आम लोगों की थाली पर भी पड़ सकता है।
घरेलू गैस और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत
इतनी भारी बढ़ोत्तरी के बीच राहत की एक बड़ी खबर यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मध्यम वर्ग के लिए यह सुकून की बात है कि उनके घर की रसोई का बजट फिलहाल स्थिर है। इसके साथ ही इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को भी यथावत रखा है। तेल कंपनी के अनुसार, देश के लगभग 80 प्रतिशत पेट्रोलियम उत्पादों के दाम स्थिर रखे गए हैं ताकि आम जनता पर बोझ न पड़े।
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं छोटे और कमर्शियल सिलेंडर के दाम?
इंडियन ऑयल के मुताबिक, 5 किलो और 19 किलो वाले सिलेंडरों की खपत कुल एलपीजी खपत का मात्र 1 प्रतिशत हिस्सा है। इनकी कीमतों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की हलचल और कच्चे माल की लागत के आधार पर नियमित रूप से संशोधन किया जाता है। चूंकि वैश्विक बाजार में ऊर्जा संकट के चलते गैस की कीमतों में अस्थिरता है, इसलिए औद्योगिक और कम खपत वाले इन ईंधनों की दरों को बढ़ाना पड़ा है।