शनि साढ़ेसाती: कुंभ राशि पर चल रहा 'अस्त काल', जानें आखिरी चरण में शनि देव कब और क्या फल देंगे

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India News Live,Digital Desk : ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्याय का देवता और 'कर्म फलदाता' माना गया है। शनि की चाल का प्रभाव हर राशि के जीवन पर गहरा पड़ता है। इस समय शनि अपनी मीन राशि में गोचर कर रहे हैं, जिसका सीधा प्रभाव कुंभ राशि के जातकों पर है। वर्तमान में कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का तीसरा यानी अंतिम चरण चल रहा है, जिसे 'साढ़ेसाती का अस्त काल' या 'उतरती साढ़ेसाती' भी कहा जाता है। आइए जानते हैं कि यह चरण कुंभ राशि के लिए क्या बदलाव लेकर आ रहा है।

कुंभ राशि को साढ़ेसाती से मुक्ति कब मिलेगी?

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, कुंभ राशि के जातकों को शनि की साढ़ेसाती से पूरी तरह छुटकारा पाने के लिए अभी थोड़ा धैर्य रखना होगा। शनि देव 3 जून 2027 को मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे साढ़ेसाती का प्रभाव कम होगा। हालांकि, 20 अक्टूबर 2027 को शनि वक्री होकर पुनः मीन राशि में लौटेंगे। कुंभ राशि के जातकों को साढ़ेसाती से पूर्ण मुक्ति 23 फरवरी 2028 को प्राप्त होगी।

साढ़ेसाती का तीसरा चरण: राहत और सुधार का समय

साढ़ेसाती के पहले दो चरण अक्सर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक संघर्षों वाले होते हैं, लेकिन तीसरा चरण काफी राहत भरा माना जाता है। इस 'अस्त काल' में शनि देव व्यक्ति को संघर्षों से मुक्ति दिलाने की दिशा में कार्य करते हैं।

समस्याओं का अंत: इस चरण में पुरानी बीमारियों से राहत मिलती है और लंबे समय से चल रहे कानूनी विवादों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।

करियर में स्थिरता: नौकरी या व्यापार में आ रही बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं। जो नुकसान पहले हुआ था, उसकी भरपाई करने के अवसर मिलने लगते हैं।

परिपक्वता: इस कालखंड में व्यक्ति पहले की तुलना में अधिक अनुशासित, व्यावहारिक और समझदार बनता है।

ध्यान रखें: तीसरे चरण की चुनौतियां

यद्यपि यह चरण काफी हद तक राहत देने वाला है, परंतु कुछ सावधानियां बरतनी आवश्यक हैं। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, साढ़ेसाती के अंतिम चरण में जातक की वाणी पर शनि का विशेष प्रभाव रहता है। यदि आपकी वाणी अनियंत्रित होती है, तो वाद-विवाद और अपनों के साथ गलतफहमियां बढ़ने की संभावना रहती है। अतः इस समय संयमित भाषा का प्रयोग करना अत्यंत आवश्यक है।

कर्मों का हिसाब और पुरस्कार

शनि देव को कर्म फलदाता कहा गया है। यदि कुंभ राशि के जातक साढ़ेसाती के इस पूरे कालखंड में ईमानदार रहे हैं और उन्होंने धैर्य के साथ अपने कर्तव्यों का पालन किया है, तो शनि देव जाते-जाते उन्हें आकस्मिक धन लाभ, समाज में उच्च मान-सम्मान और करियर में कोई बड़ी उपलब्धि अवश्य प्रदान करते हैं। यह चरण आपके पिछले कर्मों का फल प्राप्त करने का समय है।