Sankashti Chaturthi 2026: संकष्टी चतुर्थी पर शिवलिंग पर चढ़ाएं ये 5 चीजें, चमक जाएगी सोई हुई किस्मत; हर बाधा होगी दूर

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India News Live,Digital Desk : हिंदू कैलेंडर के अनुसार, 06 मार्च 2026 को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह दिन प्रथम पूज्य भगवान गणेश को समर्पित है, जिन्हें 'विघ्नहर्ता' कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन गणेश जी के साथ-साथ उनके पिता भगवान शिव की आराधना करने से जातक के जीवन के सभी संकट टल जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस चतुर्थी पर शिवलिंग पर कुछ विशेष सामग्रियां अर्पित करने से रुके हुए काम पूरे होते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है।

शिवलिंग पर जरूर अर्पित करें ये 5 खास चीजें (Sankashti Chaturthi Rituals)

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के शुभ अवसर पर महादेव को प्रसन्न करने के लिए इन उपायों को करना अत्यंत फलदायी माना गया है:

गुड़ मिश्रित जल से अभिषेक: तांबे के लोटे में शुद्ध जल लेकर उसमें थोड़ा सा गुड़ मिलाएं और शिवलिंग पर अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस उपाय से समाज में मान-सम्मान बढ़ता है और सरकारी क्षेत्र में फंसी बाधाएं दूर होती हैं।

लाल चंदन का लेप: शिवलिंग पर लाल चंदन का लेप लगाने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। यह उपाय उन लोगों के लिए रामबाण है जो मानसिक तनाव या शारीरिक कष्टों से घिरे हुए हैं।

कनेर के लाल या पीले फूल: भगवान शिव को कनेर के फूल अत्यंत प्रिय हैं। चतुर्थी के दिन लाल या पीले कनेर के फूल चढ़ाने से घर की दरिद्रता दूर होती है और मां लक्ष्मी का स्थाई वास होता है।

बिल्व पत्र पर लिखें 'ॐ': एक साफ-सुथरा (बिना कटा-फटा) बिल्व पत्र लें और उस पर चंदन से 'ॐ' लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे करियर में सफलता के द्वार खुलते हैं और महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

अक्षत और काले तिल: शिवलिंग पर बिना टूटे हुए चावल (अक्षत) और थोड़े से काले तिल चढ़ाने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और कुंडली में मौजूद अशुभ ग्रहों का प्रभाव कम होता है।

चतुर्थी पूजन के समय बरतें ये सावधानियां

पूजा का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इन नियमों का पालन अवश्य करें:

दिशा का ज्ञान: पूजन के समय आपका मुख हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।

पात्र का चयन: जल चढ़ाने के लिए तांबे के लोटे का प्रयोग श्रेष्ठ है, लेकिन याद रखें कि तांबे के पात्र से कभी भी दूध न चढ़ाएं (इसके लिए स्टील या चांदी का प्रयोग करें)।

चंद्र दर्शन: संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना पूर्ण नहीं माना जाता, इसलिए रात्रि में चंद्र देव की पूजा जरूर करें।

विशेष टिप: गणेश जी को दुर्वा (घास) चढ़ाना न भूलें, क्योंकि इसके बिना चतुर्थी की पूजा अधूरी मानी जाती है।