संदीप पाठक ने केजरीवाल के सामने ही खोल दिया था 'बगावत' का कार्ड, जानें क्यों टूटे केजरीवाल के 'चाणक्य'

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India News Live,Digital Desk : आम आदमी पार्टी (AAP) के अंदर मचे घमासान के बीच अब वह 'इनसाइड स्टोरी' सामने आ रही है, जिसने अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद सिपाही संदीप पाठक को भाजपा की दहलीज पर खड़ा कर दिया। कभी पार्टी के संगठन की रीढ़ और 'चाणक्य' माने जाने वाले पाठक का जाना AAP के लिए केवल एक सांसद का जाना नहीं, बल्कि पूरी चुनावी मशीनरी का ठप होना है। सूत्रों के मुताबिक, इस बगावत की पटकथा कई दिनों पहले केजरीवाल के घर पर हुई एक 'तल्ख' मुलाकात के दौरान ही लिख दी गई थी।

केजरीवाल से वो मुलाकात और संदीप पाठक की 'पीड़ा'

अंदरुनी सूत्रों और रिपोर्ट्स के अनुसार, भाजपा में शामिल होने से कुछ दिन पहले संदीप पाठक ने अरविंद केजरीवाल से उनके आवास पर मुलाकात की थी। इस बैठक में पाठक ने बेहद शिकायती लहजे में अपनी बात रखी। पाठक की सबसे बड़ी नाराजगी पंजाब को लेकर थी। उन्होंने केजरीवाल से साफ कहा कि जिस पंजाब में उन्होंने दिन-रात एक करके संगठन खड़ा किया, आज उसी पंजाब में उन्हें किनारे किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब संगठन के फैसलों में उन्हें वह महत्व नहीं मिल रहा है, जिसके वे हकदार हैं।

अशोक मित्तल की 'मजबूरी' और ED का डर!

इस पूरी टूट में दूसरा सबसे चौंकाने वाला नाम अशोक मित्तल का है। दिलचस्प बात यह है कि केजरीवाल ने हाल ही में राघव चड्ढा को हटाकर मित्तल को ही राज्यसभा में पार्टी का उपनेता बनाया था। फिर भी वे भाजपा में चले गए। इसके पीछे की कहानी 'बिजनेस और विवादों' से जुड़ी बताई जा रही है। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के मालिक मित्तल के ठिकानों पर हाल ही में ईडी (ED) की छापेमारी हुई थी। चर्चा है कि वे अपने विशाल व्यावसायिक साम्राज्य को राजनीतिक विवादों की भेंट नहीं चढ़ाना चाहते थे। ऐसे में 'सुरक्षित भविष्य' के लिए उन्होंने भाजपा का दामन थामना ही बेहतर समझा।

मनीष सिसोदिया की 'एंट्री' और पुराने दिग्गजों की 'विदाई'

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेल से बाहर आने के बाद मनीष सिसोदिया के पंजाब में अति-सक्रिय होने से कई पुराने समीकरण बदल गए हैं। खुद अरविंद केजरीवाल भी अब पंजाब पर सीधा फोकस कर रहे हैं। इस नए पावर स्ट्रक्चर में संदीप पाठक और राघव चड्ढा जैसे नेताओं को लगा कि पार्टी के भीतर उनकी 'धाक' अब वैसी नहीं रही जैसी 2022 की जीत के वक्त थी। अपनी घटती अहमियत को भांपते हुए इन नेताओं ने 'एक साथ' निकलने की योजना बनाई।

सस्पेंस अभी बरकरार: स्वाति मालीवाल का अगला कदम?

राघव चड्ढा ने संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस तो कर दी, लेकिन 4 अन्य नाम—स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी—उस वक्त मंच पर नहीं थे। विक्रम साहनी ने सोशल मीडिया पर पुष्टि कर दी है, लेकिन स्वाति मालीवाल का मामला अभी भी अधर में है। उन्होंने दिल्ली लौटने पर 'विस्तार' से बात करने की बात कही है। अगर ये सभी 7 सांसद एक साथ भाजपा में आधिकारिक रूप से विलय करते हैं, तो यह 'आप' के इतिहास का सबसे काला अध्याय साबित होगा।