राहत की खबर! होर्मुज के 'मौत के कुएं' से सुरक्षित निकले भारत के दो गैस टैंकर, रसोई संकट पर लगेगा लगाम
India News Live,Digital Desk : ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच भारत के लिए एक बड़ी और सुकून देने वाली खबर सामने आई है। रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे खतरनाक और महत्वपूर्ण जलमार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में फंसे भारत के दो विशाल एलपीजी टैंकर जहाज सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे हैं। 'जग वसंत' और 'पाइन गैस' नाम के इन जहाजों के सुरक्षित मार्ग से देश में गहराते गैस संकट को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।
रणनीतिक द्वीप के पास से गुजरे भारतीय जहाज
शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, भारतीय ध्वज वाले इन दोनों जहाजों ने सोमवार तड़के संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के तट से अपनी चुनौतीपूर्ण यात्रा शुरू की। युद्ध के तनाव के बावजूद, ये जहाज ईरान के केशम और लारक द्वीपों के बेहद करीब से गुजरते हुए आगे बढ़ रहे हैं। आमतौर पर इस खतरनाक जलडमरूमध्य को पार करने में लगभग 14 घंटे का समय लगता है। उम्मीद जताई जा रही है कि सोमवार शाम तक ये दोनों टैंकर ओमान की खाड़ी में प्रवेश कर जाएंगे, जिसके बाद भारत पहुंचने का रास्ता साफ हो जाएगा।
कुवैत और यूएई से लदी है एलपीजी की खेप
ये दोनों जहाज फरवरी के अंत में युद्ध शुरू होने से ठीक पहले फारसी खाड़ी (Persian Gulf) में दाखिल हुए थे, लेकिन संघर्ष छिड़ने के कारण वहीं फंस गए थे।
'जग वसंत': इस जहाज ने कुवैत से भारी मात्रा में एलपीजी लोड की है।
'पाइन गैस': इस टैंकर ने यूएई के रुवैस पोर्ट से रसोई गैस की खेप भरी है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण इन जहाजों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई जा रही थी, लेकिन अब इन्हें आगे बढ़ने की हरी झंडी मिल गई है।
रसोई गैस की किल्लत से मिलेगी बड़ी राहत
भारत अपनी जरूरत की 60% से अधिक एलपीजी आयात करता है। पिछले कुछ दिनों से खाड़ी युद्ध के कारण आपूर्ति बाधित होने से देश में गैस की राशनिंग और सिलेंडरों के वजन कम करने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा था। ऐसे में 'जग वसंत' और 'पाइन गैस' का सुरक्षित बाहर निकलना किसी संजीवनी से कम नहीं है। इससे पहले भी इस महीने दो अन्य भारतीय जहाज इसी रास्ते से सुरक्षित वतन लौट चुके हैं, जो भारत की मजबूत कूटनीति का संकेत है।