रानी मुखर्जी का पहला स्क्रीन टेस्ट और बॉलीवुड की राह
- by Priyanka Tiwari
- 2025-10-03 17:08:00
India News Live,Digital Desk : बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस रानी मुखर्जी ने अपने करियर की शुरुआत साल 1996 में आई फिल्म "राजा की आएगी बारात" से की थी। इस फिल्म के निर्माता सलीम अख्तर थे और इसे दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी। फिल्म को अशोक गायकवाड़ ने डायरेक्ट किया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रानी की मां कृष्णा मुखर्जी बिल्कुल नहीं चाहती थीं कि रानी इस फिल्म में काम करें?
मां ने फिल्म में काम से किया था मना
रानी ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनकी मां ने फिल्म के निर्माता सलीम अख्तर से जाकर अनुरोध किया था कि वे उन्हें अपनी फिल्म में न लें। उनका मानना था कि रानी के शामिल होने से फिल्म को नुकसान होगा। रानी ने कहा, "मेरी मां को मेरे पहले स्क्रीन टेस्ट के बाद ऐसा लगा कि मैं उस समय के हिसाब से अच्छा नहीं कर रही थी। उन्होंने निर्माता से कहा, ‘मुझे लगता है कि मेरी बेटी को लेकर तुम अपनी फिल्म बर्बाद कर दोगे। बेहतर होगा कि तुम उसे न लो।’"
स्क्रीन टेस्ट ने बढ़ा दी थी चिंता
रानी ने आगे बताया कि उनकी मां शुरू में उनके एक्टिंग करियर के प्रति खुली थीं। लेकिन पहले स्क्रीन टेस्ट के बाद, उनका रिएक्शन बदल गया। मां को लगा कि रानी की परफॉर्मेंस फिल्म के लिए सही नहीं है। यही वजह थी कि उन्होंने निर्माता को सावधान किया और रानी को लेकर काफी सतर्क रहीं।
पिता का अलग नजरिया
रानी के पिता राम मुखर्जी की राय मां से बिल्कुल अलग थी। वह चाहते थे कि रानी इस क्षेत्र में कदम बढ़ाए, लेकिन उस समय फिल्म इंडस्ट्री में बच्चों, खासकर लड़कियों के लिए अभिनय करना आम नहीं था। रानी ने बताया, "उस समय फिल्मी परिवारों की लड़कियों के लिए यह पेशा अपनाना इतना आसान नहीं था। ज्यादातर पुरुष ही इस पेशे में आते थे। स्कूल में यह कहना कि मैं फिल्मी परिवार से हूं, गर्व की बात नहीं होती थी।"
इस तरह रानी मुखर्जी ने माता-पिता की चिंताओं और विरोध के बावजूद अपने करियर की शुरुआत की और आज बॉलीवुड की सबसे सफल और सम्मानित अभिनेत्रियों में शुमार हैं।