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May 12 2026 06:52 pm

Purnima May 2026: खगोल प्रेमियों के लिए खास होगा मई का महीना, तुला राशि में दिखेगा 'माइक्रो मून'

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India News Live,Digital Desk : खगोल विज्ञान और धार्मिक दृष्टि से मई 2026 का महीना बेहद अद्भुत होने वाला है। इस साल मई में एक नहीं बल्कि दो पूर्णिमा पड़ रही हैं, जिसकी शुरुआत 1 मई को होने वाली वैशाख पूर्णिमा से होगी। इस दिन आसमान में 'माइक्रो मून' (Micro Moon) का दीदार होगा, जो आम दिनों की तुलना में थोड़ा छोटा नजर आएगा। वहीं, महीने के अंत में 31 मई को दुर्लभ 'ब्लू मून' (Blue Moon) की घटना भी देखने को मिलेगी। अमर उजाला की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए क्यों खास है इस बार का चंद्रमा और क्या है वैशाख पूर्णिमा का धार्मिक महत्व।

तुला राशि में दिखेगा 'माइक्रो मून', 12-14% छोटा होगा आकार

खगोलविदों के अनुसार, 1 मई की रात चंद्रमा पृथ्वी से अपनी अधिकतम दूरी (Appogee) पर होगा, जो लगभग 4 लाख किलोमीटर है। इस दूरी के कारण चंद्रमा का आकार सुपरमून की तुलना में 12 से 14 प्रतिशत छोटा और लगभग 30 प्रतिशत कम चमकदार दिखाई देगा। इसे ही वैज्ञानिक भाषा में 'माइक्रो मून' कहा जाता है। तुला राशि में स्थित यह चंद्रमा करीब माइनस 12.5 मैग्नीट्यूड की चमक के साथ उदित होगा। शाम 6:30 बजे से इसका उदय शुरू हो जाएगा और रात 10:53 बजे यह अपने चरम बिंदु पर होगा।

वैशाख पूर्णिमा 2026: व्रत और दान का शुभ मुहूर्त

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख पूर्णिमा जिसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है, स्नान और दान के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल की रात 09:12 बजे से शुरू होकर 1 मई को रात 10:52 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार, 1 मई को ही व्रत रखा जाएगा और पवित्र नदियों में स्नान किया जाएगा। भविष्य पुराण के अनुसार, इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने और जल पात्र का दान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

मई में दो पूर्णिमा: 31 मई को दिखेगा दुर्लभ 'ब्लू मून'

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविदों के अनुसार, आमतौर पर एक वर्ष में 12 पूर्णिमा होती हैं, लेकिन कभी-कभी खगोलीय कैलेंडर के कारण 13 पूर्णिमा भी पड़ जाती हैं। साल 2026 में मई के महीने में दो पूर्णिमा (1 मई और 31 मई) पड़ रही हैं। जब एक ही अंग्रेजी महीने में दो पूर्णिमा होती हैं, तो दूसरी पूर्णिमा के चांद को 'ब्लू मून' कहा जाता है। यह घटना औसतन हर ढाई साल में एक बार होती है, इसीलिए 'वन्स इन अ ब्लू मून' मुहावरा काफी प्रचलित है।

मई का 'फ्लावर मून': प्रकृति के रंगों से जुड़ा नाम

पश्चिमी परंपराओं और खगोलीय इतिहास में मई की पूर्णिमा को 'फ्लावर मून' (Flower Moon) के नाम से भी जाना जाता है। इसका कारण यह है कि वसंत ऋतु के इस समय में प्रकृति में चारों ओर फूलों की भरमार होती है। पूरे साल की 12 पूर्णिमाओं के अपने अलग नाम हैं, जैसे जनवरी में 'वुल्फ मून' और जून में 'स्ट्रॉबेरी मून' कहा जाता है। इस बार खगोल प्रेमियों के लिए छोटा माइक्रो मून और दुर्लभ ब्लू मून दोनों का अनुभव एक ही महीने में मिलना किसी सुनहरे अवसर से कम नहीं है।