Pradosh Vrat May 2026: तिथि, त्रयोदशी तिथि का समय, पूजा मुहूर्त
India News Live, Digital Desk : हिंदू धर्म में भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित प्रदोष व्रत को महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। भक्तों का मानना है कि विधिपूर्वक व्रत करने से जीवन में शांति, समृद्धि, सुख और आध्यात्मिक आशीर्वाद प्राप्त होते हैं।
यह व्रत महीने में दो बार कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। चूंकि मई 2026 का पहला प्रदोष व्रत गुरुवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत के रूप में मनाया जाएगा।
मई 2026 का पहला प्रदोष व्रत कब है?
यहां मई 2026 के पहले प्रदोष व्रत से संबंधित तिथि और समय की संक्षिप्त जानकारी दी गई है।
- पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 14 मई, 2026 को सुबह 11:20 बजे शुरू होगी।
- तिथि 15 मई, 2026 को सुबह 8:31 बजे समाप्त होगी।
- प्रदोष व्रत गुरुवार, 14 मई को मनाया जाएगा।
- चूंकि यह गुरुवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत के रूप में जाना जाएगा।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत समृद्धि, सुख और सामाजिक सम्मान लाने में सहायक हो सकता है।
- यह भी माना जाता है कि सच्चे मन से पूजा करने से भक्तों को शत्रुओं पर विजय प्राप्त हो सकती है।
प्रदोष व्रत पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत पूजा परंपरागत रूप से प्रदोष काल के दौरान की जाती है, जो सूर्यास्त के आसपास पड़ता है और शिव पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
- 14 मई को शुभ पूजा मुहूर्त शाम 7:50 बजे से रात 9:17 बजे तक रहेगा।
- श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के लिए लगभग 2 घंटे और 12 मिनट का समय मिलेगा।
- परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, मुहूर्त के बाद की गई पूजा से पूर्ण आध्यात्मिक लाभ प्राप्त नहीं हो सकते हैं।
- त्रयोदशी तिथि तब तक सक्रिय रहेगी, इसलिए 15 मई को सुबह 8:31 बजे के बाद ही व्रत तोड़ना चाहिए।
प्रदोष व्रत पूजा सामग्री सूची
प्रदोष व्रत पूजा और शिव पूजा अनुष्ठानों के दौरान निम्नलिखित वस्तुओं का आमतौर पर उपयोग किया जाता है।
- पानी
- गंगाजल
- कच्ची दूध
- दही
- शहद
- चीनी
- सफेद चंदन
- अक्षत
- बेल पत्रा
- नशा
- भंग
- शमी चली जाती है
- आक फूल
- सफेद फूल
- कलावा
- bhasma
- शुद्ध घी
- कपास की बत्तियाँ
- कपूर
- अगरबत्ती
- धूप
- फल
- मिठाइयाँ
प्रदोष व्रत पूजा विधि
भक्त आमतौर पर प्रदोष व्रत के दौरान एक सरल लेकिन अनुशासित दिनचर्या का पालन करते हैं।
- अनुष्ठान शुरू करने से पहले सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
- भगवान शिव के समक्ष औपचारिक व्रत संकल्प लें।
- दिनभर सात्विक दिनचर्या का पालन करें। संभव हो तो, भक्त निराहार व्रत या फल आधारित व्रत रख सकते हैं।
- घर के मंदिर क्षेत्र में भगवान शिव और देवी पार्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- शिवलिंग का अभिषेक सर्वप्रथम जल से, फिर पंचामृत से और अंत में शुद्ध जल से करें।
- भगवान शिव को चंदन, भस्म, बेलपत्र, धतूरा, फूल, धूप, दीया, फल और मिठाई चढ़ाएं।
- शिव मंत्रों का जाप करें और शिव चालीसा के साथ व्रत कथा का पाठ करें।
- घी के दीये और कपूर से भगवान शिव की आरती करके पूजा का समापन करें।