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July 16 2026 02:30 pm

नेपाल में महाशक्तियों का 'पावर गेम': ट्रंप के दूत सर्जियो गोर के दौरे से बढ़ी हलचल, पीएम बालेन शाह की कूटनीति ने फंसाया पेंच

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India News Live,Digital Desk : नेपाल में नई सरकार के गठन के साथ ही हिमालयी देश भू-राजनीतिक खींचतान का अखाड़ा बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी और दक्षिण एवं मध्य एशिया के विशेष दूत सर्जियो गोर आगामी 30 अप्रैल को काठमांडू पहुंच रहे हैं। लेकिन इस हाई-प्रोफाइल दौरे से पहले नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) के एक सख्त कूटनीतिक प्रोटोकॉल ने वाशिंगटन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। पीएम शाह के साथ गोर की मुलाकात होगी या नहीं, इस पर सस्पेंस बरकरार है।

बालेन शाह का 'न्यू बेंचमार्क': क्यों टल सकती है गोर से मुलाकात?

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सत्ता संभालते ही नेपाल की विदेश नीति में आत्मसम्मान का नया अध्याय जोड़ा है। उन्होंने नियम तय किया है कि वह केवल विदेशी देशों के मंत्री स्तर या उससे ऊपर के अधिकारियों से ही व्यक्तिगत मुलाकात करेंगे।

मार्च में शपथ लेने के बाद से उन्होंने किसी भी विदेशी राजदूत से अकेले में मुलाकात नहीं की है।

अमेरिकी दूत सर्जियो गोर का कूटनीतिक कद हालांकि बहुत बड़ा है, लेकिन वह मंत्री पद पर नहीं हैं।

अमेरिका ने 1 मई को बैठक का अनुरोध किया है, लेकिन पीएम शाह की 'नो जूनियर ऑफिसर' नीति इस मुलाकात के आड़े आ रही है।

कौन हैं सर्जियो गोर और क्यों अहम है उनका दौरा?

सर्जियो गोर को डोनाल्ड ट्रंप का 'दायां हाथ' माना जाता है। वह वर्तमान में भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में भी कार्यरत हैं और नई दिल्ली से ही नेपाल के मामलों की देखरेख कर रहे हैं। ट्रंप ने उन्हें विशेष दूत बनाकर सहायक सचिव से भी ऊपर का दर्जा दिया है। उनका यह चार दिवसीय दौरा नेपाल में अमेरिकी निवेश और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए है, लेकिन इसके पीछे चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करने की रणनीति भी छिपी है।

चीन का त्वरित पलटवार: अमेरिका की सक्रियता से बीजिंग बेचैन

जैसे ही अमेरिकी सहायक सचिव समीर पॉल कपूर ने अपनी नेपाल यात्रा समाप्त की, चीन ने तुरंत अपनी वरिष्ठ अधिकारी काओ जिंग को काठमांडू भेज दिया। चीन ने नेपाल सरकार के सामने अपनी तीन बड़ी आपत्तियां दर्ज कराई हैं:

MCC प्रोजेक्ट: नेपाल में अमेरिकी मिलेनियम चैलेंज कॉर्पोरेशन के लागू होने पर चीन को आपत्ति है।

SPP कार्यक्रम: चीन ने नेपाल को अमेरिका के स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम में शामिल न होने की चेतावनी दी है।

स्टारलिंक: एलन मस्क के सैटेलाइट नेटवर्क का हिस्सा बनने से बचने की सलाह दी है।

भारत की भी नजर: विदेश सचिव विक्रम मिस्री जा सकते हैं काठमांडू

अमेरिका और चीन की बैक-टू-बैक सक्रियता को देखते हुए भारत भी पीछे नहीं है। खबर है कि भारत जल्द ही अपने विदेश सचिव विक्रम मिस्री को काठमांडू भेज सकता है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल फिलहाल भारत द्वारा वित्त पोषित परियोजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि नई दिल्ली के साथ बातचीत का ठोस एजेंडा तैयार किया जा सके।

नेपाल: महाशक्तियों के बीच संतुलन की चुनौती

बालेन शाह की सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती अमेरिका, चीन और भारत के बीच संतुलन बनाना है। एक तरफ अमेरिका भारी निवेश का वादा कर रहा है, तो दूसरी तरफ चीन सुरक्षा और संप्रभुता के नाम पर चेतावनी दे रहा है। ऐसे में सर्जियो गोर का दौरा और उस पर प्रधानमंत्री का रुख यह तय करेगा कि नेपाल की नई विदेश नीति कितनी स्वतंत्र और प्रभावी रहने वाली है।