पास बैठे थे जिनपिंग, ब्रिक्स मंच से पीएम मोदी ने दिया दो टूक संदेश: आतंकवाद पर 'दोहरे मानदंड' छोड़ें
वैश्विक भू-राजनीति में शक्ति संतुलन और कूटनीतिक तनावों के बीच आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया को एक स्पष्ट और सख्त संदेश दिया है। मंच पर कुछ ही दूरी पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य प्रमुख विश्व नेता मौजूद थे, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने बिना किसी झिझक के वैश्विक मंच पर आतंकवाद की पनाहगाहों, संयुक्त राष्ट्र में अड़ंगेबाजी और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के दोहरे रवैये पर सीधा प्रहार किया।
यह संबोधन केवल बीजिंग के लिए ही नहीं, बल्कि वॉशिंगटन और पश्चिमी देशों के लिए भी उतना ही स्पष्ट था कि 21वीं सदी का भारत किसी भी गुट के दबाव में आए बिना 'ग्लोबल साउथ' और अपनी सामरिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।
शी जिनपिंग के सामने आतंकवाद पर प्रहार: 'दोहरे रवैये की कोई जगह नहीं'
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और टेरर-फंडिंग के खिलाफ वैश्विक एकजुटता का आह्वान किया। मंच पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी में पीएम मोदी ने आतंकवाद के राजनीतिकरण पर कड़ा ऐतराज जताया।
पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद से लड़ने में किसी भी देश को 'दोहरे मानदंड' (Double Standards) नहीं अपनाने चाहिए। यह टिप्पणी सीधे तौर पर चीन द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC 1267 कमेटी) में पाकिस्तान समर्थित दुर्दांत आतंकियों को ब्लैकलिस्ट करने के प्रस्तावों पर बार-बार लगाए जाने वाले वीटो और तकनीकी अड़ंगों पर सीधी चोट मानी जा रही है। भारत ने साफ कर दिया कि जो देश आतंकवाद को कूटनीति के हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं या आतंकियों को संरक्षण देते हैं, उनके प्रति शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति अपनानी होगी।
युद्ध नहीं, संवाद और कूटनीति का रास्ता: पश्चिम और अमेरिका को आईना
पश्चिमी एशिया (ईरान-इजरायल तनाव) और रूस-यूक्रेन संघर्ष के साये में हो रहे इस सम्मेलन में पीएम मोदी ने पश्चिमी देशों और अमेरिका को भी कूटनीतिक रूप से दो टूक संदेश दिया। उन्होंने दोहराया कि "यह युग युद्ध का नहीं है" और किसी भी वैश्विक संघर्ष का स्थायी समाधान रणभूमि में खून बहाकर नहीं, बल्कि मेज पर बैठकर संवाद और कूटनीति के जरिए ही निकाला जा सकता है।
भारत ने पश्चिमी प्रतिबंधों (Sanctions) की एकतरफा नीतियों पर भी सवाल उठाया, जिसके कारण विकासशील देशों में खाद्य, ईंधन और उर्वरक सुरक्षा (Food, Fuel & Fertilizer Security) पर गंभीर संकट पैदा हुआ है। पीएम मोदी ने रेखांकित किया कि प्रतिबंधों की आड़ में विकासशील देशों की संप्रभुता और आर्थिक हितों की बलि नहीं दी जा सकती।
बहुपक्षीय सुधारों की मांग: यूएनएससी में बदलाव का वक्त आ चुका है
प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स को पश्चिमी प्रभुत्व वाले आर्थिक और वित्तीय ढांचे का संतुलनकारी विकल्प बताते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), विश्व व्यापार संगठन (WTO) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसी संस्थाओं में तत्काल सुधार की मांग उठाई।
उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौर में बनी संस्थाएं आज की वैश्विक वास्तविकताओं और एशिया-अफ्रीका के उभरते देशों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं। यदि इन वैश्विक निकायों ने समय रहते खुद को प्रासंगिक नहीं बनाया, तो वे अपना औचित्य खो देंगे। भारत ने ग्लोबल साउथ की आवाज बनकर यह साबित कर दिया कि ब्रिक्स किसी एक देश की विरोधी लॉबी नहीं है, बल्कि निष्पक्ष और बहुध्रुवीय विश्व (Multipolar World) का सशक्त मंच है।
कूटनीतिक संदेश: भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की छाप
शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का यह रुख भारत की 'स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी' का जीवंत प्रमाण बनकर उभरा। एक तरफ भारत क्वाड (Quad) के जरिए अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ हिंद-प्रशांत की सुरक्षा पर रणनीतिक साझेदारी निभाता है, वहीं दूसरी तरफ ब्रिक्स के मंच पर चीन और रूस के साथ बैठकर वैश्विक आर्थिक एजेंडे को दिशा देता है।
प्रधानमंत्री के इस संतुलित और बेबाक भाषण ने पूरी दुनिया को यह साफ बता दिया कि भारत किसी भी महाशक्ति के दबाव में झुके बिना अपनी सुरक्षा चिंताओं, क्षेत्रीय हितों और वैश्विक शांति के सिद्धांतों पर मजबूती से अडिग रहेगा।