पद्मिनी एकादशी व्रत पारण: 28 मई को इस शुभ मुहूर्त में खोलें व्रत, जानें सही नियम और विधि
India News Live,Digital Desk : सनातन धर्म में एकादशी व्रत का जितना महत्व है, उससे कहीं अधिक महत्व इसके 'पारण' यानी व्रत खोलने का है। यदि आप भी 27 मई को पद्मिनी एकादशी का व्रत रख रहे हैं, तो आपके लिए यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि व्रत का पारण कब और किस प्रकार करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, एकादशी व्रत का समापन द्वादशी तिथि के भीतर करना अनिवार्य है, अन्यथा व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
पद्मिनी एकादशी व्रत पारण का शुभ मुहूर्त
शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद ही करना उत्तम माना जाता है। पद्मिनी एकादशी 2026 के व्रत का पारण 28 मई 2026, गुरुवार को किया जाएगा। एकादशी व्रत खोलने का शुभ समय सुबह 05 बजकर 25 मिनट से सुबह 07 बजकर 56 मिनट तक है। चूंकि द्वादशी तिथि भी इसी समय यानी सुबह 07 बजकर 56 मिनट पर समाप्त हो रही है, इसलिए इस निर्धारित समय के भीतर ही व्रत का समापन करना श्रेयस्कर होगा।
एकादशी पारण की सही विधि
एकादशी व्रत का पारण सही समय और सात्विक भोजन के साथ करना आवश्यक है। पारण के समय साधक को तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। व्रत खोलने के लिए आप फल, खीर या ड्राई फ्रूट्स का सेवन कर सकते हैं। पारण की शुरुआत हमेशा भगवान विष्णु के चरणामृत या तुलसी के पत्तों को जल के साथ ग्रहण करके करनी चाहिए, इसे अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना गया है।
द्वादशी तिथि पर चावल का विशेष महत्व
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन चावल का सेवन करना पूर्णतः वर्जित होता है। यही कारण है कि द्वादशी तिथि को पारण के समय चावल ग्रहण करने की परंपरा है। माना जाता है कि द्वादशी के दिन चावल खाने से व्रत का अनुष्ठान पूर्ण होता है और भगवान विष्णु की कृपा से साधक को मोक्ष और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
पारण के दौरान इन बातों का रखें विशेष ध्यान
एकादशी का व्रत लगभग 24 घंटे का होता है, जो एक सूर्योदय से दूसरे सूर्योदय तक चलता है। ध्यान रहे कि द्वादशी तिथि समाप्त होने के बाद व्रत का पारण करना शास्त्रों में अनुचित माना गया है। इसलिए, समय सीमा का विशेष ध्यान रखें। यदि आप समय पर व्रत नहीं खोलते हैं, तो यह धार्मिक दृष्टिकोण से त्रुटिपूर्ण माना जा सकता है। शुभ मुहूर्त में सात्विक भोजन ग्रहण करके ही अपने व्रत का उद्यापन करें।