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October 27 2026 03:27 pm

ओपी राजभर का अखिलेश यादव पर अब तक का सबसे तीखा हमला: बोले- '2027 में ममता बनर्जी से भी बुरी गत होगी

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों के तीर और तीखे होते जा रहे हैं। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव पर सीधा और बेहद आक्रामक हमला बोला है। राजभर ने दावा किया कि साल 2027 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव का हाल पश्चिम बंगाल की 'दीदी' (ममता बनर्जी) से भी ज्यादा बुरा होने वाला है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव बाद सपा में इतनी बड़ी फूट (फाड़) होगी कि अखिलेश के लिए अपनी पार्टी को बटोरना भी मुश्किल हो जाएगा। यही नहीं, राजभर ने अखिलेश यादव के बहुचर्चित नारे 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की एक नई और विवादित परिभाषा भी गढ़ दी है।

'PDA' का नया मतलब: 'पीट देगा अहीर और पीट देगा अल्पसंख्यक'

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए एक लंबे और कड़े पोस्ट में ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के राजनीतिक फॉर्मूले पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने लिखा, 'अब पूरा प्रदेश जान चुका है कि आपके पीडीए का असली मतलब है—पीट देगा अहीर और पीट देगा (आपका वाला) अल्पसंख्यक।' राजभर ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश का वास्तविक पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समाज अब सपा का 'गिरगिट' जैसा रंग-रूप अच्छी तरह पहचान चुका है और इनके बहकावे में आने वाला नहीं है।

सैफई और ऑस्ट्रेलिया की पढ़ाई पर उठाए सवाल

अखिलेश यादव पर व्यक्तिगत तंज कसते हुए सुभासपा प्रमुख ने लिखा, 'हर चुनाव में जनता के हाथों धूल चाटने के बाद भी आपको शर्म नहीं आ रही है। आपका पूरा गैंग सोशल मीडिया पर दिन-रात झूठ बोलने और समाज को आपस में लड़ाने में लगा है। ऑस्ट्रेलिया के स्कूल में यही सब सिखाया गया है या फिर यह ज्ञान सैफई से मिला है? आपके पास जनता के विकास का कोई काम-धाम नहीं है, बस रट्टू तोते की तरह जाति-जाति चिल्लाकर वोटों का सौदा करना है।'

घटनाओं को जातीय रंग देने का लगाया आरोप, गिनाईं कई घटनाएं

ओपी राजभर ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी का मीडिया सेल और उनके नेता हर छोटी-बड़ी घटना को सवर्ण बनाम दलित या ठाकुर बनाम यादव का रूप देकर समाज में जहर घोलने का काम करते हैं। उन्होंने अपनी बात को साबित करने के लिए हालिया विवादों का जिक्र करते हुए लिखा:

बस्ती मामला: इसे दलित उत्पीड़न बताया गया, जबकि दोनों पक्ष एक ही दलित बिरादरी के थे।

बुलंदशहर खटीक हत्याकांड: इसे सवर्ण बनाम दलित का रंग दिया गया, लेकिन मुख्य आरोपी भी खटीक बिरादरी का ही निकला।

सुल्तानपुर विवाद: सुरेश यादव पर हुए हमले को ठाकुर बनाम यादव बताया गया, जबकि वह दो भाइयों का आपसी जमीनी विवाद था।

राजभर ने कुशीनगर के अभय यादव मामले, रायबरेली और मेरठ के विवादों का उदाहरण देते हुए कहा कि ज्यादातर मामले निजी रंजिश या प्रेम प्रसंग के होते हैं, लेकिन सपा का 'लोडर गैंग' मछली चोरी जैसे मामले को भी जातीय रंग दे देता है। उन्होंने संभल हिंसा और मुख्यमंत्री के एडिटेड वीडियो को लेकर भी सपा पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया।

सपा के दिग्गज नेताओं और सोशल मीडिया सेल को लिया आड़े हाथ

कैबिनेट मंत्री ने अपने पोस्ट में सपा के कई नेताओं और सोशल मीडिया पर सक्रिय कार्यकर्ताओं के नाम खुलकर लिखे। उन्होंने कहा कि माता प्रसाद पांडेय, जियाउर रहमान बर्क समेत शिवम यादव, मनोज यादव, मनीष यादव और 'समाजवादी प्रहरी' जैसे गुर्गे किसी भी घटना के होते ही तुरंत समाज में पिछड़ा-दलित उत्पीड़न का नैरेटिव सेट करने लगते हैं। राजभर ने अखिलेश यादव को अपना यह दोहरा चरित्र तुरंत बंद करने की नसीहत देते हुए कहा, ‘अभी तो मैंने आपका कच्चा-चिट्ठा खोलना शुरू किया है, आगे-आगे देखिए होता है क्या।’