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September 30 2026 10:21 pm

थलपति विजय देंगे शुभेंदु अधिकारी को चुनौती? बंगाल में खुला टीवीके का दफ्तर, समझें सियासी मायने

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दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार और राजनीति में कदम रखने वाले थलपति विजय की पार्टी 'तमिझगा वेत्री कझगम' (TVK) ने अब दक्षिण भारत की सीमाओं से बाहर निकलकर पूर्वी भारत में दस्तक दे दी है। पश्चिम बंगाल की सियासत में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब पूर्व बर्धमान जिले के फागुपुर में टीवीके का पहला कार्यालय खोला गया। राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व के बीच टीवीके के इस कदम ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है कि क्या थलपति विजय बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस जैसी ताकतों को सीधी चुनावी चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।

हालांकि, इस दफ्तर के खुलने के बाद टीवीके के केंद्रीय नेतृत्व और राज्य इकाई के बयानों में अलग-अलग सुर देखने को मिल रहे हैं। इसके बावजूद, पार्टी का झंडा बंगाल में फहराए जाने से साफ संकेत मिल रहे हैं कि विजय के समर्थकों की निगाहें अब राष्ट्रीय स्तर पर उनके राजनीतिक कद को स्थापित करने पर टिकी हैं।

पूर्व बर्धमान में खुला पहला कार्यालय: चैताली रॉय बनीं संयोजक

पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले के फागुपुर में टीवीके के नाम से दफ्तर का उद्घाटन किया गया, जहां कई जिलों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने शिरकत की। पार्टी के इस विस्तार के साथ ही पश्चिम बंगाल में चैताली रॉय को प्रदेश संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

स्थानीय नेतृत्व का कहना है कि बंगाल में विजय के प्रशंसक और समर्थक केवल फिल्मों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी राजनीतिक विचारधारा से भी जुड़ रहे हैं। राज्य इकाई का दावा है कि बंगाल में उनके समर्थकों की संख्या 5 हजार से अधिक हो चुकी है और आने वाले दिनों में बीरभूम, बांकुरा और पुरुलिया जैसे जिलों में भी संगठन का विस्तार किया जाएगा।

क्या है बंगाल में टीवीके की रणनीति? चुनावी मुकाबला या सामाजिक सरोकार?

पश्चिम बंगाल में टीवीके की एंट्री को लेकर पार्टी के भीतर दो तरह की रणनीतियां सामने आ रही हैं:

शुरुआती जोर सामाजिक कार्यों पर: प्रदेश संयोजक चैताली रॉय के अनुसार, पार्टी सीधे तौर पर किसी राजनीतिक टकराव में उतरने से पहले सामाजिक और जनकल्याणकारी गतिविधियों के माध्यम से जनता तक पहुंचेगी। पार्टी का मुख्य एजेंडा शिक्षा, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाना होगा।

चुनाव लड़ने पर फैसला शीर्ष नेतृत्व के हाथ: स्थानीय नेताओं की इच्छा है कि टीवीके भविष्य में बंगाल के निकाय या विधानसभा चुनावों में अपने उम्मीदवार उतारे, लेकिन अंतिम फैसला चेन्नई स्थित शीर्ष नेतृत्व और खुद थलपति विजय के विवेक पर निर्भर करेगा।

हाईकमान का रुख: रिपोर्टों के मुताबिक, तमिलनाडु में पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व फिलहाल औपचारिक रूप से राज्य से बाहर संगठन के आधिकारिक विस्तार को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए है। पार्टी प्रवक्ताओं ने इसे प्रशंसकों और स्थानीय समर्थकों का उत्साह बताते हुए 'शुभचिंतकों' को शुभकामनाएं दी हैं, लेकिन आधिकारिक चुनावी विस्तार की सीधी घोषणा नहीं की है।

क्या राष्ट्रीय मंच की ओर बढ़ रहे हैं थलपति विजय?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल और इससे पहले केरल के कुछ जिलों में टीवीके के दफ्तर खुलने या समर्थकों की सक्रियता बढ़ने के पीछे एक दूरगामी राजनीतिक संदेश छिपा हो सकता है। टीवीके के कई नेता और समर्थक थलपति विजय को भविष्य के लिए एक बड़े गैर-कांग्रेसी, गैर-भाजपाई चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट करने की कोशिश कर रहे हैं।

यदि टीवीके तमिलनाडु के बाहर अन्य गैर-हिंदी भाषी राज्यों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में कामयाब होती है, तो यह थलपति विजय को क्षेत्रीय क्षत्रप से आगे बढ़ाकर राष्ट्रीय स्तर के गठबंधन या मोर्चे में एक महत्वपूर्ण भूमिका दिला सकता है। हालांकि, बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली मजबूत भाजपा और ममता बनर्जी के प्रभाव के बीच टीवीके के लिए जमीन तैयार करना एक लंबी और कठिन राजनीतिक डगर साबित होगी।