15 अगस्त को मथुरा से सजेगा श्री कृष्ण का जन्मोत्सव, UP के मंदिरों में दिखेगी अद्भुत छटा
India News Live,Digital Desk : इस साल 15 अगस्त 2025 को पूरा देश हिंदू धर्म के सबसे बड़े और पवित्र त्योहारों में से एक, जन्माष्टमी (Janmashtami) के रंग में रंगा नजर आएगा। यह वह पावन दिन है जब भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर श्री कृष्ण (Lord Krishna) के रूप में अवतरण लिया था। इस अवसर पर, देशभर के श्रीकृष्ण मंदिर (Shri Krishna Temples) विशेष रूप से भव्य तरीके से सजाए जाते हैं, और चारों ओर कान्हा के जन्मोत्सव का मधुर माहौल छा जाता है। भक्तजन पूरे दिन कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत (Janmashtami Fast) रखते हैं और भगवान के भक्तिमय भजन-कीर्तन (Bhajan-Kirtan) में लीन रहते हैं।
जन्माष्टमी: कृष्ण की बाललीलाओं और आदर्शों का स्मरण
जन्माष्टमी का महत्व (Importance of Janmashtami) स्वयं भगवान कृष्ण की बाल-लीलाओं (Childhood Deeds) और उनके दिव्य, अलौकिक चरित्र को याद करने में निहित है। इस दिन, घरों और मंदिरों में भगवान कृष्ण के बाल रूप लड्डू गोपाल (Laddu Gopal) का धार्मिक अनुष्ठानों (Religious Rituals) के साथ विधिवत श्रृंगार (Adornment) किया जाता है। जन्माष्टमी पर व्रत रखने का विशेष महत्व (Special Significance of Fasting) है, और ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण की जन्म कथा (Birth Story) सुनने या सुनाने से भक्तों को विशेष लाभ (Spiritual Benefits) मिलता है और उनकी मनोकामनाएं (Wishes) पूर्ण होती हैं। जैसा कि ज्योतिषाचार्य पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी के अनुसार बताया गया है, यह कथा भक्तों को आध्यात्मिक लाभ (Spiritual Gains) प्रदान करती है और इसका मुख्य उद्देश्य भगवान कृष्ण की महिमा, उनके जीवन के आदर्शों और धर्म, सत्य एवं न्याय के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है।
कृष्ण के जन्म की पौराणिक गाथा: कंस के कारागार से गोकुल की यात्रा
जन्माष्टमी का त्यौहार भाद्रव मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि (Ashtami Tithi of Krishna Paksha in Bhadrav Month) को मनाया जाता है, क्योंकि इसी ऐतिहासिक और पौराणिक दिन पर माता देवकी (Devki) और वसुदेव (Vasudev) ने कंस (Kans) के कारागार में श्री कृष्ण को जन्म दिया था।
पौराणिक कथा (Mythological Story) के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार (Mathura Jail) में हुआ था। उनकी माता देवकी, मथुरा के अत्याचारी राजा कंस की प्रिय बहन थीं। कंस अपनी बहन से बेहद प्रेम करता था और उसने बड़े ही धूमधाम से देवकी का विवाह वसुदेव के साथ किया था। हालांकि, जब वह देवकी और वसुदेव को विदा कर रहा था, तब एक आकाशवाणी (Divine Prophecy) हुई। आकाशवाणी में कहा गया कि कंस की बहन देवकी का आठवाँ पुत्र (Eighth Son) ही कंस की मृत्यु का कारण बनेगा।
अपनी मृत्यु के भय से अंधा हुआ कंस, अपनी प्रिय बहन देवकी को मारने का निश्चय करता है। लेकिन, तब वसुदेव अपनी पत्नी के प्राणों की भिक्षा मांगते हुए कंस से यह वचन (Promise) लेते हैं कि देवकी के गर्भ से उत्पन्न प्रत्येक बच्चे को वह कंस को सौंप देंगे। कंस इस बात को मान लेता है और देवकी एवं वसुदेव दोनों को कारागार (Jail) में बंद कर देता है। कंस ने देवकी के जन्म लेने वाले सात बच्चों (Seven Children) को भी जन्म के तुरंत बाद मार डाला।
जब देवकी के आठवें संतान, श्री कृष्ण, का जन्म हुआ, तब यह आधी रात का समय था। कारागार के बाहर तैनात सभी सैनिक निद्रा में थे, और बाहर भारी वर्षा (Heavy Rain) हो रही थी। ऐसे विकट समय में, वसुदेव ने श्री कृष्ण को कंस से दूर सुरक्षित स्थान पर ले जाने का साहस जुटाया। उन्होंने अपने मित्र नंद बाबा (Nanda Baba) को स्मरण किया, कान्हा को एक टोकरी में रखा और यमुना नदी (Yamuna River) को पार करके गोकुल (Gokul) की ओर चल पड़े। मान्यता है कि रास्ते में स्वयं यमुना नदी भगवान श्री कृष्ण के चरणों को छूने के लिए आतुर हो उठी और जैसे ही कान्हा ने जल को स्पर्श किया, नदी का जल शांत हो गया। वसुदेव श्री कृष्ण को यशोदा (Yashoda) और नंद बाबा के घर सुरक्षित पहुंचा देते हैं, और वे यशोदा के पुत्र के रूप में उनका लालन-पालन करते हैं।
व्रत कथा का आध्यात्मिक महत्व: सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग
जन्माष्टमी के दिन व्रत कथा सुनना (Listening to the Fast Story) अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण (Auspicious and Important) माना जाता है। इस कथा के माध्यम से भक्तों को भगवान कृष्ण की अनुकंपा (Grace) प्राप्त होती है, और उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि (Happiness, Peace, and Prosperity) का संचार होता है। यह कथा हमें धर्म, सत्य और न्याय (Dharma, Truth, and Justice) के मार्ग पर चलने की अमूल्य प्रेरणा देती है, और भगवान कृष्ण के बाल चरित्र (Childhood Character) हमें हर परिस्थिति में सत्य और धर्म का दृढ़ता से पालन करने की शिक्षा देते हैं।