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July 08 2026 01:53 pm

40 घंटे की पुलिस रिमांड पर तीन मुख्य आरोपी, उगलेंगे छुपे कैश और साजिश के गहरे राज

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उत्तर प्रदेश के अयोध्या में प्रभु श्री राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी महा-चोरी के मामले में स्थानीय पुलिस और जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई को बेहद तेज कर दिया है। इस सनसनीखेज कांड के उजागर होने के बाद गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से तीन मुख्य आरोपियों को पुलिस ने अपने कस्टडी रिमांड पर ले लिया है। इस कदम के बाद से ही अयोध्या और देश के कूटनीतिक हलकों में यह उम्मीद जग गई है कि राम मंदिर के चढ़ावे से चुराए गए करोड़ों रुपये के गुप्त ठिकानों और इस पूरी साजिश के पीछे छिपे बड़े चेहरों का जल्द ही पर्दाफाश हो जाएगा। अदालत द्वारा मंगलवार को मंजूर की गई 40 घंटे की इस समय सीमा के तहत पुलिस ने बुधवार की सुबह ठीक सात बजे तीनों आरोपियों— अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय को जिला जेल से अपनी कस्टडी में ले लिया है।

सुबह 7 बजे जेल से कस्टडी में लिए गए आरोपी: बरामदगी पर टिकी नजर

बुधवार की अलसुबह ही पुलिस की एक विशेष टीम भारी सुरक्षा घेरे के साथ अयोध्या जिला जेल पहुंची और कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद तीनों नामजद आरोपियों को अपने साथ ले गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इन आरोपियों से पहले भी जेल की सलाखों के पीछे शुरुआती दौर की पूछताछ कर चुके हैं। उस दौरान आरोपियों के बयानों में कई विरोधाभास देखने को मिले थे। अब पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान उन सभी कड़ियों को एक साथ जोड़ने की कोशिश करेगी। पुलिस की मुख्य प्राथमिकता यह पता लगाना है कि रामभक्तों की आस्था के प्रतीक इस धन को आखिर कहां-कहां खपाया गया, चोरी की इस तरकीब को कैसे अंजाम दिया जाता था और वर्तमान में बड़ी नकदी या बहुमूल्य वस्तुएं कहां छिपाकर रखी गई हैं।

इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में बड़ी गिरफ्तारियां की गई थीं। जांच के इसी क्रम में एक अन्य मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला को भी पूर्व में पुलिस रिमांड पर लिया गया था, जिसकी निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल लग्जरी कार सहित कई महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए गए थे। उसी तर्ज पर पुलिस ने अनुकल्प, लवकुश और करुणेश से भी जमीनी स्तर पर साक्ष्यों और डिजिटल सबूतों की रिकवरी करने के लिए अदालत से सात दिनों की कस्टडी मांगी थी।

कोर्ट में चली लंबी बहस: 7 दिन की मांग के सामने मिली 40 घंटे की मोहलत

मंगलवार को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण की अदालत में इस रिमांड अर्जी पर बेहद तीखी और लंबी कानूनी बहस देखने को मिली। मामले के मुख्य विवेचक और क्षेत्राधिकारी (CO) अयोध्या आशुतोष तिवारी खुद अदालत में पूरे साक्ष्यों के साथ मौजूद रहे। सरकारी पक्ष की ओर से दलील दी गई कि आरोपियों के पास से मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी भारी धनराशि और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए जाने अभी बाकी हैं, जिसके लिए उन्हें आरोपियों को विभिन्न संदिग्ध ठिकानों पर ले जाकर निशानदेही करानी होगी।

दूसरी तरफ, आरोपियों के बचाव पक्ष के वकील (डिफेंस काउंसिल) कुलशेखर सिंह ने पुलिस की इस रिमांड अर्जी का कड़ा विरोध करते हुए दलील दी कि पुलिस पहले ही जेल में कई घंटों की पूछताछ कर चुकी है, इसलिए कस्टडी की कोई आवश्यकता नहीं है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को बेहद गंभीरता से सुनने के बाद पुलिस की दलील को आंशिक रूप से स्वीकार किया और सात दिन के बजाय करीब 40 घंटे की कस्टडी रिमांड की अनुमति दे दी।

जेल में पांच घंटे की पूछताछ और मोबाइल चैट से मिले थे अहम सुराग

इस कस्टडी रिमांड की पृष्ठभूमि 5 जुलाई को ही तैयार हो गई थी, जब अदालत की विशेष अनुमति मिलने के बाद पुलिस टीम ने जेल के भीतर ही इन तीनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर करीब पांच घंटे तक गहनता से ग्रिल किया था। उस मैराथन पूछताछ के दौरान पुलिस ने जब आरोपियों के जब्त किए गए मोबाइल फोन्स के डिलीटेड डेटा और लाइव मोबाइल चैट को खंगाला, तो उसमें कई ऐसे आपत्तिजनक ट्रांजैक्शन और कोडवर्ड्स मिले जिन्होंने अधिकारियों के होश उड़ा दिए।

पुलिस ने जेल के भीतर ही उन चैट्स का मौके पर भौतिक सत्यापन भी कराया था। अब इस 40 घंटे की कस्टडी रिमांड के दौरान पुलिस की साइबर और फॉरेंसिक टीमें आरोपियों की निशानदेही पर उन छिपे हुए डिजिटल सर्वरों, बैंक खातों और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेजों को जब्त करने की कार्रवाई में जुट गई हैं, जिससे इस महा-चोरी कांड के सभी बचे हुए राज पूरी तरह जनता के सामने आ जाएंगे।