होर्मुज जलडमरूमध्य में छिड़ा 'तेल युद्ध'! ट्रंप ने मांगी 7 देशों से सैन्य मदद, क्या ईरान की घेराबंदी के लिए समुद्र में उतरेंगे युद्धपोत..
India News Live,Digital Desk : खाड़ी देशों में गहराते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद आक्रामक और बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। ईरान द्वारा दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों और वहां बढ़ती सैन्य हलचल को देखते हुए ट्रंप ने दुनिया के सात शक्तिशाली देशों से मदद की गुहार लगाई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इन देशों से आग्रह किया है कि वे इस समुद्री मार्ग को सुरक्षित करने के लिए तत्काल अपने युद्धपोत (Warships) भेजें, ताकि वैश्विक तेल आपूर्ति में कोई बाधा न आए।
मध्य पूर्व के तेल पर निर्भर देशों को ट्रंप की खरी-खरी
अमेरिकी प्रशासन ने उन राष्ट्रों को सीधे तौर पर निशाने पर लिया है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मध्य पूर्व (Middle East) के कच्चे तेल पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं। राष्ट्रपति ट्रंप का तर्क है कि होर्मुज की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ अमेरिका की नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो देश यहां से अपना व्यापार और तेल का आयात करते हैं, उन्हें भी अपनी नौसेना की ताकत झोंकनी होगी। ट्रंप के इस आह्वान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर ईरान की नाकेबंदी करने और उसे कड़ा संदेश देने की रणनीति मानी जा रही है।
ईरान के प्रतिबंध और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा
दरअसल, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए कड़े प्रतिबंधों का ऐलान किया है। यह जलमार्ग दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है। अगर यह रास्ता बंद होता है या यहां युद्ध जैसे हालात बनते हैं, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि सात देशों का संयुक्त नौसैनिक बेड़ा ईरान के प्रभाव को कम करने और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को सुरक्षा प्रदान करने में कारगर साबित होगा।
क्या युद्ध की ओर बढ़ रही है दुनिया?
ट्रंप की इस अपील के बाद अब सबकी नजरें उन सात देशों पर टिकी हैं जिन्हें युद्धपोत भेजने का न्योता दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये देश समुद्री सुरक्षा के नाम पर अपनी सेना भेजते हैं, तो खाड़ी क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ सकता है। ईरान ने पहले ही चेतावनी दी है कि उसकी सीमा के पास किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे में ट्रंप का यह मास्टरस्ट्रोक या तो ईरान को बातचीत की मेज पर लाएगा या फिर समुद्र में एक भीषण सैन्य टकराव की शुरुआत कर देगा।