निर्जला एकादशी व्रत पारण मुहूर्त: 26 जून को किस समय खोलें व्रत? जानें द्वादशी तिथि का समय और सही नियम
साल की सबसे कठिन और पुण्यदायी मानी जाने वाली निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) का व्रत आज 25 जून 2026, गुरुवार को पूरे विधि-विधान के साथ रखा जा रहा है। चूंकि यह व्रत बिना अन्न और जल के रखा जाता है, इसलिए इसके पारण (व्रत खोलने) का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब उसका पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि के भीतर और शुभ मुहूर्त में किया जाए।
आइए जानते हैं कि कल 26 जून 2026, शुक्रवार को निर्जला एकादशी व्रत पारण का शुभ समय (Paran Muhurat) क्या है और व्रत खोलते समय किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
26 जून को निर्जला एकादशी व्रत पारण का शुभ समय
पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, निर्जला एकादशी व्रत के पारण का सबसे उत्तम और शुभ मुहूर्त इस प्रकार है:
पारण का शुभ मुहूर्त: 26 जून 2026 (शुक्रवार) को सुबह 05:49 बजे से सुबह 09:03 बजे तक रहेगा।
कुल अवधि: व्रत खोलने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 3 घंटे 14 मिनट का समय मिलेगा।
द्वादशी तिथि कब से कब तक है?
शास्त्रों के अनुसार, द्वादशी तिथि के भीतर ही पारण करना अनिवार्य होता है। इस बार द्धनी तिथि के समय की स्थिति कुछ इस प्रकार है:
द्वादशी तिथि प्रारंभ: 25 जून 2026 को शाम 04:39 बजे से।
द्वादशी तिथि समाप्त: 26 जून 2026 को शाम 06:52 बजे पर।
द्वादशी के भीतर पारण क्यों जरूरी? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति द्वादशी तिथि समाप्त होने के बाद व्रत खोलता है, तो उसे व्रत का पुण्य फल प्राप्त नहीं होता और इसे शास्त्रों में दोष या पाप के समान माना गया है। इसलिए शुक्रवार सुबह 09:03 बजे से पहले ही पारण कर लेना सबसे श्रेष्ठ रहेगा।
किस चीज का सेवन करके खोलें निर्जला एकादशी का व्रत?
चूंकि निर्जला एकादशी का व्रत पूरी तरह निराहार और निर्जल (बिना पानी के) रखा जाता है, इसलिए पारण के भी विशेष नियम हैं:
तुलसी दल और मीठा जल: निर्जला एकादशी व्रत का पारण सबसे पहले तुलसी के पत्ते (तुलसी दल) और गंगाजल या सादे जल को ग्रहण करके करना अति उत्तम माना जाता है।
सात्विक भोजन: व्रत खोलने के बाद बनने वाला भोजन पूरी तरह सात्विक (बिना लहसुन-प्याज का) होना चाहिए। पारण के दिन चावल खाने का विशेष महत्व होता है, इसलिए द्वादशी के भोजन में चावल शामिल कर सकते हैं।
केवल एक निर्जला एकादशी व्रत करने का महालाभ
ज्योतिष शास्त्र और पौराणिक कथाओं के अनुसार, जो श्रद्धालु साल की सभी 24 एकादशियों का व्रत करने में सक्षम नहीं हैं, वे यदि केवल सच्चे मन से निर्जला एकादशी का व्रत रख लेते हैं, तो उन्हें साल भर की सभी एकादशियों के व्रत के समान ही पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इससे मनुष्य के सभी जन्मों के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, समृद्धि व मानसिक शांति आती है।
निर्जला एकादशी के बाद कौन सी एकादशी आती है?
निर्जला एकादशी (ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी) के समापन के बाद आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी आती है, जिसे योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) कहा जाता है। इस साल योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा।