New wave of attacks in Gaza : नागरिक और सैनिक दोनों प्रभावित

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India News Live,Digital Desk : गुरुवार को दक्षिणी गाजा पट्टी में फ़िलिस्तीनी लड़ाकों और इज़राइली सेना के बीच झड़पों में चार इज़राइली सैनिक मारे गए। वहीं, इज़राइली हवाई और ज़मीनी हमलों में 85 फ़िलिस्तीनी भी हताहत हुए हैं, जिनमें हमास के लड़ाके भी शामिल हैं। गाजा शहर में भीषण लड़ाई जारी है, और इज़राइली टैंक गोलाबारी के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इस बीच शहर की दूरसंचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है।

संचार व्यवस्था बाधित

गाजा शहर की इंटरनेट और टेलीफोन लाइनें कट गई हैं। शहर में लोग बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। बासेम अल-कानू, जो शहर के बाहर अपने परिवार के साथ एक तंबू में हैं, पूछते हैं, “हम कहाँ जाएँ?” खाने-पीने की कमी के साथ लगातार बम और गोलीबारी का खतरा भी जीवन को असुरक्षित बना रहा है।

बंधकों की सुरक्षा पर संकट

इज़राइली सेना के प्रवक्ता ने कहा कि वे हमास को दबाने और अपने बंधकों को सुरक्षित निकालने के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं। वर्तमान में 48 बंधक हैं, जिनमें केवल 20 के जीवित रहने की उम्मीद है। इस बीच, इज़राइल में बंधकों की रिहाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी जारी हैं।

राहत सामग्री पर हमला

जॉर्डन की सीमा पर एलेनबी क्रॉसिंग पर हुई गोलीबारी में दो इज़राइली सैनिक मारे गए। हमले में ड्राइवर की भी मौत हुई, जो फ़िलिस्तीनियों के लिए राहत सामग्री लेकर जा रहा था। इज़राइली सेना ने इसे आतंकवादी हमला बताया। इसी दिन इज़राइली लड़ाकू विमानों ने लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर भी हमले किए, जिसमें किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई।

इज़राइल में नीतिगत मतभेद

गाजा में युद्ध के फैसलों को लेकर प्रधानमंत्री नेतन्याहू और उनके सैन्य प्रमुखों के बीच मतभेद की खबरें हैं। सेना जमीनी कार्रवाई और स्थायी कब्जे के प्रस्ताव से असहमत है। कतर में हवाई हमलों और हमास से अप्रत्यक्ष वार्ता पर भी सरकार की नीतियों को लेकर असहमति है।

अंतर्राष्ट्रीय दबाव

संयुक्त राष्ट्र महासभा में 142 देशों ने इज़राइल के खिलाफ प्रस्ताव का समर्थन किया। अमेरिकी समेत केवल 10 देशों ने इसके खिलाफ मतदान किया। यूरोप के देश अब इज़राइली उत्पादों पर प्रतिबंध और टैरिफ लगाने पर विचार कर रहे हैं।

यरुशलम स्थित इज़राइल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट के प्रमुख योनातन प्लीसनर के अनुसार, देश के राष्ट्रीय हितों और बड़े फैसलों पर विवाद बढ़ रहा है। बंधकों की सुरक्षा और हमास पर हमले के चलते सरकार की आलोचना भी तेज हुई है।