चीन में धार्मिक संस्थानों पर नया नियम, भिक्षुओं के निजी लाभ के आरोपों की जांच
- by Priyanka Tiwari
- 2025-09-19 16:40:00
India News Live,Digital Desk : चीन ने हाल ही में मंदिरों के धन का निजी लाभ उठाने के शक में कई शक्तिशाली भिक्षुओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। यह कदम धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता लाने और देश की तेजी से बढ़ती मंदिर अर्थव्यवस्था को नियमित करने के प्रयास का हिस्सा है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन की मंदिर अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से बढ़ रही है और इस साल के अंत तक इसका मूल्य 100 बिलियन युआन तक पहुँचने की संभावना है।
चीन में मंदिरों का इतिहास
चीन में मंदिरों का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 1950 के दशक में कई मठों ने अपनी संपत्ति खो दी थी। 1960 और 1970 के दशक में भी कई मंदिरों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। लेकिन 1980 के दशक में आर्थिक सुधारों के साथ मंदिरों की लोकप्रियता फिर से बढ़ी। अब ये अपने अस्तित्व के लिए सरकार द्वारा समर्थित पर्यटन पर निर्भर हैं।
भिक्षु शी के खिलाफ जांच
शाओलिन मठ के प्रमुख भिक्षु शी योंगक्सिन पर आरोप है कि उन्होंने 1,500 साल पुराने मठ को लाखों युआन के व्यापारिक साम्राज्य में बदल दिया। जुलाई में उनके खिलाफ धन के कथित दुरुपयोग और महिलाओं के साथ अनुचित संबंधों के आरोपों की जांच शुरू हुई। दो हफ्तों के भीतर उन्हें उनके पद से हटा दिया गया और भिक्षु पदवी भी छीन ली गई।
2015 में शी ने शाओलिन मठ में लगभग 300 मिलियन डॉलर की लागत से गोल्फ कोर्स, होटल और कुंग फू स्कूल बनाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे काफी आलोचना का सामना करना पड़ा।
शी का बयान
बीबीसी को दिए गए इंटरव्यू में शी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अगर कोई गलती होती, तो वह बहुत पहले सामने आ जाती।
शी अकेले ऐसे भिक्षु नहीं हैं जिन पर मंदिर की संपत्ति का निजी लाभ उठाने का आरोप लगा है। अगस्त में हांग्जो के लिंगयिन मंदिर में भिक्षुओं द्वारा बड़ी रकम गिनने का एक वीडियो भी वायरल हुआ था।
जुलाई में भिक्षु वू बिंग से उनकी उपाधि छीन ली गई और उनके खिलाफ जरूरतमंद महिलाओं और बच्चों को दिए गए दान का निजी लाभ के लिए इस्तेमाल करने के आरोपों की जांच की गई।