Harvard Professor Reveals -: आत्महत्या के पीछे के चौंकाने वाले कारण और एआई का असर
India News Live,Digital Desk : हार्वर्ड विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विशेषज्ञ और क्लिनिकल एंड डेवलपमेंटल रिसर्च लैब के निदेशक, डॉ. मैथ्यू नॉक ने हाल ही में आत्महत्या को लेकर एक गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा किया। उनके अनुसार, अमेरिका में करीब 15% लोग अपने जीवन में कभी न कभी आत्महत्या के बारे में सोचते हैं।
लेकिन दिलचस्प बात यह है कि उन लोगों में से सिर्फ़ एक तिहाई ही इस कदम को आज़माते हैं। और जो लोग प्रयास करके बच जाते हैं, उनमें से लगभग 20% लोग इसे दोबारा आज़माते हैं। इसके बावजूद, तीन-चौथाई लोग यह कहते हैं कि उन्होंने कोशिश के तुरंत बाद पछतावा महसूस किया।
कौन से पेशे में है सबसे अधिक खतरा?
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पुलिस, डॉक्टर, सैनिक और अन्य ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ पेशों में आत्महत्या का खतरा अधिक होता है। डॉ. नॉक ने ‘ऑन पर्पस’ पॉडकास्ट में बताया कि इसका मुख्य कारण घातक औज़ारों की आसान उपलब्धता है। यही कारण है कि इन पेशों में आत्महत्या की दर सामान्य लोगों से कहीं ज़्यादा होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह खतरा हर किसी में समान रूप से नहीं है। उम्र, लिंग और जातीयता को ध्यान में रखने के बाद भी, महिला पुलिस अधिकारियों में यह जोखिम ज़्यादा देखने को मिलता है।
एआई और आत्महत्या के जोखिम पर विचार
डॉ. नॉक का मानना है कि वर्तमान समय में एआई और मशीन लर्निंग नई संभावनाओं के साथ आती हैं, लेकिन इनमें कई जोखिम भी हैं। उन्होंने कहा,
"मशीन लर्निंग के जरिए हम जोखिम स्तर और पैटर्न पहचान सकते हैं। लेकिन मौजूदा प्रणालियाँ पूरी तरह मानव-संवेदनशील नहीं हैं और कई बार महत्वपूर्ण चीज़ें छूट जाती हैं। इसलिए, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में एआई पर पूरी तरह निर्भर होना खतरे से खाली नहीं है।"
डॉ. नॉक की टिप्पणियाँ इस बात की ओर इशारा करती हैं कि हमें आत्महत्या जैसे घातक खतरों से बचाव के उपाय करने चाहिए और एआई के उपयोग में सावधानी बरतनी चाहिए।