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May 12 2026 07:02 pm

कर्नाटक में अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण का नया मॉडल: अब 400-पॉइंट रोस्टर से होगा कोटे का बंटवारा

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India News Live,Digital Desk : कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने अनुसूचित जातियों (SC) के भीतर 'आंतरिक आरक्षण' (Internal Reservation) को लागू करने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आरक्षण के वर्गीकरण और भर्ती प्रक्रिया को लेकर नए नियमों पर मुहर लगा दी गई है। अब राज्य में सरकारी नौकरियों और भर्तियों के लिए 400-पॉइंट रोस्टर सिस्टम का पालन किया जाएगा, जिससे कोटे का लाभ सबसे पिछड़ी उप-जातियों तक पहुंचना सुनिश्चित होगा।

15% कोटे का नया गणित: किसे कितना हिस्सा?

कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एच.के. पाटिल ने जानकारी दी कि सरकार ने 15 प्रतिशत अनुसूचित जाति कोटे को तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित करने के फॉर्मूले को मंजूरी दी है:

लेफ्ट हैंड (वामपंथी) समूह: 5.25 प्रतिशत।

राइट हैंड (दक्षिणपंथी) समूह: 5.25 प्रतिशत।

खानाबदोश व अन्य अनुसूचित जातियां: 4.5 प्रतिशत।

सरकार का मानना है कि इस वर्गीकरण से उन समुदायों को हक मिलेगा जो दशकों से आरक्षण के लाभ से वंचित थे और जिनका हिस्सा कुछ प्रभावशाली उप-जातियां ले रही थीं।

क्या है 400-पॉइंट रोस्टर और नई भर्ती नीति?

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

नया रोस्टर: अब से सभी सरकारी नौकरियों में 400-पॉइंट रोस्टर प्रणाली लागू होगी।

SC जनरल श्रेणी: यदि किसी भर्ती विज्ञापन में SC वर्ग के लिए तीन से कम रोस्टर पॉइंट (पद) उपलब्ध होते हैं, तो वहां वर्गीकरण लागू नहीं होगा। ऐसी स्थिति में सभी 101 अनुसूचित जाति समुदायों को 'SC जनरल' के तहत समान रूप से प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा।

भर्तियां वापस होंगी: जिन विभागों ने आंतरिक आरक्षण को शामिल किए बिना हाल ही में विज्ञापन जारी किए थे, उन्हें वापस लेकर अब नए रोस्टर के अनुसार संशोधित नोटिफिकेशन जारी करना होगा।

56,432 पदों पर भर्ती: सरकार ने राज्य में रिक्त पड़े 56,432 स्वीकृत पदों को तत्काल भरने के निर्देश दिए हैं।

आंतरिक आरक्षण की जरूरत क्यों पड़ी?

कर्नाटक में लंबे समय से 'ए जे सदाशिव आयोग' की रिपोर्ट को लागू करने की मांग हो रही थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि अनुसूचित जाति के भीतर कुछ जातियां अधिक विकसित हो गई हैं, जबकि वामपंथी (Left) और खानाबदोश समुदाय आज भी बेहद पिछड़े हैं। इसी विषमता को दूर करने के लिए आंतरिक आरक्षण का सहारा लिया गया है।

संवैधानिक स्थिति और सुप्रीम कोर्ट का रुख

1992 के इंद्रा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की सीमा 50% तय की थी। कर्नाटक सरकार का तर्क है कि वह कुल कोटे (15%) में कोई बढ़ोतरी नहीं कर रही है, बल्कि उसी सीमा के भीतर उप-वर्गीकरण कर रही है। हाल के वर्षों में सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों को अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण करने की अनुमति देने की दिशा में सकारात्मक संकेत दिए हैं, जिसे आधार बनाकर सिद्धारमैया सरकार ने यह बड़ा दांव खेला है।