घर के इस कोने में भूलकर भी न रखें ये 5 अशुभ चीजें, रुक जाएगी बरकत और खाली हो जाएगी तिजोरी
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर केवल ईंट-पत्थर और सीमेंट से बना एक ढांचा नहीं होता, बल्कि यह सकारात्मक (दैवीय) और नकारात्मक ऊर्जाओं का एक अत्यंत संवेदनशील ऊर्जा केंद्र होता है। अक्सर देखा जाता है कि दिन-रात कड़ी मेहनत, बेहतरीन आमदनी और समझदारी के बावजूद कई परिवारों में पैसा टिकता नहीं है। महीने की शुरुआत में आया वेतन अचानक अनपेक्षित खर्चों, चिकित्सा बिलों, कोर्ट-कचहरी के विवादों या व्यापारिक नुकसान में पानी की तरह बह जाता है। लोग अक्सर इसे अपनी खराब किस्मत या ग्रह दशा मान लेते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार इसके पीछे का मुख्य कारण घर के प्रमुख कोनों में मौजूद वास्तु दोष और वहां रखी गई अनुचित वस्तुएं होती हैं।
सनातन वास्तु विज्ञान में प्रकृति के पंच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) और आठों दिशाओं के साथ-साथ चारों मुख्य कोनों (ईशान, आग्नेय, नैऋत्य और वायव्य) का एक विशिष्ट स्वामी, तत्व और स्वभाव निर्धारित किया गया है। जब हम अनजाने में किसी कोने में उसके विरोधी तत्व या अशुभ वस्तु को रख देते हैं, तो वहां की सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप धन के देवता भगवान कुबेर और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी उस स्थान से विमुख हो जाती हैं। यदि आप भी आर्थिक तंगी, कर्ज और बचत की कमी से जूझ रहे हैं, तो तुरंत अपने घर के इन कोनों की जांच करें और वहां रखी गई गलत चीजों को बाहर करें।
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा): देवताओं और गुरु बृहस्पति का वास, यहां भूलकर भी न रखें कबाड़, भारी सामान या डस्टबिन
घर का उत्तर-पूर्व कोना यानी 'ईशान कोण' वास्तु शास्त्र में सबसे पवित्र, संवेदनशील और पूजनीय स्थान माना जाता है। इस दिशा के अधिपति स्वयं देवाधिदेव महादेव भगवान शिव और ज्ञान के प्रदाता देवगुरु बृहस्पति हैं। ईशान कोण को संपूर्ण वास्तु पुरुष का मस्तक (सिर) माना गया है।
कूड़ादान (डस्टबिन) और झाड़ू: ईशान कोण में कभी भी कचरे का डिब्बा, झाड़ू या पोंछा नहीं रखना चाहिए। इस पावन कोने में गंदगी रखने से घर के मुखिया की निर्णय क्षमता प्रभावित होती है, मानसिक तनाव बढ़ता है और आय के नए रास्ते पूरी तरह बंद हो जाते हैं।
भारी अलमारी और कबाड़: ईशान कोण को हमेशा हल्का, खुला, हवादार और साफ-सुथरा रखना अनिवार्य है। यहां भारी लोहे की अलमारी, पुरानी टूटी-फूटी वस्तुएं या कबाड़ जमा करने से घर की आर्थिक प्रगति में भारी रुकावटें आती हैं।
जूते-चप्पल और चमड़े का सामान: यह देवताओं का प्रवेश द्वार माना जाता है। यहां जूते-चप्पल की रैक या चमड़े की वस्तुएं रखने से घर में घोर दरिद्रता और पितृ दोष का निर्माण होता है।
शौचालय (टॉयलेट) का निर्माण: ईशान कोण में शौचालय का होना वास्तु शास्त्र का सबसे बड़ा महादोष माना जाता है। यह दोष परिवार के संचित धन को बीमारियों में बर्बाद कर देता है और वंश वृद्धि में बाधा डालता है।
क्या रखना शुभ है: इस स्थान पर पूजा घर, शुद्ध जल का पात्र, तांबे के लोटे में गंगाजल, तुलसी का पौधा या हल्का फाउंटेन (जल फव्वारा) स्थापित करना अपार धन और मानसिक शांति प्रदान करता है।
उत्तर दिशा (कुबेर कोण): धन के देवता का मुख्य द्वार, इन 4 चीजों की मौजूदगी से रुक जाता है धन का प्रवाह
घर की उत्तर दिशा धन के अधिपति भगवान कुबेर और बुद्धि व व्यापार के स्वामी बुध ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है। घर में नकदी प्रवाह (Cash Flow), नौकरी में प्रमोशन और व्यापार के नए अनुबंध इसी दिशा से नियंत्रित होते हैं।
दीवार पर बंद पड़ी घड़ियां: वास्तु में रुकी हुई घड़ी समय के ठहरने और जीवन में आर्थिक विकास के अवरुद्ध होने का संकेत है। उत्तर दिशा की दीवार पर कभी भी बंद, टूटी या चटके हुए शीशे वाली घड़ी न लगाएं।
कांटेदार पौधे और कैक्टस: उत्तर दिशा में कैक्टस, बोनसाई या नुकीले पत्तों वाले पौधे रखने से कार्यक्षेत्र में अड़चनें आती हैं और प्रतिस्पर्धियों से नुकसान उठाना पड़ता है।
गहरा लाल या काला रंग: उत्तर दिशा जल तत्व की प्रतीक है। यहां अग्नि तत्व से जुड़ा गहरा लाल, मैरून या तामसिक काला रंग करवाने से ऊर्जा का गंभीर टकराव होता है, जिससे आमदनी कम और खर्चे दोगुने हो जाते हैं।
गलत दिशा में खुलती तिजोरी: उत्तर दिशा में रखी अलमारी या तिजोरी का पल्ला हमेशा उत्तर दिशा की ओर ही खुलना चाहिए। यदि तिजोरी का मुंह दक्षिण दिशा की तरफ खुलता है, तो धन कभी टिक नहीं पाता और घर में निरंतर फिजूलखर्ची बनी रहती है।
क्या रखना शुभ है: उत्तर दिशा में धन की तिजोरी, मनी प्लांट, हरा जेड प्लांट, कुबेर यंत्र या स्फटिक का श्रीयंत्र रखना अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।
आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व दिशा): अग्नि तत्व का स्थान, जल और नीले रंग की मौजूदगी से होता है भारी आर्थिक नुकसान
घर का दक्षिण-पूर्व कोना 'आग्नेय कोण' कहलाता है। इसके अधिपति अग्नि देवता और सुख-ऐश्वर्य के कारक शुक्र ग्रह हैं। यह दिशा घर की महिलाओं के स्वास्थ्य, वैवाहिक सुख और रोजमर्रा की नकदी (लिक्विड मनी) को संचालित करती है।
पानी की टंकी, बोरिंग या एक्वेरियम: आग्नेय कोण विशुद्ध रूप से अग्नि तत्व की दिशा है। इस कोने में भूमिगत जल टैंक (Underground Water Tank), पानी का बोरिंग, मटका या मछली का एक्वेरियम रखना अग्नि और जल का प्रत्यक्ष युद्ध कराता है। इसके दुष्प्रभाव से घर में अचानक भयंकर आर्थिक नुकसान, व्यापार में दिवालियापन और महिलाओं को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं घेर लेती हैं।
नीला और काला रंग: आग्नेय कोण में नीले, आसमानी या काले रंग के पर्दे, पेंट या टाइल्स का प्रयोग अग्नि की ऊर्जा को नष्ट कर देता है, जिससे परिवार के सदस्यों का पराक्रम और आमदनी घटने लगती है।
तिजोरी या मुख्य लॉकर: आग्नेय कोण में कभी भी मुख्य धन की तिजोरी नहीं रखनी चाहिए। अग्नि तत्व के प्रभाव से यहां रखा धन बहुत तेजी से व्यर्थ के दिखावे, मुकदमों और कोर्ट-कचहरी में जलकर खाक हो जाता है।
क्या रखना शुभ है: इस दिशा में रसोई घर (किचन), गैस का चूल्हा, बिजली का मेन स्विच बोर्ड, इनवर्टर, जनरेटर या लाल-नारंगी रंग के सजावटी लैंप रखना घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम दिशा): स्थिरता और पृथ्वी तत्व का केंद्र, यहां गड्ढा या हल्कापन लाएगा भारी कर्ज
घर का दक्षिण-पश्चिम कोना 'नैऋत्य कोण' कहलाता है, जिसके स्वामी छाया ग्रह राहु और अधिपति तत्व 'पृथ्वी' (Earth Element) है। यह दिशा घर की स्थिरता, रिश्ते, आयु और संचित पूंजी (Bank Balance) की नींव मानी जाती है।
जमीन में गड्ढा या अंडरग्राउंड वाटर टैंक: नैऋत्य कोण को पूरे घर का सबसे ऊंचा और सबसे भारी कोना होना चाहिए। यदि इस कोने में कोई गड्ढा, बेसमेंट, कुआं या सेप्टिक टैंक बना दिया जाए, तो घर का मुखिया गंभीर वित्तीय संकट, भारी कर्ज और मानसिक अवसाद के जाल में फंस जाता है।
मुख्य प्रवेश द्वार (Main Entrance): नैऋत्य कोण में घर का मेन गेट होना भयंकर वास्तु दोष माना जाता है। इससे घर में कभी बरकत नहीं होती और नकारात्मक ऊर्जा का वास रहता है।
हल्का और खुला छोड़ना: इस कोने को कभी भी खाली, नीचा या खुला नहीं छोड़ना चाहिए, अन्यथा जीवन में अस्थिरता आ जाती है।
क्या रखना शुभ है: नैऋत्य कोण में घर के मुखिया (Master Bedroom) का कमरा होना चाहिए। यहां भारी लकड़ी या लोहे की अलमारी रखें, जिसका मुख उत्तर या पूर्व की ओर खुले। इस कोने को सबसे ऊंचा और भारी रखने से परिवार की आर्थिक नींव हमेशा मजबूत रहती है।
घर में पैसों की बरकत बढ़ाने और तिजोरी भरने के 5 अचूक वास्तु उपाय
वास्तु दोषों को दूर करने के साथ-साथ घर में धन का निरंतर प्रवाह बनाए रखने के लिए इन सरल और शास्त्रसम्मत उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें:
मुख्य द्वार पर हल्दी-कुमकुम का स्वास्तिक: प्रतिदिन प्रातःकाल घर के मुख्य द्वार को स्वच्छ जल से धोएं और दोनों तरफ हल्दी व कुमकुम से शुभ-लाभ और स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा घर की दहलीज पार नहीं कर पाती।
तिजोरी में लाल कपड़ा और गोमती चक्र: अपनी तिजोरी या लॉकर में लाल या पीला रेशमी वस्त्र बिछाएं। उस पर 5 गोमती चक्र, 5 पीली कौड़ियां और एक चांदी का सिक्का रखें। यह उपाय धन को चुंबक की तरह आकर्षित करता है।
सूर्यास्त के बाद झाड़ू लगाने से परहेज: शास्त्रों के अनुसार शाम के समय गोधूलि वेला में घर में कभी झाड़ू नहीं लगानी चाहिए और न ही घर का कचरा बाहर फेंकना चाहिए। मान्यता है कि इस समय घर की सफाई करने से साक्षात लक्ष्मी घर से बाहर चली जाती हैं।
कपूर और लौंग की धूनी: प्रतिदिन शाम को घर के पूजा स्थान पर मिट्टी के दीपक में 2 कपूर की टिकिया और 2 लौंग जलाकर पूरे घर में उसकी धूनी दिखाएं। इससे घर के सभी कोनों की नकारात्मक ऊर्जा (Sha Chi) तुरंत नष्ट हो जाती है।
ईशान कोण में जल का छिड़काव: प्रतिदिन सुबह पूजा के बाद तांबे के पात्र में रखे जल में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर घर के ईशान कोण और मुख्य द्वार पर छिड़कें। यह घर में सकारात्मक ऊर्जा और दैवीय कृपा को बनाए रखता है।