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September 04 2026 12:24 am

ट्रंप के फैसले पर बिफरे नेतन्याहू! ईरान युद्ध को लेकर एक घंटे तक चली 'तू-तू मैं-मैं', क्या दरार पड़ गई है दोस्ती में

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India News Live,Digital Desk : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका और इजरायल के रिश्तों में 'अस्थिरता' के संकेत मिलने लगे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर हुई एक घंटे की लंबी फोन कॉल ने दोनों के बीच के मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, यह बातचीत इतनी तनावपूर्ण रही कि कॉल खत्म होने के बाद नेतन्याहू खासे गुस्से और बेचैनी में नजर आए।

'हमला रोकना सबसे बड़ी भूल', नेतन्याहू की चेतावनी

विवाद की मुख्य जड़ ट्रंप का वह फैसला है जिसमें उन्होंने ईरान पर होने वाले नए हमलों को फिलहाल टालने का निर्णय लिया है। सूत्रों की मानें तो ट्रंप का मानना है कि कूटनीति को एक मौका दिया जाना चाहिए, जबकि नेतन्याहू इसके सख्त खिलाफ हैं। इजरायल का मानना है कि हमलों को रोकने का मतलब ईरान को अपनी सैन्य शक्ति फिर से संगठित करने का मौका देना है, जिसे नेतन्याहू एक रणनीतिक चूक मान रहे हैं। नेतन्याहू ने ट्रंप को दोटूक चेतावनी देते हुए कहा है कि इस तरह के फैसलों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

ट्रंप का दावा: 'नेतन्याहू वही करेंगे जो मैं कहूंगा'

एक तरफ जहां नेतन्याहू नाराज हैं, वहीं ट्रंप का अंदाज काफी आश्वस्त नजर आ रहा है। हाल ही में कोस्ट गार्ड एकेडमी में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने आत्मविश्वास के साथ कहा था, "बीबी (नेतन्याहू) वही करेंगे जो मैं उनसे करने के लिए कहूंगा। हमारे संबंध बेहतरीन हैं।" ट्रंप का यह बयान यह जताने के लिए काफी था कि वाशिंगटन अभी भी इस गठबंधन में ड्राइविंग सीट पर है। हालांकि, नेतन्याहू की नाराजगी ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बैकचैनल डिप्लोमेसी और सीजफायर की कोशिशें

ट्रंप प्रशासन फिलहाल पाकिस्तान, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों के साथ मिलकर एक 'लेटर ऑफ इंटेंट' पर काम कर रहा है। योजना यह है कि अमेरिका और ईरान इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करें, जिसके बाद 30 दिनों का युद्धविराम लागू हो सके। इस दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थिरता और सुरक्षा पर चर्चा करने की रणनीति है। इजरायल के राजदूत ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी अमेरिकी सांसदों को दे दी है, जो इस बात का संकेत है कि इजरायल अब इस मामले को कूटनीतिक स्तर पर बहुत गंभीरता से ले रहा है।

क्या वाशिंगटन जाएंगे नेतन्याहू?

सूत्रों का कहना है कि नेतन्याहू ट्रंप के इस रुख से इतने असहज हैं कि वे अगले कुछ हफ्तों में अमेरिका का दौरा करने की योजना बना रहे हैं। उनकी मंशा ट्रंप से आमने-सामने मुलाकात कर इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को फिर से मजबूती से रखने की है। दूसरी ओर, ईरान के 14-सूत्रीय प्रस्ताव पर भी बातचीत जारी है, जिसमें पाकिस्तान की मध्यस्थता अहम मानी जा रही है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या नेतन्याहू अपनी जिद पर कायम रहेंगे या ट्रंप की कूटनीतिक रणनीति के आगे झुकने को मजबूर होंगे।